जहां एडमिशन को लगती थी लाइन, अब वहां सीटें पड़ीं खाली

जहां एडमिशन को लगती थी लाइन, अब वहां सीटें पड़ीं खाली

Alok Pandey | Updated: 19 Jul 2019, 12:22:56 PM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

८० प्रतिशत वालों की रहती थी होड़ अब ६० प्रतिशत वाले सीधे ले रहे प्रवेश
बीए, बीकॉम और बीएससी की कक्षाओं में पूरे नहीं हो पा रही छात्र संख्या

कानपुर। एक दौर था जब छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में बीए, बीकॉम और बीएससी में प्रवेश पाने के लिए भीड़ उमड़ती थी। मेरिट ८० प्रतिशत से ऊपर जाती थी। आज स्थिति यह है कि कक्षाएं शुरू करने के लिए जरूरी छात्र संख्या जुटाने में भी लाले पड़ रहे हैं। अब छात्रों की दिलचस्पी इनके प्रति खत्म हो चुकी है। ज्यादातर युवा प्रोफेशनल कोर्स की ओर भाग रहे हैं, ताकि पढ़ाई पूरी करते ही रोजगार शुरू किया जा सके।

अनुदानित महाविद्यालयों में भी संकट
इंटर पास करने के बाद बीए, बीकॉम और बीएससी में प्रवेश के लिए छात्र पहले अनुदानित महाविद्यालयों में प्रवेश पाने की कोशिश करते थे। अच्छे नंबर होने के बावजूद सिफारिश लगानी पड़ती थी। अनुदानित महाविद्यालयों में सीटें फुल होने पर सेल्फ फाइनेंस महाविद्यालयों में लाइन लगती थी। पर आज दोनों तरह के महाविद्यालयों में सन्नाटा है। छात्र उन्हीं डिग्री कॉलेजों में जा रहे हैं, जहां दूसरे प्रोफेशनल कोर्स कराए जा रहे हैं। बीए, बीकॉम और बीएससी की सीटें खाली हैं।

कक्षाएं चालू करना भी मुश्किल
विवि से संबद्ध सेल्फ फाइनेंस नहीं बल्कि अनुदानित महाविद्यालयों में भी 50 फीसदी सीटें भरना मुश्किल हो गई है। वर्तमान में युवा पीढ़ी सामान्य स्नातक के बजाए उन प्रोफेशनल विषयों से स्नातक की डिग्री लेना चाह रही है, जिसमें जॉब के अधिक विकल्प हैं। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि विवि के पिछले कुछ वर्षों का रिकॉर्ड देखते हुए छात्र दूसरे विवि से डिग्री लेने को वरीयता दे रहे हैं। जिस कारण बीए, बीकॉम और बीएसकी की कक्षाएं तक चालू करना मुश्किल हो रहा है।

लो-मेरिट पर लिए जा रहे प्रवेश
सीबीएसई, सीआईएससीई और यूपी बोर्ड का रिजल्ट 85 फीसदी से अधिक जाने के बावजूद अधिकांश कॉलेजों की बीए, बीकॉम और बीएससी की सीटें खाली हैं। पीपीएन कॉलेज, क्राइस्टचर्च कॉलेज में जहां सीटें फुल हुई हैं, वहां भी लो-मेरिट पर दाखिले लिए गए। मतलब जिन कॉलेजों में 70 फीसदी रिजल्ट जाने पर भी 80 फीसदी अंक वाले छात्र को प्रवेश मिलता था, वहां इस बार 60 फीसदी अंक पाने वाला छात्र भी पढ़ाई कर रहा है।

सीएसजेएमयू से भाग रहे छात्र
छात्र सीएसजेएमयू से डिग्री लेने के बजाए दूसरे राज्यों के विवि को वरीयता दे रहे हैं। जयपुर स्थित बनस्थली विश्वविद्यालय, एमिटी विवि के अलावा प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों से पढ़ाई कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से सीएसजेएमयू में मूल्यांकन प्रक्रिया काफी खराब चल रही है। जिससे रिजल्ट खराब जा रहा है। पीपीएन के छात्र कम अंक आने पर विरोध कर रहे हैं। चैलेंज मूल्यांकन में अधिकतर छात्रों के अंक में वृद्धि हो रही है।

बढ़ाई जा रहीं तारीखें
कॉलेजों में प्रवेश की स्थिति काफी खराब है। इसी कारण डब्ल्यूआरएन (वेब रजिस्ट्रेशन नंबर) की अंतिम तिथि बार-बार बढ़ाई जा रही है। एक जुलाई से सत्र शुरू करने को डब्ल्यूआरएन की अंतिम तिथि 30 जून तय की थी। मगर 80 प्रतिशत सीटें रिक्त देख 15 जुलाई कर दी गई। फिर भी बहुत सुधार नहीं हुआ। नतीजा डब्ल्यूआरएन की तिथि 31 जुलाई तक कर दी गई है।

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