लॉकडाउन में लोगों के घरों में होने से इनकी बढ़ी मुसीबत, तो पर्यावरण योद्धा बने रहबर

इन्हीं सराहनीय कार्यों के लिए नवीन को अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण गांधी योद्धा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

By: Arvind Kumar Verma

Published: 18 Apr 2020, 04:30 PM IST

कानपुर देहात-कोरोना वायरस को लेकर देश में ऐसा संकट छा गया कि एक तरफ लोग घरों में कैद होकर संघर्ष कर रहे हैं। तो वहीं भीषड़ गर्मी में बाहर पशु पक्षियों को कोई रहबर नजर नहीं आता है। सड़कों पर आवारा पशु खाने की फिराक में तड़पते दिख रहे हैं तो पक्षियों को भी संकट से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में कानपुर देहात के रूरा निवासी पर्यावरण मित्र नवीन दीक्षित ने पक्षियों की सुध ली। अपने इन्हीं सराहनीय कार्यों के लिए नवीन को अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण गांधी योद्धा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। शिक्षक होने के साथ साथ वो पर्यावरण के प्रति अत्यधिक सजग रहते हैं। इस समय लॉकडाउन में जहां लोग अपने पेट को लेकर चिंतित हैं। वहीं पर्यावरण मित्र ने पक्षियों की भूंख प्यास को लेकर चिंतित हो उठे और उन्होंने घर की छत पर पक्षियों के लिए तरह तरह के दाना व पानी रखकर उनकी सेवा में तल्लीन हैं।

उनका कहना है कि वर्तमान में सारी जमीन मानव ने आपने नाम पर लिखा ली है। अब खेतों का अत्याधुनिक थ्रेसर से एक एक दाना घर में रख लिया जाता है। इसके चलते पक्षियों को खाने को नहीं मिल पाता है। इसके चलते नवीन व उनके दोनों बच्चे शिव व सान्या भी उनके इस कार्य में सहयोग करते हैं। इसके लिए वे छत के छायादार स्थान पर मिट्टी के बर्तनों में पानी एवं चना, अरहर, मूंग की दालें सहित गेहूं, फल, शहतूत सहित अन्य सामान रखते हैं।

इस दौरान बच्चे दिन में तीन बार पानी को बदलकर रखते हैं। पर्यावरण मित्र ने बताया इस तरह सैकड़ों की संख्या में पक्षी आकर अपनी भूंख प्यास मिटाते हैं। आज इंसान अपने भोग विलास में सबकुछ भूल गया है। उन्होंने कहा कि लोगों ने ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाकर जल का वाष्पीकरण कर दिया और अतिक्रमण करके जलाशयों का सत्यानाश कर दिया है। 70 प्रतिशत तक जीव जन्तु विलुप्त हो चुके हैं। इसलिए प्रकृति और जीवों से खिलवाड़ न करें। वट, नीम, पीपल व तुलसी आदि का रोपण करके प्रकृति का संरक्षण करें।

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