जाने कौन हैं स्वतंत्रदेव सिंह, जिन्हें बनाया गया भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष

मूलरूप से उरई के रहने वाले हैं स्वतंत्र देव सिंह, कानपुर-बुंदेलखंड की 10 में 10 लोकसभा सीटों में भाजपा को जीत दिलाने में रहा अहम रोल।

By: Vinod Nigam

Published: 17 Jul 2019, 08:02 AM IST

कानपुर। भारतीय जनता पार्टी BJp ने उत्तर प्रदेश UP की बागडोर उरई निवासी व यूपी सरकार में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को सौंपी swatantra dev singh appointed up bjp president है। जिसके चलते कानपुर-बुंदेलखंड के कार्यकर्ता गदगद हैं, तो वहीं समाजवादी पार्टी samajwadi parti और बसपा bsp के अंदर हलचत तेज हो गई है। सियासी अखाड़े में अपने रणनीति के बल पर मुलायम सिंह Mulayam Singh Yadav के गढ़ पर कमल का फूल खिलाया तो मायावती Mayawati के किले को धराशाही कर वहां भगवा फहराया। 2014 में जहां भाजपा के पास 10 में 9 तो वहीं 2019 में लोकसभा चुनाव में यहां 10 की 10 सीटों पर कमल का फूल खिला। यही वजह रही कि भाजपा ने जमीन से जुड़े और 17 जिलों में मोदी के नाम से पहचाने जाने वाले ओबीसी चेहरे को प्रदेश का अध्यक्ष बनाया।

अमित शाह के करीबी
बतौर यूपी प्रभारी अमित शाह Amit Shah ने 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त कानपुर-बुंदेलखंड की दस सीटों की जिम्मेदारी जमीन से जुड़े नेता स्वतंत्रदेव सिंह Swatantra dev singh को सौंपी थी। जिसका असर रहा कि कन्नौज छोड़ अन्य 9 सीटों पर कमल का फूल खिला। 2017 के चुनाव में भी इन्होंने अहम किरदार निभाया। पर्दे के पीछे रहकर सटीक प्लॉन बनाया और यहां की 52 में 47 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने कब्जा किया। जिसके बाद स्वतंत्रदेव सिंह Swatantra dev singh के प्रदेश का मुख्यमंत्री का दावेदार माना जा रहा था, लेकिन पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को सीएम CM Yogi Adityanath पद के लिए चुना। 2019 में मिली जीत के बाद स्वतंत्रदेव सिंह Swatantra dev singh को भाजपा बड़े ओहदे पर बैठाने पर विचार कर रही थी, जिस पर मुहर बतौर प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर मंगलवार को लग गई।

कौन हैं स्वतंत्रदेव सिंह
स्वतंत्र देव सिंह का जन्म 13 फरवरी 1964 को मिर्जापुर Mirzapur में हुआ है। स्वतंत्र देव ने जालौन Jaloun को कर्मभूमि बनाई और उनकी शादी झांसी में हुई। जब पुलिस में तैनात उनके भाई का तबादला हुआ तो उन्हीं के साथ 1984 में वे जालौन आ गए। 1985 में ग्रेजुएशन में दाखिला लिया। उन्होंने 1986 में उरई के डीएवी डिग्री कॉलेज में छात्र संघ चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके। 2012 में विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाई और वहां भी करारी हार का सामना करना पड़ा। इसी दौरान स्वतंत्र देव सिंह विद्यार्थी परिषद के संपर्क में आए और फिर आरएसएस RSS की सदस्यता ले ली।

