आहिस्ता-अहिस्ता गंगाजल हो रहा प्राणघातक, और ज्यादा बढ़ी लेड और कैडमियम की मात्रा

आहिस्ता-अहिस्ता गंगाजल हो रहा प्राणघातक, और ज्यादा बढ़ी लेड और कैडमियम की मात्रा

Alok Pandey | Publish: Sep, 06 2018 04:16:21 PM (IST) Kanpur, Uttar Pradesh, India

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि गंगाजल सदियों से जीवनदायी रहा है, लेकिन अब ऐसा नहीं है. बल्‍कि इसके विपरीत अब ये जहरीला हो चुका है. सच है ये. न यकीन हो तो छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में इसपर चल रहे शोध पर गौर कर लीजिए.

कानपुर। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि गंगाजल सदियों से जीवनदायी रहा है, लेकिन अब ऐसा नहीं है. बल्‍कि इसके विपरीत अब ये जहरीला हो चुका है. सच है ये. न यकीन हो तो छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में इसपर चल रहे शोध पर गौर कर लीजिए. दरअसल विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ बायोसाइंस एंड बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने कन्नौज से वाजिदपुर (जाजमऊ) तक अलग-अलग नौ स्थानों पर पानी के नमूने एकत्र कर परीक्षण कराया तो यह हकीकत सामने आई. देखते हैं क्‍या सच्‍चाई आई सामने.

सामने आई सच्‍चाई
सच्‍चाई सामने आई कि गंगाजल में लेड और कैडमियम की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों से कहीं ज्यादा मिली है. इसकी वजह से इंसान और जलीय जीवों का जीवन खतरे में है. चिकित्सक इस पानी के सेवन से किडनी और पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बताकर आगाह कर रहे हैं. जांच टीम का मानना है कि औद्योगिक अपशिष्ट गंगा में जाने की वजह से यह दिक्कत बढ़ रही है और इसे सीधे गंगा में गिरने से रोकना बेहद जरूरी है.

ऐसा बताया कुलपति ने
इस बारे में सीएसजेएमयू की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्‍ता कहती हैं कि विश्वविद्यालय कुलपति ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर एक रिपोर्ट दी थी. इसमें गंगाजल में क्रोमियम व आर्सेनिक की मात्रा होने की जानकारी दी गई थी. इसके साथ ही लेड और कैडमियम पर शोध की जानकारी दी थी. अब यह रिपोर्ट भी उन्हें भेजी जाएगी. गंगाजल में लेड और कैडमियम की मात्रा मानक से ज्यादा मिलना चिंताजनक है. इनके बढ़ने से रोकना होगा. जल्द रिपोर्ट गंगा से जुड़े मंत्रालयों को भी भेजेंगे.

होती है ऐसी शिकायत
इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विशाल गुप्‍ता कहते हैं कि लेड और कैडमियम हैवी मेटल हैं. पानी के साथ थोड़ी मात्रा में जाने पर पेट में दर्द और मरोड़ की शिकायत होती है. लिवर पर भी असर पड़ता है. पानी के साथ अधिक मात्रा में शरीर में जाने से नसें कमजोर हो जाती हैं, जिससे पैरालिसिस हो सकता है. किडनी के लिए यह घातक हैं, संक्रमण से लेकर फेल्योर तक की स्थिति बन सकती है.

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