जहरीली शराब ने कईयों की निगल ली जिंदगी, दर्जन भर से ज्यादा लोगों की आंख की रोशनी छीनी

पुलिस और आबकारी विभाग की मिलभगत से चल रहा कारोबार, शिकायत के बाद भी ठेका संचालक के खिलाफ नहीं हुई कार्रवाई

By: Vinod Nigam

Published: 19 May 2018, 02:07 PM IST

कानपुर। जिले के दर्जनों गांवों में पिछले एक दशक से शराब का अवैध करोबार फल-फूल रहा था। ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी पुलिस औा आबकारी विभाग के अफसरों के कान में जूं नहीं रेंगी। जिसका खामियाजा शनिवार को छह लोगों को अपनी जान गवांकर उठाना पड़ा। शनिवार की सुबह सजेंडी थानाक्षेत्र के दूलगांव गांव में श्याम बहादुर यादव का सरकारी ठेके की दुकान है। सरकारी ठेके में 24 घंटे शराब की बिक्री होती थी। भोर पहर र्दजनों लोग शराब पीने के लिए ठेके पहुंचे। डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोगों ने शराब खरीदी और उसका सेवन किया। कुछ मिनट के बाद सभी के अांखों में दिखना बंद हो गया और पेट में दर्द के चलते वह कराहने लगे। ठेका संचालक दुकान बंद कर मौके से फरार हो गया। ग्रामीणों ने सभी को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए, जहां छह लोगों की मौत हो गई, वहीं आठ की हालत गंभीर बनी हुई। सूचना पर पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और शवों को कब्जे में लेने की कोशिश की तो ग्रामीण उनसे मिड़ गए। काफी समझाने के बाद ग्रामीणा शांत पड़े। मरने वालों में से एक रिटायर्ड दरोगा है, जिसे परिजन इलाज के लिए रिजेंसी लाए थे, जहां उसने दम तोड़ दिया। एसएसपी ने मृतकों की संख्या चार बताई है, जबकि गांववालों का कहना है कि छह की अस्पताल ले जाते ही मौत हो गई थी, वहीं मौतों का अांकड़ा बड़ सकता है।
शराब का सेवन से इनकी हुई मौत
सचेन्डी स्थित दूलगांव में रामबालक का देशी शराब ठेका है। ठेका खुलने का समय दोपहर 12 से रात 10 बजे तक का है। मगर इस ठेके के बंद होने के बावजूद सुबह छह बजे से चोर दरवाजे से शराब बिकने लगती है। इसी ठेके से सचेन्डी स्थित दूलगांव, सुरार, हेतपुर आदि गांव के लोग शराब लेते हैं। शनिवार सुबह लगभग छह बजे गजेंद्र पुत्र पंचम निवासी सुरार, राकेश पुत्र वीरेंद्र शुक्ला, निवासी दुल, उमेश पुत्र पुत्तन, निवासी भूल, उमेश सिंह पुत्र बेचू निवासी भूल और दूलगांव निवासी रिटायर्ड दरोगा रामसजीवन की मौत हो गई, वहीं एक की शिनाख्त अभी तक नहीं हो पाई। जबकि आठ से ज्यादा ग्रामीणों की हालत गंभीर बनी हुई है। लहरंकि जिला प्रशासन ने तीन के मरने की पुष्टि की जबकि गांववालों ने 6 लोगों की मौत की बात कही है। वहीं हैलट अस्पताल में बब्बन, महेश, भोला, तुलसी राम, जगजीवन, रघुवीर, श्यामवीर, जनार्दन, कन्नौज निवासी राजपाल, देव, भूपसिंह, अशोक, महेशचंद्र, रामगोपाल, घनश्याम व विनोद की हालत गंभीर बताई जा रही है।
आंख की रोशनी गई
