कब्र में दफनाते वक्त जिंदा हो गए संत, यमराज ने इस वजह से बख्शी जान

Vinod Nigam

Publish: May, 18 2019 08:09:02 AM (IST)

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर। रसूलाबाद थानाक्षेत्र के असालतगंज गांव में 115 साल संत नारायण दास की हार्टअटैक पड़ने के चलते मौत हो गई। ग्रामीण उनके शव को मंदिर के पास स्थित जमीन पर दफनाने के लिए ले गए। कब्र का गड्डा भी खोद लिया गया और विधि-विधान से संत के शव को जैसे ही गड्डे में रखा गया वैसे ही वो खांसने लगे और पानी की मांग कर दी। दे देख गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। इस बीच संत ने ग्रामीणों को परलोक की कहानी भी सुनाने के साथ जिंदा होने के बारे में यमराज का नाम ले रहे हैं। ग्रामीण इस चमत्कार से हैरत में हैं और ईश्वर का चमत्कार मान रहे हैं।

हार्ट अटैक के चलते मौत
असालतगंज गांव में स्थित द्रोणेश्वर मंदिर में पिछने 20 साल से मंदिर की देखरेख संत नारायण दास करते थे। संत बाहर से आकर मंदिर को अपना ठिकाना बना लिया था। वो भोजन के नाम पर सिर्फ एक बार फलाहार लेते थे। चार दिन पहले उन्हें हार्ट अटैक पड़ा और मंदिर में ही उनकी मौत हो गई। सुबह भक्त जब पूजा करने के लिए मंदिर पहुंचे तो संत का शव जमीन पर पड़ा देख हड़कंप मच गया। ग्रामीण ने उनका दाह संस्कार करने के बजाए शव दफनाने के लिए मंदिर के पास कब्र का गड्डा खोदा। अचानक उनकी सांस चलने लगी। जिससे लोग आश्चर्य में पड़ गए और उत्साह की लहर दौड़ गई।

20 साल से नहीं खाया अन्न
ग्रामीण इसे ईश्वर का चमत्कार मान रहे हैं। गांव के रामसिंह बताते हैं कि बाबा जी ने 20 साल पहले अन्न छोड दिया था। मंदिर में वो पूजा-पाठ करते थे और भक्तों को भक्ती की पाठ पढ़ाते थे। वो दिन में सिर्फ एकबार फलाहार लेते करते हैं। रामसिंह के मुताबिक बाबा कभी बीमार नहीं पड़े। वो बीमार लोगों को जड़ी बूटियों के जरिए इलाज भी करते थे। पिछले एक साल से वो ज्यादा चल-फिर नहीं पाते थे। मंदिर में जमीन में ही सोया करते थे।

5 हजार साल पुराना है मंदिर
ग्रामीण कल्लू साहू ने बताया कि असालतगंज गांव में प्राचीन द्रोणेश्वर मन्दिर है, जो 5 हजार वर्ष पुराना है। कल्लू ने बताया कि बाबा चमत्कारी हैं और उनके चलते गांव में पिछले 20 साल से एक भी व्यक्ति की अकाल मृत्यु नहीं हुई। कल्लू बताते हैं कि मंदिर में हरदिन सैकड़ों भक्त आते हैं और पूजा-पाठ के बाद दान भी करते हैं। बाबा दान की रकम को गांव की बेटियों को दे देते हैं। बाबा के पुनः जीवित होने पर पूरे गांव में खुशी है और अब लोग बाबा की देखरेख करने के लिए रात में मंदिर में रहते हैं।

परलोक के किस्से सुना रहे संत
मरने के बाद वापिस जिंदा होने के बाद ये संत परलोक की कहानी सुना कर सबको हैरानी में डाल रहे हैं। संत ने कुछ ऐसी बातें कह रहे हैं जिन्हे समझ पाने और उन पर विश्वास करने में सबको बहुत कठिनाई हो रही है। संत ने ग्रामीणों को बताया कि उन्हे दो लोग ले जा रहे थे लेकिन वहां जाकर लोगों ने उन्हे अंदर नहीं घुसने दिया। उन्हे वापिस जाने के लिए कहा गया क्योकि यमराज के दूत किसी और व्यक्ति के धोखे में संत को ले गए थे और संत का समय और होने के कारण उन्हे वापिस भेज दिया। ये परलोक की कहानी तो सच है लेकिन इसे मानना या ना मानना पूरी तरह से आपके ऊपर है।

 

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