इमानदार नेता की क्षवि
स्वतंत्र देव सिंह पीएम नरेंद्र मोदी PM Narendra Modi के करीबी हैं। उन्होंने भाजपा में कार्यकर्ता से लेकर संगठनकर्ता तक का सफर तय किया है। संघ में रहे स्वतंत्र देव सिंह की छवि काफी ईमानदार शख्स की है। लंबे समय से राजनीति कर रहे स्वतंत्र देव के पास संपत्ति के नाम पर कुछ खास नहीं है। बतौर संघ प्रचारक के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी PM Narendra Modi जब भी कानपुर व बुंदेलखंड के दौरे पर आते तो स्वतंत्रदेव सिंह के साथ कंधे में थैला लेकर गली-मोहल्ला में घूमा करते थे। 80 के दशक में पीएम मोदी PM Narendra Modi कानपुर के गुरूदेव स्थित एक इंटर कॉलेज में रूके थे और उसके साथ स्वतंत्रदेव भी यहां ठहरे थे।

बुंदेलखंड में खिलाया कमल का फूल
अखिलेश यादव akhilesh yadav और मायावती Mayawati के बीच गठबंधन की आहट के बाद भाजपा ने अपने रणनीतिकार स्वतंत्रदेव सिंह को कानपुर-बुंदेलखंड का जिम्मा सौंपा। करीब 15 लाख दलित बाहूल्य बुंदेलखंड की 4 सीटों पर स्वतंत्रदेव सिंह ने कमल खिलाने में अहम योगदान दिया था। स्वतंत्रदेव सिंह के कहने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी PM Narendra Modi की रैली बांदा में कराई गई थी, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज की गई। रैली में करीब तीन लाख लोग पीएम मोदी को सुनने के लिए आए थे। लोकसभा की तर्ज पर अमित शाह Amit shah ने विधनसभा चुनाव लड़ा और 19 की 19 सीटों पर भगवाध्वज फहराया। 2014 लोकसभा चुनाव के वक्त इन्हीं के कहनें पर उरई के मदरसा स्थित मैदान में पीएम मोदी की सभा कराई गई थी, जिसका असर रहा कि गंगा, यमुना, चंबल नदी में कमल का फूल खिला।

बसपा का किया सफाया
स्वतंत्रदेव सिंह ने कानपुर-बुंदेलखंड में पार्टी में दलितों का जनाधार बढ़ाने के लिए पार्टी का अनुसूचित मोर्चा सक्रिय किया। दलित वोट बैंक बढ़ाने के लिए बूथ स्तर पर अनुसूचित जाति से जुड़े कार्यकर्ताओं को सेक्टर अध्यक्ष और बूथ अध्यक्ष के पद पर बैठाया। अनुसूचित मोर्चा की जिम्मेदारी प्रदेश सह प्रभारी ओमप्रकाश श्रीवास्तव को सौंपी। मायावती के गढ़ बुंदेलखंड में छह माह तक गांव-गांव की दौरा किया और सीधे लोगों से मिले। उन्हें पीएम मोदी और भाजपा की विचारधारा से अगवत करा पार्टी की सदस्यता दिलाई। जिसका नतीजा रहा कि यहां की 19 में से 19 विधानसभा सीटों पर पहली बार कमल का फूल खिला तो चारों लोकसभा सीटों पर भाजपा की जीत हुई।

मुलायम के किले पर कब्जा
स्वतंत्रदेव सिंह ने कानपुर बुंदेलखंड की क्षेत्रीय कमेटी के साथ मिलकर मास्टर प्लान तैयार किया था। जिसका नतीजा रहा कि कन्नौज से डिम्पल, कानपुर से पूर्व केंद्रीय मंत्री कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद, पूर्व सांसद श्याम चरण गुप्त, ददुआ डकैत के भाई पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल ,पूर्व सांसद राजाराम पाल जैसे कद्दावर नेताओं को हार उठानी पड़ी। मुलायम के गढ़ की इटावा, फर्रूखाबाद, कन्नौज और कानपुर देहात में भाजपा के उम्मीदवार जीत कर संसद पहुंचे। वर्तमान में कानपुर-बुंदेलखंड की कमान मानवेंद्र सिंह के हाथों में है। करीब 28 हजार बूथ अध्यक्ष, 32 विस्तारक, 148 मंडल अध्यक्षों के साथ चार मोर्चे जमीन पर कार्य कर रहे हैं।

 

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