आईआईटी की मिस्टर इंडिया पार्ट टू, लॉन्च, अदूश्य होकर दुश्मनों को खत्म करेंगे जवान

आईआईटी की मिस्टर इंडिया पार्ट टू, लॉन्च, अदूश्य होकर दुश्मनों को खत्म करेंगे जवान

Vinod Nigam | Publish: Dec, 02 2018 09:05:04 AM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

आईआईटी कानपुर ने विकसित की नई तकनीकि, विशेष कपड़ों और गैजेट्स की मदद से भारतय सेना के जवान आरएफ सेंसर, ग्राउंड रडार, एडवांस बैटल फील्ड रडार और इंफ्रारेड कैमरों को चकमा दे सकेंगे।

कानपुर। पाकिस्तान में बैठकर अयोध्या के मालमे पर धमकी देने वाले अजहर महमूद, हाफिज सईद सहित वहां के आर्मी के लिए बुरी खबर है। आईआईटी कानपुर सांइटिस्टों ने मिस्टर इंडिया टू फिल्म बनाई है, जो भारत के जवानों के लिए कवच तो वहीं दुश्मनों पर कहर बनकर टूटेगी। फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर अनंत रामाकृष्णा और उनकी टीम ने भारतीय जवानों के लिए हीट रेडिएशन को रोकन में सक्षम मेटामैटीरियल्स से खास तरह के कपड़े और ऐसी वस्तुएं तैयार की हैं, जिन्हें पहनने के बाद रात में सैनिकों की मौजूदगी किसी भी उपकरण की पकड़ में नहीं आएगी। इन्हें तैयार करने में इनकी टीम को करीब दो साल लग गए हैं। अब इन्हें सेना के पास टेस्टिंग के लिए भेजा गया है और वहां से उत्तीर्ण होने के बाद इनका निर्माण रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) करेगा।

दुश्मनों पर करेंगे प्रहार
रूपहले पर्द पर फिल्म मिस्टर इंडिया नामक फिल्म आई थी। 1987 में बनी इस फिल्म के बाद एक्टर अनिल कपूर को लोग मिस्टर इंडिया उपनाम से पुकारने लगे थे। इस फिल्म में हीरो के पास घड़ीनुमा एक गैजेट था। इसे पहनकर वह अदृश्य हो देश के दुश्मनों को मौत के घाट उतारा था। कुछ इसी तरह का अविष्कार आईआईटी कानपुर के फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर अनंत रामाकृष्णा और उनके स्टूडेंट्स ने मिलकर किया है। प्रोफेसर व उनकी टीम ने
,कुछ कपड़ों का निर्माण किया है, जिन्हें पहनने के बाद वो दुश्मनों की नजर से बच जाएंगे, साथ ही उनके घर में घुसकर उन्हें यमलोक पहुंचा देंगे। प्रोफेसर के मुताबिक अब दुश्मन नए-नए हथियारों के जरिए आतंक फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में हमें भी उनसे निपटने के लिए अगल प्लॉनिंग करनी होगी।

पहनने के बाद जवान अदृश्य
प्रोफेसर अनंत रामाकृष्णा के मुताबिक, विकसित विशेष कपड़ों और गैजेट्स की मदद से हमारे सैनिक आरएफ सेंसर, ग्राउंड रडार, एडवांस बैटल फील्ड रडार और इंफ्रारेड कैमरों को चकमा दे सकेंगे। दरअसल अभी अंधेरे में व्यक्ति या वस्तुएं हीट रेडिएशन (वस्तु या शरीर के तापमान) के सहारे पकड़ में आती हैं। इससे एडवांस इंफ्रारेड कैमरे घने अंधेरे में भी किसी व्यक्ति को खोज निकालते हैं। यह तकनीक सभी देश अपनी-अपनी सीमाओं पर इस्तेमाल करते हैं। पर इन विशेष कपड़ों और गैजेट्स पहनने के बाद इंडिया के जवान दुश्मनों की रडार में नहीं आएंगे और अदृश्य होकर उनके ठिकानों में जाकर उन्हें मार गिराएं।

डीआरडीओ की टेस्टिंग में उत्तीर्ण
आईआईटी के जरिए तैयार कई वस्तुओं की टेस्टिंग रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) कर रहा है। डीआरडीओ की परीक्षा में कपड़ों पर लगाए जाने वाली पैचनुमा डिवाइस, जिसे मेटामैटीरियल्स से बनाया गया है, पूरी तरी से उत्तीर्ण हो गया है। डीआरडीओ की तरफ से इसे हरी झंडी दे दी गई है, जिसके बाद संस्थान ने इसे पेटेंट कराने के लिए आवेदन कर दिया है। प्रोफेसर अनंत रामाकृष्णा ने बताया कि दो साल तक हम लोगों ने इस पर काम किया। पूरा प्रोजेक्टर तैयार करने के बाद हमने डीआरडीओ के अधिकारियों से संपर्क किया और अपनी तकनीकि को उनके सामने रखा। जहां डीआरडीओ ने इसे सौ में सौ अंक दिए हैं।

दुश्मन को चकमा देने में कारगर
प्रोफेसर अनंत रामाकृष्णा के मुताबिक मेटामैटेरियल्स से खास तरह का स्टिकर बनाया जा रहा है। इसे सेना के टैंक, लड़ाकू विमान और ड्रोन आदि पर लगाया जा सकेगा। जिसके बाद वे दुश्मन को चकमा दे सकेंगे। इन पर पानी, हवा या गर्मी का असर नहीं होगा और अल्ट्रावॉयलेट और इंफ्रारेड किरणों का असर काफी कम रहेगा। इस तकनीक पर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर कुमार वैभव श्रीवास्तव और मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर जे रामकुमार काम कर रहे हैं। प्रोफेसर ं के मुताबिक इस तकनीक की खासियत है कि इसमें पैच ही ज्यादा सफल होंगे। अगर किसी इंसान या उपकरण को पूरी तरह ढका गया तो वह पकड़ में आ जाएगा। प्रोफेसर ने बताया कि मेटामैटेरियल्स के इस्तेमाल से सेना के लिए संसाधन तैयार किए जा रहे हैं। इसमें डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी भी सहयोग कर रहा है।

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