सीएसजेएमयू ने रोका ६० महाविद्यालयों का परीक्षा परिणाम

सीएसजेएमयू ने रोका ६० महाविद्यालयों का परीक्षा परिणाम

Alok Pandey | Publish: Apr, 18 2019 03:15:17 PM (IST) | Updated: Apr, 18 2019 03:15:18 PM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

सामूहिक नकल की शिकायत के बाद सख्त हुआ विवि प्रशासन,
मूल्याकंन में नकल की खुली पोल, सबके उत्तर मिले एक समान

कानपुर। विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में हुई सामूहिक नकल को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय ने गंभीरता से लिया है और ६० महाविद्यालयों का परीक्षा परिणाम रोक दिया है। जिससे इन विद्यालयों के लाखों परीक्षार्थियों के लिए भविष्य का संकट खड़ा हो गया है। परीक्षा परिणाम जारी न होने से ये परीक्षार्थी अगली कक्षा में प्रवेश नहीं ले पाएंगे।

११ जिलों के ११०० महाविद्यालय
छत्रपति शाहूजी महाराज से ११ जिलों के ११०० महाविद्यालय संबद्ध हैं। इन महाविद्यालयों की वार्षिक परीक्षा के लिए ५४० परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता के अलावा रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अनिल कुमार यादव की देखरेख में उडऩदस्तों ने परीक्षा के दौरान छापेमारी की जिनमें कई महाविद्यालयों में खुलकर नकल होती मिली।

हरदोई और उन्नाव के सबसे ज्यादा कॉलेज
जिन ६० महाविद्यालयों में सबसे ज्यादा नकल पड़ी गई है, उनमें हरदोई और उन्नाव के सबसे ज्यादा कॉलेज हैं। निरीक्षण के दौरान उडऩदस्तों को यहां सामूहिक नकल होती मिली। उडऩदस्तों की रिपोर्ट के आधार पर यूएफएम कमेटी ने महाविद्यालयों को चिन्हित कर मूल्याकंन में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।

मूल्यांकन में सच आया सामने
सामूहिक नकल के लिए चिन्हित किए गए महाविद्यालयों की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने पर पता चला कि जमकर नकल की गई है। परीक्षार्थियों की कापियों में काफी उत्तर एक जैसे थे। कई प्रश्न भी छात्रों ने बिना हल किए ही छोड़ दिए। यूएफएम कमेटी की इस रिपोर्ट को परीक्षा समिति के सामने रखा जाएगा।

लाखों परीक्षार्थियों का भविष्य अधर में
विश्वविद्यालय की इस कार्रवाई के बाद ६० महाविद्यालयों के लाखों छात्रों का भविष्य अधर में फंस गया है। अब अन्य महाविद्यालयों का परीक्षा परिणाम घोषित होने पर वे छात्र अगली कक्षाओं में प्रवेश लेंगे पर इन ६० महाविद्यालयों के छात्र सिर्फ इंतजार ही कर सकते हैं। अगर विवि ने दोबारा परीक्षा कराई तो भी इन छात्रों के लिए संकट बरकरार ही रहेगा, क्योंकि दोबारा परीक्षा में नकल होना मुश्किल है।

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