कोरोना के सर्वे में एनआरसी का खौफ बन रहा बाधक, लोग नहीं दे रहे सही जानकारी

डोर-टू-डोर सर्वे में लोग मामूली जानकारी देने से भी भाग रहे

जमातियों की हिस्ट्री तलाश करने में स्वास्थ्य विभाग को मुश्किल

कानपुर। कुछ लोगों में अभी भी सीएए, एनआरसी और एनपीआर का डर ऐसा बैठा हुआ है कि वे कोरोना को लेकर हो रहे सर्वे में भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। शहर में सात लोगों के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद मुस्लिम बहुल इलाकों में डोर-टू-डोर सर्वे शुरू कर दिया गया है। मगर लोग इसे एनआरसी और एनपीआर का सर्वे समझकर जानकारी देने से बच रहे हैं। जिससे यह पता लगाने में मुश्किल आ रही है कि संक्रमित तब्लीगी जमाती किस-किस के संपर्क में आए थे। ऐसे में संक्रमित लोगों को तलाश पाना मुश्किल होता जा रहा है।

मामूली जानकारी भी नहीं दे रहे लोग
स्वास्थ्य विभाग की टीमों को देखकर लोग मुंह फेर लेते हैं। लोग अपनी मामूली जानकारी टीमों को नहीं दे रहे हैं। इसके अलावा प्रपत्र भरने, मोबाइल नंबर आदि देने से भी इंकार कर दे रहे हैं। इससे टीमें परेशान हैं। टीमों ने अपनी समस्या सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला को भी बताई है। टीमों में आशा कार्यकर्ता, एएनएम और स्वास्थ्य विभाग के दूसरे कर्मचारी शामिल हैं। कोरोना पॉजिटिव निकलने वाले जमाती किन-किन क्षेत्रों के मोहल्लों में गए हैं और किस-किस से मिले हैं। इसका ब्यौरा स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में कोरोना की चेन पकडऩे में समस्या हो सकती है।

हर किसी की होगी जांच
रेड जोन घोषित हो चुके इन मोहल्लों में लोगों के इस रवैये के चलते तय किया गया है कि इन क्षेत्रों के सभी घरों का सर्वे कराया जाएगा। हर सदस्य की सेहत की जांच की जाएगी। जुकाम, बुखार, खांसी, जकडऩ आदि की शिकायत होने पर इलाज किया जाएगा। इसके लिए प्रपत्र भराया जाना है। इसमें परिवार के मुखिया का नाम, मोबाइल नंबर, बीमार सदस्य का नाम आदि डिटेल भरी जानी है। इसी बात से लोग बिदक जा रहे हैं। उन्हें शक है कि यह ब्यौरा एनआरसी, एनपीआर के लिए न इस्तेमाल कर लिया जाए।

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आलोक पाण्डेय
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