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बथुआ के दम पर किसान ने खड़ी कर दी कंपनी, घास को बना दिया ब्रांड

विदेशों में भी जबरदस्त मांग, ५६१ किसानों को साथ जोड़ा,कम लागत और ज्यादा मुनाफा देखकर किसान हुए आकर्षित

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बथुआ के दम पर किसान ने खड़ी कर दी कंपनी, घास को बना दिया ब्रांड

कानपुर। ज्यादा लागत और कम मुनाफे के चलते खेती से दूर होने वाले किसानों के लिए भुवन एक बड़ा उदाहरण हैं। भुवन ने बथुआ जैसी घास को भी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बना दिया और इसी के दम पर कंपनी खड़ी कर दी। बथुआ गेंहू के साथ घास के रूप में उगता है, इसलिए इसका कोई मोल नहीं होता लेकिन भुवन ने अलग से इसकी खेती कराई और आसपास के ५६१ किसानों को भी जोड़ा। अब कंपनी बथुआ का कारोबार करती है। जिसकी विदेशों में भी भरपूर मांग है।

अकेले दम पर की शुरूआत
फतेहपुर जिले के अमौली ब्लॉक हुसैनाबाद गांव निवासी भुवन द्विवेदी पहले मिर्च की खेती करते थे लेकिन लागत अधिक आ रही थी और मुनाफा कम था। जिससे उनका भी परंपरागत खेती से मोह भंग हो गया था। भुवन ने किसान पाठशालाओं में जाना शुरू हुआ। यहां उन्हें कृषि विशेषज्ञों ने किनोवा प्रजाति की बथुआ के बारे में जानकारी दी। भुवन ने पहले खुद ही किनोवा प्रजाति के बथुआ का उत्पादन शुरू किया।

खड़ी कर दी कंपनी
बथुआ की मांग बढ़ी तो भुवन ने खुद की खेत किसान उत्पादक कंपनी बनाई। कंपनी एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन भी करा लिया। जनवरी 2016 में जब कंपनी बनाई तो गांव के 20 किसानों को शामिल किया। खुद सीईओ की जिम्मेदारी संभाली और पांच को डायरेक्टर, बाकी को सदस्य बनाया। इसका सालाना टर्नओवर 35 लाख और मुनाफा करीब 2.5 लाख से अधिक है।

दवा में होता इस्तेमाल
किनोवा बथुआ का इस्तेमाल आम तौर पर दवा में हो रहा है। इसकी मांग भी है और कई कंपनियां सीधे खरीद लेती हैं। डॉक्टर आम तौर पर खून की कमी वाले मरीजों को बथुआ के साग का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। भुवन का दावा है कि एक कटोरी बथुआ दाने के सेवन से पूरे दिन भूख नहीं लगती। शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व भी मिल जाते हैं।

कम लागत, ज्यादा मुनाफा
भुवन ने बताया कि बथुआ उत्पादन में लागत बहुत काम है। एक बीघा फसल में 400 से 600 ग्राम बीज पर्याप्त है। खास बात यह है कि इस फसल में कीट पतंगे और रोग नहीं लगती। सर्दी की फसल होने के नाते पानी की जरूरत भी नहीं पड़ती। रासायनिक उर्वरक तो इस्तेमाल ही नहीं किया जाता। भुवन की मेहनत का ही नतीजा निकला कि किनोवा प्रजाति के बथुआ विदेश तक पहुंच गया। यूरोप और लैटिन अमेरिकी देशों में किनोवा प्रजाति के बथुआ की मांग अधिक है। गुजरात की कंपनी मितहारा सुपरफूड प्रोडक्ट्स से किसान उत्पादन कंपनी का अनुबंध है।

खास पहचान
इसकी पहचान कुछ अलग होती है। किनोवा प्रजाति के बथुआ का दाना और पौधा सामान्य बथुआ की अपेक्षा बड़ा होता है। सामान्य बथुआ हरा होता है,जबकि किनोवा समय के हिसाब से रंग बदलता है। शुरू में इसकी पत्तियां हरी, जब दाने आ गए तो पिंक और सूख जाने पर गोल्डन रंग का हो जाता है।