शिवपाल के कमांडरों ने सपा का बढ़ाया टेंशन, 2019 में साइकिल को कर सकते हैं पंच्चर

शिवपाल के कमांडरों ने सपा का बढ़ाया टेंशन, 2019 में साइकिल को कर सकते हैं पंच्चर

Vinod Nigam | Publish: Apr, 17 2018 10:44:02 AM (IST) Kanpur, Uttar Pradesh, India


दो साल से शिवपाल फैन्स एसोसिएशन में कार्यकर्ताओं की हो रही थी नियुक्ति 46 जिलों में एक लाख कार्यकर्ताओं की खड़ी कर ली फौज

कानपुर। पिछले करीब दो साल से समाजवादी पार्टी में हासिए पर चल रहे पूर्व मंत्री शिवपाल यादव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ होली के बाद से जुबानी हमला करना बंद कर दिया है। लेकिन अंदरखाने वह सपा में सेंधमारी कर अपनी नई बिग्रेड तैयार कर रहे हैं। इटावा से शुरू होते हुए शिवपाल की फौज कानपुर के साथ ही प्रदेश के 46 जिलों में फैल चुकी है। लालटोपी धारी यह महारथी शिवपाल के जमीनी कार्यकर्ता हैं और पिछले कई सालों से इनके लिए कार्य करते आ रहे हैं। 2017 विधानसभा चुनाव के वक्त अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल से पद छीन लिया, तभी से शवपाल यादव फैंस एसोसिएशन एक्शन में आ गया और गांव, गली, मोहल्लों और बूथों में इन्होंने दस्तक दे दी है। देरशाम कानपुर स्थित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए शिवपाल यादव अपने फौज के कमांडरों के साथ गुप्त बैठक की और 2019 में बेइमानों से लड़ने का ऐलान किया। इस अवसर पर शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी का एकबार भी जिक्र नहीं किया।
शिवपाल बिना बोले तैयार कर रहे जमीन
एक वक्त था जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिवपाल यादव के बिना एक पत्ता तक नहीं हिलता था। मुलायम सिंह यादव के बाद समाजवादी पार्टी में दूसरे नंबर पर उनकी गिनती होती थी। 2017 विधानसभा चुनाव से पहले वह ही उम्मीदवारों को टिकट देते और जिलों में शिवपाल ही कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की नियुक्ति करते थे। लेकिन दो साल पहले सपा परिवार में दरार पड़ने के बाद भजीते अखिलेश ने उन्हें पार्टी से बेदखल कर साइकिल पर कब्जा कर लिया। कभी मुलायम सिंह को अपना आदर्श तो कभी को बेहतर सीएम कहकर संबोधित करते रहे। लेकिन शिवपाल यादव बिना कुछ बोले अंदर ही अंदर अपनी फौज तैयार करने में जुटे रहे। रविवार को वह खुलकर पहली बार अपनी फौज के कमांडरों के साथ बैठक की और आगे की राजनीति के नए संकते दे दिए।
निजी नेटवर्क पार्टी का बनेगा आधार
शिवपाल यादव फैंस एसोसिएशन ने रविवार को शास्त्रीनगर स्थित गेस्ट हाउस में सम्मेलन रखा था। इस संगठन के कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए शिवपाल यादव पहुंचे। सड़क से लेकर अंदर कार्यक्रम स्थल तक लाल टोपीधारी युवाओं की अच्छी-खासी भीड़ इशारा कर रही थी कि समाजवाद कुनबे में से ही पूर्व मंत्री ने अपनी अलग ब्रिगेड को मजबूती से खड़ा कर लिया है। माहौल देख गदगद हुए यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किए। युवा रोजगार के लिए परेशान हैं। किसी वर्ग का सम्मान नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि अब हम हमारी यह टीम तैयार है। इसी के माध्यम से हम बेईमान और भ्रष्टाचारियों से लड़ेंगे। भरोसा दिलाता हूं कि जीत हमारी ही होगी। कहा कि इस संगठन को अब ब्लॉक और बूथ स्तर तक खड़ा करना है। इस बीच उन्होंने एक बार भी सपा का नाम तक नहीं लिया। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि शिवपाल यादव नई पार्टी बनाते हैं, तो यही उनका निजी नेटवर्क पार्टी का आधार बनेगा।
75 जिलों में पहुंच जाएगी शिवपाल की फौज
कानपुर से एसोसिएशन के गठन की शुरुआत करने वाले प्रदेशाध्यक्ष आशीष चौबे ने बताया कि संगठन अब 46 जिलों में पहुंच चुका है। इसके लगभग एक लाख सदस्य हो चुके हैं। इसकी रिपोर्ट पूर्व मंत्री को दे दी गई है। वह लगातार कार्यक्रमों में भाग लेकर युवाओं से मुलाकात भी कर रहे हैं। शिवपाल फैन्य एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवपाल यादव को हम अपना नेता मानते हैं और आने वाले वक्त में वह जो फैसला करेंगे हम उसी के साथ खड़े नजर आएंगे। आशीष चौबे ने खुलकर कहा कि समाजवादी पार्टी में अब जमीनी कार्यकर्ताओं के बजाए चापलूसों की सुनी जाती है। 2017 विधानसभा चुनाव में यदि हमारी व हमारे नेता की बात मानी जाती तो यहां सपा की सरकार होती। आशीष चौबे ने बताया कि 29 जिलों में तेजी से कार्यकर्ताओं को शिवपाल फैन्स एसोसिएशन के बैनर में जोड़ा जा रहा है। साल के आखरी माह तक यूपी के 75 जिलों में एसोसिएशन के कार्यकर्ताओं की नियुक्ति कर दी जाएगी
सियासत के माहिर खिलाड़ी हैं शिवपाल
शिवपाल यादव 1988 में पहली बार इटावा के जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष चुने गए। 1996 में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अपनी जसवंतनगर की सीट छोटे भाई शिवपाल के लिए खाली कर दी थी। इसके बाद से ही शिवपाल का जसवंतनगर की विधानसभा सीट पर कब्जा बरकरार है। मुलायम सिंह यादव ने 1992 में जब समाजवादी पार्टी बनाई तब परिवार में हर उस व्यक्ति को जगह दी जो राजनीति कर सकता था। तब अखिलेश यादव तो समाजवादी पार्टी का चेहरा नहीं थे लेकिन शिवपाल यादव तब से मुलायम सिंह की अंगुली पकड़कर चलते आ रहे हैं। आज राजनीतिक तजुर्बे में शिवपाल किसी से कम नहीं। शिवपाल सिंह यादव 20 साल से यूपी विधानसभा के सदस्य हैं। मुलायम की सरकारों में मंत्री रहे। जब मुलायम ने देश की राजनीति के लिए दिल्ली का रुख किया तो मायावती की सरकार के वक्त विपक्ष के नेता बने।

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