एक ऐसे चिकित्सक जो दस साल से कर रहे गरीबों का निशुल्क इलाज, बने हैं गरीबों के मसीहा, जानिये क्या कहते हैं वो

इस महंगाई के दौर में जहाँ महंगे इलाज के चलते गरीब कर्ज मे डूब जाते हैं, वहीं एक ऐसे चिकित्सक, जो गरीबों का दस साल से निशुल्क इलाज कर रहे हैं।

कानपुर देहात-कहा जाता है कि गरीबी का आलम बड़ा अजीब होता है, दिन भर मजदूरी करके पूरे परिवार ने अगर एक समय खाना खा लिया तो दूसरे टाइम के भोजन के लिए सोचना पड़ता है। जब इन हालातों में कोई गरीब बीमारी की चपेट में आता है तो इस महंगाई के दौर में वह सिर्फ ईश्वर को ही याद करता है लेकिन इन गरीबों के लिए आज भी कई मददगार समाज मे हैं, ऐसे ही एक चिकित्सक संजय त्रिपाठी हैं, जो आज भी गरीबों का निशुल्क इलाज करते हैं, उनका मानना है कि इस सेवा से उन्हें धन तो नही मिलता लेकिन बेसकीमती सुकून जरूर मिलता है। बीमारी का जब प्रकोप बढ़ता है तो वे कैम्प लगाकर गरीबों का निशुल्क इलाज कर उन्हें दवाएं भी वितरित करते हैं। वो बताते हैं कि ये प्रेरणा उन्हें अपने पिता से मिली है।

 

व्यापार नही समाजसेवा में हैं तल्लीन

जनपद गाजीपुर के बाजीपुर के रहने वाले डॉक्टर संजय त्रिपाठी कानपुर देहात जिले के नवीपुर में करीब 10 वर्षों से निजी नर्सिग होम में फिजीशियन व वरिष्ठ परामर्शदाता हैं। गरीबों के इलाज के लिए वह प्रत्येक सप्ताह अपनी टीम के साथ गांव में कैंप लगाते हैं। जहां वह मरीजों की जांच व इलाज के साथ दवाएं भी निशुल्क देते हैं। दस सालों से डॉक्टरी के क्षेत्र से जुड़े डॉ. संजय कहते हैं कि उन्होंने इस काम को कभी व्यापार नहीं बनाया। ईश्वर ने गरीबों की मदद करने के काबिल बनाया है तो करता हूं। इससे मानसिक सुख मिलता है।

 

लगा चुके एक हजार से अधिक कैम्प

उन्होंने बताया कि वह अब तक जिले में एक हजार से अधिक कैम्प लगा चुके हैं। गंभीर बीमारियों के इलाज के साथ दवा भी देते हैं। वहीं यदि कोई मरीज भर्ती के लायक होता है तो वे उसे भर्ती कर पूरा इलाज करते हैं, जिसका सारा खर्च खुद वहन करते हैं। बीमारियों का प्रकोप बढ़ने पर वह कैम्प लगाकर टीम के साथ इलाज करते हैं, जिसमें टीम पूरा सहयोग देती है। इस कार्य में गरीबो की मिलने वाली दुआएं उन्हें सुख शांति प्रदान करती हैं।

 

पिता के संस्कार से कर रहे सेवा

वे बताते हैं उनके पिता श्रीकांत त्रिपाठी गांव बाजीपुर में आदर्श डिग्री कालेज में प्राचार्य थे। बताते हैं कि उनके दिए संस्कारों की बदौलत ही हम तीनों भाई किसी की मदद करने में संकोच नहीं करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई आनंद सरकारी नौकरी में हैं। छोटा भाई विवेक भारतीय वायु सेना में अफसर है। जबकि वह खुद नवीपुर में प्राइवेट अस्पताल चला रहे हैं। जो गरीबों के इलाज में तल्लीन रहते हैं। उनके साथ इस सेवा में मशगूल चिकित्सको की टीम का भी कहना है कि इलाज के लिए वे बाहर ले जाने का भी खर्च उठाने को तैयार हैं।

Arvind Kumar Verma
और पढ़े
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned