कन्नौज पर शिवपाल सिंह की निगाहें, अखिलेश के लिए बनेंगे बड़ी मुसीबत

कन्नौज पर शिवपाल सिंह की निगाहें, अखिलेश के लिए बनेंगे बड़ी मुसीबत

Alok Pandey | Publish: Sep, 09 2018 01:48:21 PM (IST) Kanpur, Uttar Pradesh, India

पिछले लोकसभा चुनाव में कन्नौज में सपा की उम्मीदवार और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव भाजपा उम्मीदवार सुब्रत पाठक से जैसे-तैसे कड़े मुकाबले में जीत पाई थीं।

कानपुर. समाजवादी पार्टी के सुल्तान के लिए बड़ी मुसीबत बनने की जुगत में जुटे हैं उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव। समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने मिशन 2019 के लिए कन्नौज को अखाड़ा बनाने का इरादा तय किया है। कन्नौज सीट से चुनाव लडक़र शिवपाल सिंह एक तीन से कई निशाने साधने की रणनीति बना रहे हैं। दरअसल, कन्नौज में यादव-कुर्मी मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है, इसके साथ ही कन्नौज के पुराने समाजवादियों के साथ शिवपाल सिंह यादव के रिश्ते बेहद पुख्ता हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में कन्नौज में सपा की उम्मीदवार और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव भाजपा उम्मीदवार सुब्रत पाठक से जैसे-तैसे कड़े मुकाबले में जीत पाई थीं। ऐसे में यदि शिवपाल सिंह यादव लोकसभा चुनाव के दौरान कन्नौज से उम्मीदवार बनते हैं तो सपा के संभावित उम्मीदवार अखिलेश यादव के लिए बड़ी मुसीबत बनेंगे।

 

सपा का अभेद किला है कन्नौज, लेकिन भाजपा ने किया कमजोर

यूं तो कन्नौज लोकसभा सीट समाजवादी पार्टी का अभेद किला है, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने सपाई किले को दरका दिया है। लोकसभा चुनाव में सपा उम्मीदवार डिंपल यादव बेहद मामूली अंतर से चुनाव जीत पाई थीं। भाजपा प्रत्याशी सुब्रत पाठक कई राउंड तक बढ़त पर रहे थे। अंत में डिंपल 20 हजार से कम मतों से जीत पाई थीं। बहरहाल, अब शिवपाल यादव के समाजवादी सेक्युलर मोर्चे के गठन के बाद वर्ष 2019 का चुनाव और भी दिलचस्प हो गया है। कन्नौज लोकसभा सीट की बात करें तो यह सीट समाजवादियों का गढ़ रही है। अखिलेश यादव अगले चुनाव में डिंपल के बजाय खुद को कन्नौज का प्रत्याशी घोषित कर चुके हैं। ऐसे में परिवार की लड़ाई में भतीजे अखिलेश को सबक सिखाने के लिए शिवपाल सिंह यादव कन्नौज सीट से ताल ठोंक सकते हैं। कन्नौज संसदीय सीट पर शिवपाल सिंह यादव का भी वर्चस्व रहा है और बड़ी संख्या में वहां के स्थानीय लोगों के साथ-साथ नेता और कार्यकर्ता व्यक्तिगत परिचित हैं।

 

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