कबड्डी के खेल में शहर का गौरव बढ़ा रहा ऑटो चालक का बेटा, 2019 में 30 मैच खेलने पर 25 मैच में मिला मैन ऑफ द मैच

-वर्ष 2017 में कानपुर के ग्रीन पार्क से उन्होंने कबड्डी का अभ्यास कर दिया शुरू,

-2018 में सीनियर राज्य टीम में हुए चयनित,

-हाल में ही 27 सितंबर को भदोही में हुए जिला स्तरीय प्रतियोगिता में रोहित को मैन ऑफ द सीरीज का मिला खिताब,

-उनकी इस सफलता में उनकी गुरु पूनम यादव का है सबसे बड़ा योगदान,

By: Arvind Kumar Verma

Published: 29 Sep 2020, 12:51 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर-गांव के खेतों में शुरू हुआ कबड्डी खेल बन गया रोहित के लिए उसका जुनून। ऊंचाइयों को छूने के बाद उसने कबड्डी को अपना लक्ष्य बना लिया। हम बात कर रहे हैं कानपुर के हरबंश मोहाल निवासी ऑटो चालक के बेटे रोहित जायसवाल की, जिनका बचपन उनके ननिहाल इलाहाबाद में बीता। जहां आस पड़ोस के लड़के खेतों में कबड्डी खेलने जाया करते थे। उनको देख जेहन में कबड्डी खेलने का शौक आया तो धीरे धीरे रोहित भी खेलने लगा। लेकिन फिर वह शौक उसका जुनून बन गया। उन्होंने कबड्डी को ही अपना आदर्श मान लिया और फिर शुरू हुआ मंजिल को पाने का सिलसिला। रोहित का कहना है कि वर्ष 2017 में कानपुर के ग्रीन पार्क से उन्होंने कबड्डी का अभ्यास शुरू कर दिया।

भदोही में जीता मैन ऑफ द सीरीज

इसी वर्ष इलाहाबाद हुए ट्रायल में जूनियर यूपी टीम में उनका चयन हो गया। इसके बाद 2018 में सीनियर राज्य टीम में चयनित हुए। उन्होंने बताया कि 2019 में उन्होंने 30 कबड्डी के मैच खेले, जिसमें से 25 मैच में मैन ऑफ द मैच चुने गए। पिता की मेहनत और घर के हालात देखकर व्याकुलता थी, लेकिन पढ़ाई व घर के कार्यों से समय निकालकर वे ग्रीन पार्क में पहुंच जाते थे। बेटे के इस लगन को देख घरवालों ने भी सहयोग किया। लगन और मेहनत के चलते हाल में ही 27 सितंबर को भदोही में हुए जिला स्तरीय प्रतियोगिता में रोहित को मैन ऑफ द सीरीज का खिताब मिला।

अपनी गुरु को देते हैं सफलता का श्रेय

उन्होंने बताया कि वह अभी एमकॉम की पढ़ाई कर रहे हैं। रोहित के मुताबिक उनकी इस सफलता में उनकी गुरु पूनम यादव का सबसे बड़ा योगदान है। क्योंकि ग्रीन पार्क में कबड्डी खेलने के दौरान कबड्डी की माहिर पूनम मैम ने उन्हें इसके पैंतरे सिखाए। उनकी सीख ने हो आज उन्हे इस सफलता के पायदान पर पहुंचाया है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश की तरह प्री कबड्डी लोग मैच यूपी में भी शुरू होने चाहिए, जिससे खेल को बढ़ावा मिले और इस खेल के द्वारा अन्य प्रतिभाएं भी सामने आ सकें। रोहित कहते हैं कि प्रतिभा को हौंसला और मार्गदर्शन की जरूरत होती है।

Arvind Kumar Verma
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