आईआईटी को नए साल में मिला तोहफा, 75 करोड़ रुपए से बनेगा साइंस एंड टेक्नोलॉजी रिसर्च पार्क

आईआईटी कानपुर ने जहां 2017 में सबसे ज्यादा प्लेसमेंट देकर चर्चित रहा, वहीं 2018 भी कई सौगात लेकर आया है...

कानपुर. आईआईटी कानपुर ने जहां 2017 में सबसे ज्यादा प्लेसमेंट देकर चर्चित रहा, वहीं 2018 भी कई सौगात लेकर आया है। स्टूडेंट्स के लिए बेहतर सुविधाओं के साथ जॉब देने के लिए आने वाली कंपनियों को शोध के एक प्लेटफार्म के लिए साइंस एंड टेक्नोलॉजी रिसर्च पार्क बनाया जाएगा। इसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस पार्क के लिए 75 करोड़ रूपए आवंटित कर दिए हैं, जिसकी पहली किस्त पांच करोड़ रूपए संस्थान के बैंक अकाउंट में आ गई है। निदेशक मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि संस्थान ने मंत्रालय को पत्र लिखकर पार्क के लिए धन की मांग की थी, जिसे सरकार ने मंजूर कर लिया और नये साल का तोहफा आईआईटी को मिल गया।


5 करोड़ की धनराशि संस्थान को मिली

आईआईटी कानपुर हर साल नए-नए आयाम बना रहा है। नोटबंदी और जीएसटी के बावजूद देश के अन्य शिक्षण संस्थानों के मुकाबले 2017 में सबसे ज्यादा स्टूडेंट्स को प्लेसमेंट मिला। आईआईटी प्रशासन ने 2016 में केंद्र सरकार से साइंस एंड टेक्नोलॉजी रिसर्च पार्क के निर्माण कराए जाने को लेकर धन की मांग की थी। पिछले दो सालों से फाइल मंत्रायल के चक्कर लगा रही थी। लेकिन संस्थान ने पत्र लिखकर दोबारा इस पर विचार करने की बात कही। जिसके बाद मंत्रायल हरकत में आया और पार्क के लिए 75 करोड़ की राशि स्वीकृति कर दी। आईआईटी के निदेशक मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि एक जनवरी को पहली किस्त स्वरूप पांच करोड़ रूपए संस्थान को मिल गए हैं, बांकि की रकम जल्द आ जाएगी। इसी माह में पार्क का निर्माण शुरू हो जाएगा। पार्क बनने में करीब दो से तीन साल का समय लगेगा। इस पार्क से संस्थान के छात्रों के लिए बेहतर प्लेसमेंट का ऑफर मिलेगा तो अन्य कंपनियों को शोध के लिए एक प्लेटफार्म।


सिडबी की मदद से बनेगा शोध पार्क

निदेशक ने बताया कि रिसर्च पार्क में लैबोरेटरी, लाइब्रेरी, टेक्नोलॉजी और डेवलपमेंट से संबंधित हर वह सुविधा होगी जो बड़ी कंपनियों के प्रोडक्ट रिसर्च में मददगार साबित हो सकती है। सिडबी की मदद से रिसर्च पार्क को उद्यमिता का बड़ा सेंटर बनाया जाएगा। यहां सरकारी और गैर सरकारी कंपनियों को भी रिसर्च की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसका सबसे बड़ा फायदा स्टूडेंट्स ं को मिलेगा। जो कंपनियां प्रोडक्ट के रिसर्च के लिए आएंगी, वे इन छात्रों के साथ काम करेंगी। इससे वे कंपनियां छात्रों को सीधा जॉब का ऑफर दे सकती हैं। अग्रवाल ने बताया कि रिसर्च पार्क का सेटेलाइट सेंटर आईआईटी के नोएडा कैम्पस में स्थापित किया जाएगा। इसका निर्माण कार्य चल रहा है और कुछ दिनों के बाद वह बनकर तैयार हो जाएगा। अग्रवाल कहते हैं कि हमें उम्मीद है कि दो साल में पार्क बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगा। संस्थान नोएडा में इसका सेटेलाइट सेंटर भी तैयार करा रहा है। रिसर्च पार्क बनने से सरकारी व गैर सरकारी कंपनियों के साथ-साथ छात्रों को सीधा लाभ होगा।


विनयशील ओबेराय ने किया था शिलान्यास

आईआईटी में रिसर्च पार्क की नींव दो साल पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव विनयशील ओबेराय ने रखी थी। वह कानपुर आए थे और पार्क का शिलान्यास किया था। साथ ही उस समय उन्होंने 70 करोड़ रूपए की धनराशि भी स्वीकृति की थी। लेकिन धनराशि स्वकृति होने के बाद मंत्रायल ने अपने हाथ पीछे कर लिए। आईआईटी प्रशासन ने 2017 में मंत्रायल को पत्र लिखकर शोध पार्क के लिए धन राशि देने की मांग की थी। इसी के बाद मंत्रायल के अधिकारी हरकत में आए और आनन-फानन में पांच करोडद्य रूपए संस्थान के अकाउंट में भिजवा दिए। आईआईअी निदेशक ने बताया कि केंद्र सरकार शोध को लगातार बढ़ावा दे रही है। जल्द ही आठ संस्थानों के पास अपने रिसर्च पार्क होंगे। आईआईटी बाम्बे और आईआईटी खड़गपुर में रिसर्च पार्क पास हो चुका है।

नितिन श्रीवास्तव
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