अलग अलग गांवों में एक दर्जन से अधिक लोगों को या तो दिखना कम हो गया या उनकी आंखों की रोशनी चली गई। सूचना होने पर सचेन्डी थाने की फोर्स मौके पर पहुंची। इसके बाद डीएम सुरेन्द्र सिंह, एसएसपी अखिलेश कुमार, एसपी ग्रामीण, एसडीएम, आबकारी अधिकारी और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। ठेका संचालक मौके से फरार हो गया है। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के सामने ठेके का ताला तोड़कर शराब के नमूने भरे गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक मामले में एफआईआर दर्ज करा सख्त कार्रवाई की जाएगी इसके अलावा ठेके का लाइसेंस भी निरस्त किया जाएगा। शराब जहरीली होने की आशंका पर जांच के आदेश दिए गए हैं। शराब में मिले केमिकल की जांच होगी। जांच का यह बिंदु होगा कि आखिर शराब जहरीली कैसे हुई।
आंख से दिखना हुआ बंद
रिटायर्ट दरोगा के बेटे ने बताया कि शनिवार को गांव के ठेके से उन्होंने शराब खरीदी थी। जिसे लेकर वह घर आए और जैसे ही पिया वैसे ही उनकी तबियत बिगड़ने लगी। आंख की रोशनी चली गई और पेट के दर्द से कराहने लगे। हमलोग उन्हें लेकर प्राथमिक स्वास्थ केंद्र गए, जहां से डॉक्टरों ने हैलट के लिए रेफर कर दिया। यहां डॉक्टरों ने हालम गंभीर होने पर दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी है। हम उन्हें लेकर रेजेंसी पहुंचे, जहां कुछ मिनट के बाद पिता की मौत हो गई। हैलट के डॉक्टरों ने बताया कि शराब के इंफेक्शन के चलते ग्रामीणों के आंखों की रोशनी चली गई है। वहीं घटना को लेकर ग्रामीणों में पुलिस के प्रति आक्रोश भी देखने को मिला। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में कच्ची शराब का कारोबार धड़ल्ले से होता है। जुआरियों के बड़े-बड़े फड़ सजते है, जिसकी कई बार स्थानीय पुलिस से शिकायत भी की जा चुकी है। पुलिस ने आजतक कोई कार्रवाई नहीं की।
दूसरे जिलों से लाकर बेची जा रही कच्ची शराब
ग्रामीणों ने बताया कि गांव का ठेकदार कच्ची शराब की मिलावट की शराब की बिक्री कई सालों से कर रहा था। ग्रामीणों के मुताबिक शराब माफिया गांव से चोरी छिपे शराब लाकर उसे देशी शराब की शीशी में पैक कर ग्रामीणों को बेचते है। ग्रामीणों का स्थानीय पुलिस पर आरोप है कि पुलिस आरोपित से अपना सुविधा शुल्क वसूल कर इस अवैध काम को संरक्षण दे रही है। जहरीली शराब पीने से हुई एक की मौत के बाद जागे आबकारी विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन में गांव पहुंच कर गांव के किनारे से मिली शराब की खाली शीशियों को जांच के लिए भेज दिया है।
भौंती में पुलिस ने पकड़ी थी फैक्ट्री
सचेंडी पुलिस ने निकाय चुनाव के वक्त भौंती में नकली देसी शराब बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। जगतपुर रोड स्थित एक घर में हुई अचानक छापेमारी में 250 पेटी तैयार शराब बरामद की गई। छापे में दो हजार लीटर केमिकल, ब्रांडेड देसी शराब के होलोग्राम, बोतल पैक करने की मशीनें मिलीं। यहां पुलिस के हाथ महिला समेत तीन लोग लगे। नकली शराब बनाने वाला माफिया चकमा देकर भाग गया। सूत्रों की मानें तो इस धंधे में अधिकतर महिलाएं लगी हुई हैं। घर के पुरुष शराब के कच्चे माल की आपूर्ति करते हैं और बनाने व बेचने का कार्य महिलाओं के जिम्मे है। यहां के अधिकतर घरों में स्प्रीट से शराब बनाई जाती है। धंधा सुबह शुरू होता है तो देर रात तक चलता रहता हैं। इसके अधिकतर ग्राहक मजदूर वर्ग के हैं। इसी गांव में पुलिस चौकी भी स्थापित है, लेकिन कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि पुलिस तक का खौफ नहीं है।

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