सॉल्वर गिरोह की बड़ी मछलियां अब एसटीएफ के निशाने पर

बिहार और प्रयागराज में जाल फैलाने की तैयारी, जालसाजी से नौकरी पाने वालों पर भी लटक रही तलवार

 

कानपुर। नकल माफिया पहले से ही बोर्ड और प्रदेश सरकार की नाक में दम किए हुए थे ऊपर से सॉल्वर गिरोह का बड़ा नेटवर्क अब नई चुनौती बनकर सामने आया है। यह गिरोह लंबे समय से संचालित है और पूरे देश में इनका जाल फैला हुआ है। कानपुर में पकड़े गए सॉल्वर दुर्गेश और नितीश इस तालाब की छोटी मछलियां हैं। जिनके जरिए एसटीएफ अब गिरोह के सरगना के गिरेबां तक पहुंचने की कोशिश में है।

कोलकाता और बिहार में भी दी परीक्षाएं
सॉल्वर गिरोह के दोनों गुर्गे इससे पहले कोलकाता और बिहार में भी परीक्षाएं दे चुके हैं। इंटर के साथ रेलवे की परीक्षा में भी इन्होंने फर्जीवाड़ा किया। शातिरों का गिरोह पूरे देश में फैला हुआ है। वह सॉल्वर भेजकर खुलेआम फर्जीवाड़ा कराते थे। हालांकि सॉल्वरों ने बताया कि वह ग्रुप से अभी नए-नए जुड़े हैं। इसीलिए वह बिहार से बाहर सिर्फ दो-दो बार ही परीक्षा दे चुके हैं। बाकी अन्य सॉल्वर कई परीक्षाएं दे चुके हैं। पकड़े गए सॉल्वरों ने अभी तक ज्यादातर इंटर की परीक्षा ही सबसे ज्यादा बार दी है।

बिहार और प्रयागराज पर एसटीएफ की नजर
एसटीफ गिरोह के अन्य लोगों को तलाशने के लिए जल्द ही बिहार व प्रयागराज जाएगी। दोनों सॉल्वरों मिली अहम जानकारियों के आधार पर एसटीएफ ने इनके नेटवर्क पर नजर गढ़ा दी है। गिरोह का सरगना कनक स्टूडियो चलाता है। उसका मुसहलमपुर हॉट पटना में कनल डिजिटल स्टूडियो है। वह फर्जी आईडी व आधार नंबर बनाने के साथ ही मिक्सिंग करके एडमिट कार्ड में लगने वाली फोटो तैयार करता था। इसमे सॉल्वर व अभ्यर्थी को मिलाकर फोटो तैयार की जाती थी। जिससे किसी को शक न हो और आराम से सॉल्वर परीक्षा देकर लौट सके।


कई लोगों की नौकरी खतरे में
शातिर कई लोगों की परीक्षा दे चुके हैं। ऐसे में गिरोह के जरिए सॉल्वर बैठाकर विभागों में नौकरी पाने वालों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है। उनकी नौकरी भी जा सकती है। ऐसे में सॉल्वरों के जरिए पास होकर नौकरी पाने वालों की चिंता बढ़ गई है।


पास कराने के लिए लेते थे मोटी रकम
गिरोह के सरगना एक परीक्षा पास कराने के लिए पांच से छह लाख रुपए की डील करते थे। पकड़े गए सॉल्वरों को ओर से अभी तक दी गई दो परीक्षाओं के बदले में उनको 10-10 हजार रुपए प्रति परीक्षा मिला था। अब गिरोह को दुर्गेश और नीतिश पर पूरा भरोसा हो गया था। इसलिए उनको एक परीक्षा के बदले में 70 हजार रुपए मिलने थे। दोनों सॉल्वरों को सरगना की ओर से 10-10 हजार रुपए में एडवांस में दिए गए थे। बाकी परीक्षा देकर लौटने के बाद मिलना था।

 

 

 

 

 

 

आलोक पाण्डेय
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