स्वास्थ्य मंत्री ने कहा अब यही ड्रेस पहन कर खेले टीम इंडिया

Vinod Nigam

Updated: 02 Jul 2019, 08:11:01 AM (IST)

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर। उत्तर प्रदेश सरकार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह टीम इंडिया की जर्सी के रंग पर उठे विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भगवा को किसी धर्म विशेष से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। महबूबा मुफ्ती की सियासत जम्मू-काश्मीर से खत्म हो चुकी है और इसी के कारण वो अब खेल को धर्म के चश्मे से देख रही है।। भगवा त्याग, बलिदान और देश सेवा का प्रतीक रहा था। इसे आज भी पूरे देश की एकता से जोड़कर देखा जाना चाहिए। हम तो चाहते हैं कि आईसीसी और बीसीसीआई एक दिवसीय टीम के भारतीय खिलाड़ियों को यही ड्रेस दे।

भगवा देश को जोड़ता है
कप्तान विराट कोहली की अगुवाई में भारतीय क्रिकेट टीम रविवार को एजबेस्टन के मैदान पर मेजबान इंग्लैंड के साथ हुए मुकाबले नारंगी-नीले ड्रेस में खेलने उतरी, जिसको लेकर देश में सियासत गर्म हो गई है। टीम के इस नए ड्रेस पर समाजवादी पार्टी नेता अबू आजमी के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ने विरोध जताया था। जिस पर आल इंडिया मेडिकल एसोसियशन में सुपर स्पेसीलियटी ओपीडी का उद्घाटन करने कानपुर पहुंचे स्वास्थ मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि भगवा देश को जोड़ता है। मुफ्ती की ‘संकीर्ण मानसिकता’ बताते हुए कहा है कि किसी रंग को किसी धर्म-संप्रदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

मेडिकल कॉलेज की संख्या में बढ़ोतरी
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने इस मौके पर कहा कि 2017 की तुलना में 2018 तक जो इंफेलाइटिस के केसों में कंट्रोल किया गया है, उसमें जो मृत्यु की दर थी उसमे गिरावट आई है। पूरे भारत में 80 प्रतिशत स्पेस्लिस्ट डाक्टरों की कमी है जिसको पूरा करने के लिये मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में 13 मेडिकल कालेज थे अब उनकी संख्या बढ़ाई जा रही है। वहीं डॉक्टरों की सुरक्षा पर मंत्री ने कहा कि क्लीनिक स्टेबलिशमेंट एक्ट वर्ष 2011 में बना लेकिन अनुपालन नहीं हुआ। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद वर्ष 2017 में अनुपाल शुरू हुआ और दो वर्षों में 14 एफआइआर दर्ज किए गए।

आप में अधिक संवेदनाएं

मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने डॉक्टरों से कहा कि आपके काम बंद करने से आमजनता को परेशानी होती है, आप में अधिक संवेदनाएं हैं। इंसान के प्रति संवेदनाएं रखते हुए उनके दर्द को महसूस करें। कोलकाता में जो समस्या हुई उसे ममताजी को सुलझाना चाहिए था। देश भर के चिकित्सकों ने सांकेतिक विरोध किया। जन स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए अधिक जोर होना चाहिए। डॉक्टर और मरीज के बीच जो दूरियां बढ़ रही हैं उन्हें कम करें। मरीज को कम पैसे में बेहतर इलाज दें, जिससे गरीब के दिल में डॉक्टरों के लिए सम्मान बढ़े।

अखिलेश-मायावती पर कसा तंज
मंत्री ने कहा कि मायावती दलितों की हमदर्द हैं और अखिलेश यादव मुसलमानों के रहनुमा बनने का दावा करते हैं। सच्चाई यह है कि इंसेफेलाइटिस का सबसे अधिक कहर मुस्लिमों और दलितों पर है। पूर्ववर्ती सरकारों ने बीमारी की रोकथाम के लिए कोई कदम नहीं उठाए। हमारी सरकार आने के बाद इस पर जमीन में काम हुआ और जिसका परिणाम है कि अब पहले की तुलना में बच्चों की मृत्युदर में कमी आई है। साथ ही उन्होंने डॉक्टर से कहा कि अपने विरोध का तरीका बदलें, हड़ताल की बजाए जापान की तर्ज पर अधिक काम करके दिखाएं।

शाम को चलेगी ओपीडी
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, आईएमए के डॉक्टर शेयरिंग ओपीडी का माड्यूल तैयार कर लें ताकि शाम की ओपीडी चलाई जा सके। इसमें प्राफिट शेयरिंग भी करेंगे। तैयार माड््यूल के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जिलाधिकारी के साथ बैठक कर पूरी तैयारी कर लें। दस दिन में तैयार करके भेजें। इसे कैबिनेट से पास कराकर लागू कराएंगे। उर्सला, हैलट समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में शाम को ओपीडी चलेगी तो भीड़ कम होगी और डॉक्टर ठीक तरीके से इलाज दे सकेगा।

 

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