भैयादूज पर जेल में बंद भाइयों को रोचना करने का बहनों का अरमान नहीं हो सकेगा पूरा

हालांकि प्रत्येक वर्ष दिवाली के एक दिन बाद होने वाले भैया दूज पर बहनें जेल में बंद अपने भाइयों को रोचना करती थीं।

By: Arvind Kumar Verma

Published: 15 Nov 2020, 01:19 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

कानपुर-पूरे देश में दिवाली का त्योहार जिस तरह मनाया गया, उसी तरह जिला कारागार में भी जेल प्रशासन समेत कैदियों ने पर्व उत्साह से मनाया। हालांकि प्रत्येक वर्ष दिवाली के एक दिन बाद होने वाले भैया दूज पर बहनें जेल में बंद अपने भाइयों को रोचना करने जाती थीं, लेकिन इस बार कोविड-19 के संकट के चलते बहनें ऐसा नहीं कर सकेंगी। कोविड-19 स्वास्थ्य संबंधी प्रोटोकॉल के तहत जेल में बहने भाइयों के सामने जाकर रोचना नहीं कर सकेंगी। जेल प्रशासन द्वारा व्यवस्था लागू की गई है कि बहनों के भावुक संदेश उनके भाइयों के नाम के साथ जेल में लगे लाउडस्पीकरों द्वारा सुनाए जाएंगे।

इसके साथ फोन द्वारा भी बहनों की उनके भाइयों से बात कराई जाएगी। जेल अधिकारियों की मानें तो इस पर्व के मौके पर परिजनों से आमने सामने मुलाकात न होने से बंदी तनाव में आ सकते हैं। इसलिए सभी जेल ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह कैदियों के साथ सामान्य रूप से घर परिवार की बातें कर उन्हे राहत दें। हालांकि शनिवार दिवाली की रात में जेल का कोना-कोना रोशनी से जगमगाता रहा। जिला कारागार दीपकों से रोशन हुआ। दीपक व झालरों की छटा कारागार में दिखाई दी।

बताया गया कि जेल प्रशासन ने इसके लिए 11151 मिट्टी दिए का इंतजाम किया था। शुभ मुहूर्त में पूजन हवन के बाद दीपक जलाकर दिवाली मनाई गई। जेल अधीक्षक आरके अग्रवाल ने बताया कि दीपक के साथ जेल परिसर को झालरों से भी रोशन किया गया है। इसके साथ ही थम चक्र में स्थापित मंदिर व मस्जिद को भी फूल मालाओं से आकर्षक सजाया गया। कैदियों का मनोरंजन करने के लिए प्रत्येक चक्र में रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में जीतने वाले कैदी को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

Arvind Kumar Verma
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