स्विटजरलैंड सरकार दूर करेगी कानपुर का प्रदूषण

स्विटजरलैंड सरकार दूर करेगी कानपुर का प्रदूषण

Alok Pandey | Publish: Aug, 13 2019 02:25:32 PM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

स्विस इंटरनेशन कोऑपरेशन को दिया गया जिम्मा
चार साल शहर में चलेगा यह हाईटेक प्रोजेक्ट

कानपुर। अब स्विटजरलैंड के विशेषज्ञ शहर की प्रदूषित हवा का इलाज करेंगे। सही ढंग से प्रक्रिया पूरी होती है तो सितंबर के अंत से प्लानिंग शुरू हो जाएगी। हालांकि इसमें चार वर्ष का समय लग सकता है, लेकिन इसके बाद शहरवासी जहरीली हवा से बच सकेंगे और शहर की हवा सांस लेने लायक बनेगी। इससे यह भी बात सामने आ जाएगी कि शहर के किन इलाकों और किन गलियों में सबसे ज्यादा प्रदूषण हो रहा है।

हर गली का अलग एयर पॉल्यूशन एक्शन प्लान
स्विटजरलैंड की कंपनी शहर की हर गली का अलग प्लान बनाएगी। ताकि प्रदूषण को दूर करने के साथ-साथ उसके कारणों का भी सटीक इलाज किया जा सके। इसके लिए पूरे शहर में माइक्रो स्ट्रीट पॉल्यूशन प्वाइंट भी बनाएं जाएंगे, जिससे यह पता चलेगा किन-किन गलियों में ज्यादा प्रदूषण हो रहा है।

स्विटजरलैंड सरकार देगी फंड
इस कार्य के लिए स्विटजरलैंड सरकार से संबद्ध स्विस इंटरनेशनल को-ऑपरेशन द्वारा लगातार चार साल तक इस कार्ययोजना के लिए फंड दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर पूरी तैयारी के साथ काम शुरू किया जाएगा, ताकि शहरवासियों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो और लोगों को इसका लाभ मिल सके।

प्रदूषण के स्रोतों तक बताएंगे संयंत्र
अभी तक प्रदूषण की जांच मैनुअल होती है। मगर जब स्वचालित मशीनें शहर के सभी इलाकों में लगाई जाएंगी तो यह पता चलेगा कि किस इलाके में हवा में किस कण से प्रदूषण हो रहा है और ये कण किस तरफ से आ रहे हैं। इस संबंध में आईआईटी कानपुर ने भी एक रिपोर्ट तैयार की है मगर एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) के अधीन कार्य करने वाली संस्था अर्थ साइंस एंड क्लाइमेट चेंज की टीम माइक्रो प्लानिंग करेगी।

स्थानीय इंजीनियर और वैज्ञानिक भी करेंगे काम
इस प्रोजेक्ट के लिए दो कमेटी बनाई जाएगी। प्रोजेक्ट स्टीयरिंग कमेटी में नगर निगम, केडीए, वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पीडब्ल्यूडी, जलकल, जल निगम, यूपीसीडा, उद्योग विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी होंगे। प्रोजेक्ट टेक्निकल कमेटी में सिर्फ टेक्निकल स्टाफ होगा जिसमें कंपनी के साथ ही स्थानीय विभागों के इंजीनियर और वैज्ञानिक होंगे। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम 4 वर्ष में क्लीन एयर एक्शन प्लान तैयार करेगी।

फैक्ट्रियों के प्रदूषण की भी होगी जांच
अब तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यह कहकर क्लीन चिट देता रहा है कि औद्योगिक इकाइयां ऐसी नहीं हैं, जिनसे प्रदूषण हो। अब उन फैक्ट्रियों के पास ही नहीं बल्कि फैक्ट्रियों के ऊपर भी संयंत्र ले जाकर चेक किया जा सकेगा कि पीसीबी कितना सच बोल रहा और कितना झूठ। इसीलिए उद्योगों के लिए अलग से प्लान तैयार होगा।

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