लाल-नीली टोपीधारियों के चलते खतरे में पड़ा गठबंधन, अखिलेश के नेता थाम सकते भाजपा का दामन

गठबंधन के चलते दावेदार परेशान, अमित शाह से मिल चुके हैं सपा के दो पूर्व सांसद, एक पूर्व विधायक...

By: Vinod Nigam

Published: 07 Jun 2018, 07:59 AM IST

कानपुर. उत्तर प्रदेश के दो राजनीतिक दल बसपा और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आगामी लोकसभा चुनाव साथ-साथ लड़ने के लिए राजी हैं, पर उनके जमीनी नेता इसके खिलाफ हैं। लाल और नीली टोपीधारी 2019 से पहले पार्टी से बगावत कर भाजपा का दामन थाम सकते हैं। जानकारों की मानें तो सपा के दो पूर्व सांसद और पूर्व विधायक योगी सरकार के एक मंत्री के साथ अमित शाह से मुलाकात भी कर चुके हैं। जबकि बसपा के भी कई बड़े नेता भाजपा के संपर्क में है और टिकट नहीं मिलने पर कमल के लिए प्रचार करते हुए देखे जा सकते हैं। सपा प्रवक्ता वंदना सिंह ने बताया कि पार्टी के कार्यकर्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष के हर फैसले के साथ खड़े हैं। हां कुछ नेता ऐसे हैं, जिनकी महत्वाकांशा पद पर बैठने की है। लेकिन पद के बिना भी समाज की सेवा पार्टी के अंदर रहकर की जा सकती है। वंदना सिंह ने बताया कि ऐसे नेताओं की जानकारी पार्टी हाईकमान के पास है।

 

मायावती के खामोMr से सियासत तेज

कैराना लोकसभा उपचुनाव के बाद समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के नेता गदगद नजर आए और जीत का जश्न मनाया, लेकिन बसपा सुपीमो मायावती खामोस हैं। जिसके चलते लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सियासत गर्म है और गठबंधन पर दरार की बात निकल कर आ रही हैं। जबकि अखिलेश यादव साफ तौर पर कह चुके हैं कि दोनों दलों के बीच गठबंधन होगा। समाजवादी लोग दिलवाले होते हैं और संप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए हर कीमत देने को तैयार हैं। पर संगठन के पदाधिकारी व कार्यकर्ता अखिलेश के इस निर्णय के खिलाफ बताए जा रहे हैं और वह चुनाव से पहले भाजपा ज्वाइन कर सकते हैं। सपा प्रवक्ता वंदना सिंह ने खास बातचीत के दौरान बताया कि जब से भाजपा सरकार आई है तब से देश में भ्य और डर का वातारण बना हुआ है। इसी के चलते राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बसपा सुप्रीमो के साथ लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया। हां इससे दोनों दलों के कुछ नेता नराज होने के साथ-साथ पार्टी भी छोड़ सकते हैं।

 

यह नेता छोड़ सकते हैं सपा

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश के कई जिलों में लोकसभा प्रत्याशियों की घोषणा एक साल पहले कर दी थी। जिनमें से फतहेपुर से सांसद रहे राकेश सचान सहित कई नेताओं के नाम शामिल हैं। पर गठबंधन होने के चलते ये सीटें बसपा के खाते में जा कसती हैं। इसी के चलते घोषित उम्मीदवार दल से नाता तोड़ सकते हैं। सूत्रों की मानें तो पूर्व सांसद राकेश सचान फतेहपुर के पूर्व विधायक योगी सरकार के एक मंत्री के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात कर चुके हैं और किसी भी वक्त दल से नाता तोड़ सकते हैं। इसके अलावा शिवपाल खेमें के कई नेता भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के सपंर्क में है। यदि शिवपाल यादव को 2019 चुनाव से पहले बड़ा ओहदा नहीं मिला तो इनके समर्थक भाजपा का सपोर्ट कर कसते हैं।

 

40 सीटों की मायावती ने थी डिमांड

बसपा सुप्रीमो मायावती ने आगामी लोकसभा चुनाव सपा के साथ गठबंधन पर बयान दिया था कि उनकी पार्टी 80 में से 40 सीटों पर अमने उम्मीदवार उतारेगी। मायावती ने कहा यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम अकेले ही 2019 के मिशन में उतरने के लिए मजबूर होंगे। बसपा कैडर ने भी बसपा सुप्रीमो का एक रिपोर्ट दी, जिसमें कहा कि पार्टी का वोटबैंक सपा के मुकाबले ज्यादा है। बसपा का वोटबैंक को सपा को ट्रांसफर किया जा सकता है, लेकिन अखिलेश के वोटबैंक हाथी के बजाए अन्य दलों में जा सकते हैं। मायावती ने गठबंधन को लेकर एक फार्मूला सुझाया था, जिसमें 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त दूसरे नंबर वाली पार्टी जिस लोकसभा में रही है, वह सीट उसी को दल को मिलनी चाहिए। पर सपाई मायावती के फार्मूले से खुश नहीं है और अखिलेश यादव को एक रिपोर्ट देकर सम्मान के तहत सीटों के बंटवारे की मांग रखी है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो पार्टी के कई नेता भाजपा में जा सकते हैं।

 

शिवपाल फैन्स भी खफा

कानपुर जिले से शुरू होकर 46 जिलों में फैल चुके ’शिवपाल यादव फैंस एसोसिएश भी 2019 की तरफ नजर लगाए हुए है। कुछ दिन पहले कानपुर दौरे पर आए शिवपाल ने अपने संगठन को ब्लॉक और बूथ तक ले जाने की खुली घोषणा की थी। इस संगठन के जरिये ’बेईमानों’ से लडऩे की हुंकार कई बार भरी पर समाजवादी पार्टी का जिक्र तक नहीं किया। सड़क से लेकर अंदर कार्यक्रम स्थल तक लाल टोपी धारी युवाओं की अच्छी-खासी भीड़ इशारा कर रही थी कि समाजवादी कुनबे में से ही पूर्व मंत्री ने अपनी अलग ब्रिगेड को मजबूती से खड़ा कर लिया है। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि शिवपाल यादव नई पार्टी बनाते हैं, तो यही उनका निजी नेटवर्क पार्टी का आधार बनेगा। कानपुर से एसोसिएशन के गठन की शुरुआत करने वाले प्रदेश अध्यक्ष आशीष चौबे ने बताया कि संगठन अब 46 जिलों में पहुंच चुका है। इसके लगभग एक लाख सदस्य हो चुके हैं। इसकी रिपोर्ट पूर्व मंत्री को दे दी गई है। वह लगातार कार्यक्रमों में भाग लेकर युवाओं से मुलाकात भी कर रहे हैं।

Vinod Nigam
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned