आईआईटी में लगा दाग,नूर जल्द होगा बेदाग

Vinod Nigam

Updated: 23 Nov 2018, 05:12:44 PM (IST)

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर। देश, प्रदेश ही नहीं पूरी दुनिया में जिस शिक्षण संस्थान का ढंका बजता था, वो इस वक्त बुरे दौर से गुजर रहा है। यहां पर जाति-पात के साए ने अपने पैर जमा लिए हैं और इसकी बुनियाद को हिलाकर रख दिया हैं। एससी-एसटी एक्ट के तहत आईआईटी धनबाद के निदेशक समेत तीन प्रोफेसरों पर एफआईआर के बाद कैम्पस के हालत बहुत खराब हो गए हैं। स्टूडेंट्स अपने-अपने कमरों में कैद हैं तो प्रोफेसर भी एक-दूसरे से बोलने में कतरा रहे हैं। वहीं अरोपित प्रोफेसरों के परिजनों ने भी इंसाफ के लिए आंदोलन शुरू कर दिया है। इन्हीं सबके चलते गुरूवार को प्रशासन की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई और मामले की निपटाए जाने पर सहमति बन गई है।

क्या है पूरा मामला
आईआईटी के स्पेस विभाग के प्रोफेसर सुब्रामण्यम सडरेला ने संस्थान के चार प्रोफेसरों सहित 5 लोगों के खिलाफ कल्याणपुर थाने में एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करवाई थी। आरोपी प्रोफेसरों पर एससीएसटी एक्ट, मानहानि और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्रोफेसर सुब्रामण्यम सडरेला का आरोप है कि उनकी संस्थान में नियुक्त के बाद उनकी जाति के आधार पर उन पर टिप्पणी की गई, साथ ही उन्हे मंद बुद्धि बताया गया। एक प्रोफेसर ने उन पर ई- मेल भेजकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। प्रोफेसर ने इसकी शिकायत आईआईटी की इंटरनल कमेटी ने की थी। जांच के बाद सारे आरोप सही पाए गए। वहीं एसएसटी आयोग ने भी चारो प्रोफेसरों पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसी के बाद . जिसके बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने आईआईटी धनबाद के निदेशक राजीव शेखर सहित प्रो ईशान शर्मा, प्रो पीएस उपाध्याय और प्रो संजय मित्तल के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया था।

गिरफ्तारी पर लगाई रोक
एफआईआर दर्ज होने के बाद चारों प्रोफेसरों हाईकोर्ट में जाकर अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने गिरफ्तार रोक लगा दी है। इसी के बाद अब आईआईटी प्रशासन माहौल बेहतर बनाने के लिए आगे की रणनीति बनाने जा रहा है। कई दिन चल रहे घमासान के बीच आज आईआईटी में एक आधिकारिक बैठक हुई। इ इंस्टीट्यूट एडवाइजरी कमेटी की इस महत्वपूर्ण बैठक में निदेशक समेत डीन व वरिष्ठ प्रोफेसर शामिल रहे। इस दौरान पूरे प्रकरण को निपटने पर चर्चा हुई। और इसी दौरान निर्णय लिया गया। आईआईटी प्रशासन ने चारों आरोपित प्रोफेसरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। जिसका जवाब उन्हें 27 नवंबर तक देना है।

चलेगी विभागीय जांच
उच्च न्यायालय से चारों प्रोफेसरों को स्टे मिलने के बाद आईआईटी प्रशासन अब विभागीय जांच कर सकता है। प्रोफेसरों के बयान दर्ज किए जा सकते हैं। इसके साथ ही बोर्ड ऑफ गवर्नर की बैठक में लिए गए निर्णय को भी आधिकारिक करने पर की प्रक्रिया भी चलेगी। वहीं प्रोफेसर ईशान शर्मा, प्रोफेसर संजय मित्तल व प्रोफेसर चंद्रशेखर उपाध्याय आईआईटी लौट आएं हैं। जबकि प्रोफेसर राजीव शेखर आईआईटी-आईएसएम धनबाद में कार्यभार संभालेंगे। वहीं पूरे मामले मामले पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) सीधी नजर रखे है। संस्थान प्रशासन से मिनट टू मिनट रिपोर्ट मांगी जा रही है। इसका असर यह है कि संस्थान में ताबड़तोड़ बैठकें हो रही हैं। प्रोफेसर, छात्र, तकनीशियन, कर्मचारी सभी इस मसले पर अपने-अपने समूह में वार्ता कर रहे हैं। सभी का एक ही उद्देश्य है कि यहां का माहौल कैसे सुधरे। आईआईटी प्रशासन मंत्रालय के साथ-साथ पुलिस के संपर्क में भी है।

साइंटिस्ट बनाने के लिए आया हूं
एयरोस्पेस विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर सुब्रह्मण्यम सडरेला का कहना है कि मेरा यह मकसद नहीं है कि किसी का परिवार परेशान हो। मेरे साथ दिक्कत हुई तो मेरे परिवार ने परेशानी झेली। सभी इंसान हैं यह समझकर लोगों को आगे कदम बढ़ाना चाहिए। कोरिया से मुझे नेशनल फेलोशिप मिली है। मैं अपनी काबिलियत से अपने पद पर हूं। यह बात सबको समझना होगा। संविधान ने हमें अन्य की तरह सुविधाएं दी हैं। लेकिन मेरे साथ यहां दुर्व्यवहार किया गया। इसी से आहत होकर मुझे कोर्ट-कचहरी और थाने के चक्कर लगाने पड़े। मैं देश के लिए युवा सांइटिस्ट देने के लिए यहां पर आया हूं, न कि सियासत करनें।

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