विरोधी दलों के नेताओं ने बनाई दूरी, पूर्व महापौर द्रोण ने अपने ही अंदाज में ली चुटकी

विरोधी दलों के नेताओं ने बनाई दूरी, पूर्व महापौर द्रोण ने अपने ही अंदाज में ली चुटकी
Kanpur Mayor Pramila Pandey

Shatrudhan Gupta | Updated: 12 Dec 2017, 08:30:06 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

पूर्व महापौर जगतवीर सिंह द्रोण कानपुर की सरकार को संबोधित करने के लिए आए और अपने अंदाज में विरोधियों को चुटकी ली।

कानपुर. शहर की सरकार के शपथ समारोह के लिए नगर निगम स्थित एक भव्य पंडाल को किराए पर लिया गया। एक मंच पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ महापौर प्रमिला पांडेय बैठी थीं, तो दूसरे मंच पर भाजपा के साथ ही सपा, बसपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षद बैठे थे। लेकिन कार्यक्रम में विरोधी दलों के जनप्रतिनिधियों ने दूरी बनाई हुई थी। माइक से पूर्व सांसद व पूर्व महापौर श्रीप्रकाश जायसवाल, विधायक इरफान सोलंकी, अमिताभ बाजपेयी, सोहेल अंसारी का नाम पुकारने के साथ ही मंच में बैठने के लिए बुलाया गया, पर इनमें से एक भी यहां मौजूद नहीं था।

इस मौके पर पूर्व महापौर जगतवीर सिंह द्रोण कानपुर की सरकार को संबोधित करने के लिए आए और अपने अंदाज में विरोधियों को चुटकी ली। द्रोण ने कहा कि जब हम महापौर चुने गए, तब सदन, लखनऊ और दिल्ली में भाजपा की सरकार नहीं थी, बावजूद हमने सबके साथ मिलकर काम किया। कभी मतभेद नहीं होने दिए, जब भी उन्होंने बुलाया हम अपने 27 पार्षदों के साथ पहुंचे।

नहीं आए श्रीप्रकाश जायसवाल, खाली कुर्सी पर बैठे भाजपाई

कानपुर की सरकार ने आज शपथ लेकर शहर के विकास की कस्में खाईं। इस समारोह के लिए नगर निगम ने पूर्व महापौर व पूर्व मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, सपा के विधायक इरफान सोलंकी, अमिताभ बाजपेयी, कांग्रेस विधायक सोहेल अंसारी, पूर्व सांसद राजाराम पाल, पूर्व विधायक अजय कपूर 2017 के चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार वंदना मिश्रा व उनके पति आलोक मिश्रा को आंमत्रण पत्र देकर इनवाइट किया था, लेकिन इनमें से एक भी नेता शपथ समारोह में शामिल नहीं हुआ। पूर्व महापौर को नवनिर्वाचित सदस्यों को संबोधित करने के लिए पूर्व महापौर जगतसिंह द्रोण को बुलाया गया। उन्होंने आते ही अपने पांच साल के कार्यकाल के बारे में पार्षदों को बताया।

द्रोण ने कहा कि 2012 के चुनाव में हम 78 वार्डों से जीते, पर भाजपा के महज 27 पार्षद चुनकर सदन में पहुंचे। हमारे पास बहुमत नहीं था। यूपी में सपा तो केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, फिर भी हमने बिना किसी लड़ाई-झगड़े के पांच साल तक कार्यकाल पूरा किया। विरोधी दलों के पार्षदों ने इस मौके पर हमारा साथ दिया। हमने भारत के लोकतंत्र की खुशबू से अपने सदन को खुशनुमा बनाए रखा।

सरकार कर रही भेदभाव, इसलिए दूरी बनाई

सपा के विधायक इरफान सोलंकी ने कहा कि हमें शपथ समारोह में बुलाया गया था, लेकिन हमने नहीं जाने का निर्णय लिया। इरफान ने कहा कि भाजपा सरकार के अफसर विकास के नाम पर भेदभाव कर रहे हैं। हमारी विधानसभा के कई इलाकों में जनता को टॉयलेट नहीं दिए गए। लोग आज भी खुले में शौंच करने को विवश हैं। साथ ही ऐसे कई मोहल्ले हैं जहां सफाईकर्मी नहीं आते। हम नगर आयुक्त से शिकायत करते हैं पर वो सुनने को तैयार नहीं होते। जब हम सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर अपनी विधानसभा की समस्याओं से उन्हें अवगत कराना चाहते हैं तो पुलिस-प्रशासन हमें घर पर नजरबंद कर देता है। जब यहां के प्रशासन सपाईयों के साथ दुर्व्यवहार करता है तो कैसे हम भाजपाईयों के कार्यक्रम में शामिल हो।

पार्षदों में दिखी दूरियां

नगर प्रशासन ने सभी 110 पार्षदों के लिए एक मंत्र अगल से बनाया था। जहां भाजपा, सपा, कांग्रेस, बसपा और निर्दलीय पार्षद बैठे थे, लेकिन विरोधी दलों के नवनिर्वाचित पार्षदों ने भाजपाईयों से दूरियां बना रखी थीं। शपथ समरोह के दौरान जब जयश्रीराम और वंदेमातरम के नारे लगने लगे तो कांग्रेस की महिला पार्षद मंच से नीचे उतर गई और बाहर जाने लगी। तभी नगर निगम के अफसर पहुंचकर उन्हें मनाया और शपथ तक नारे लगाने पर रोक लगा दी। इस मौके पर पूर्व महापौर द्रोण ने भी सबसे शांत रहने की अपील की और तीन, चार और पांच बार से लगातार चुनकर आए पार्षद, बेबी, दद्दा, पप्पू पांडेय का नाम लेकर कहा कि कब तक इन्हीं कक्षाओं में एग्जाम देते रहोगे। अरे दद्दा जी पार्षदी के आगे भी सोचिए, विधायक और सांसद का चुनाव लड़कर आगे बढ़िए।

 

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