स्वाइन फ्लू से हो रही मौतों पर डॉक्टर भी हुए हैरान

दूसरे जटिल वायरस के साथ कर रहा हमला
अब तक ६० में हुई पुष्टि, ११ की मौत

कानपुर। इस साल स्वाइन फ्लू से होने वाली मौतों को लेकर डॉक्टर भी हैरान हैं। बीते साल भी स्वाइन फ्लू जरूर फैला था पर मौत नहीं हुई थी। इस बार स्वाइन फ्लू का वायरस थोड़ा अलग है। यह दूसरे घातक वायरस के साथ हमला कर रहा है, जिससे बीमारी और जटिल हो रही है।

महिलाओं और बच्चों को ज्यादा खतरा
इस बार स्वाइन फ्लू महिलाओं और बच्चों को ज्यादा पकड़ रहा है। जिन मरीजों की जांच में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है उनमें महिलाएं और बच्चे ज्यादा हैं। मरने वालों में भी सात महिलाएं और बच्चियां हैं।

महिला डॉक्टर भी पीडि़त
स्वाइन फ्लू से खुद डॉक्टर भी नहीं बच पा रहे हैं। चार महिला जूनियर डॉक्टर भी स्वाइन फ्लू से पीडि़त हैं। खास तौर पर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों और महिलाओं के लिए इस सीजन में यह वायरस ज्यादा खतरनाक हो गया है।

गर्मी बढऩे पर भी प्रकोप जारी
मौसम में बदलाव हुआ है और रात व दिन का तापमान बढ़ा है, पर इसके बावजूद स्वाइन फ्लू का वायरस अभी भी लोगों को पकड़ रहा है। इसलिए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। धूल के कण भी इस वायरस के वाहक हैं इसलिए मास्क लगाकर चलें और लगातार हाथ धुलें।

पूरे इलाज पर भी राहत नहीं
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का कहना है कि दवाओं की खुराक पूरी होने पर भी मरीज को पूरी तरह से राहत नहीं मिल रही है। इस बार मरीजों को सांस लेने में अधिक तकलीफ हो रही है और तेज बुखार और खासी के अलावा बलगम में खून की शिकायत सामने आ रही है।

इन लक्षणों पर रहें सतर्क
यदि किसी को खांसी और जुखाम के साथ पसली में दर्द होता है और तेज बुखार व सांस लेने में दिक्कत हो रही हो तो ये स्वाइन फ्लू के संकेत हैं। इसके अलावा कमजोरी, बेहोशी, टांसिल में दर्द और नाखून भी नीले पड़ सकते हैं।

 

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आलोक पाण्डेय
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