हैलट में भर्ती महिला की दिनचर्या का राज खोज रहे डॉक्टर, रात में शुरू होता है उसका दिन

हैलट में भर्ती महिला की दिनचर्या का राज खोज रहे डॉक्टर, रात में शुरू होता है उसका दिन

Alok Pandey | Updated: 30 Jan 2019, 10:47:13 AM (IST) Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

सिर में चोट लगने के कारण खुद को भूली, तीन साल से चल रहा इलाज
दिन में किए जाने वाले सारे काम करती है रात को, डॉक्टर भी हैरान

कानपुर। अगर दिन के नित्यकर्म कोई रात में करे तो उसे क्या कहेंगे। हैलट में भर्ती एक महिला का भी यही हाल है। दिन भर वह गुमसुम रहती है। कुछ नहीं बोलती। लगता है कि गूंगी है, पर शाम ढलते ही बेड से उठती है और अपनी बात कहने की कोशिश करती है। टूटी-फूटी आवाज में बोलती है और लोगों की बात ध्यान से सुनती है।

दिनचर्या नहीं रात्रिचर्या
सूर्यास्त होते ही उसकी दिनचर्या या यूं कहें कि रात्रिचर्या शुरू हो जाती है। दिन में किए जाने वाले सारे काम वह रात में करती है, पर क्यों, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। सफाई को लेकर वह बेहद सतर्क रहती है, रोज रात में ही नहाती है और दिन के सारे काम निबटाती है। जिस तरह रात में लोग सो जाते हैं और कुछ नहीं बोलते, उसी तरह यह दिन में चुप रहकर रात में बोलने की कोशिश करती है।

सड़क हादसे में लगी थी चोट
तीन साल पहले सड़क हादसे में सिर में चोट लगने के बाद उसे पुलिस ने यहां भर्ती कराया था। इलाज से उसकी चोट तो ठीक हो गई पर याददाश्त चली गई। डॉक्टरों ने महिला की याददाश्त वापस लाने की बड़ी कोशिश की। संगीत थेरेपी की गई। ऑडियो रिकॉर्डर दिया गया। मनोरोग विशेषज्ञों ने भी इलाज किया, मगर कोई सफलता नहीं मिली। अभी तक इसकी बीमारी का भी सही पता नहीं चला है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर इसपर शोध कर रहे हैं।

रिट्रोग्रेट इम्नीजिया की संभावना
महिला की बीमारी का सही-सही पता तो नहीं चला है पर न्यूरोसर्जन डॉ. मनीष सिंह के मुताबिक ब्रेन के जिस हिस्से में महिला को चोट लगी है उसी हिस्से में मेमोरी स्टोर रहती है। याददाश्त वापस आने का कोई तय समय नहीं है, कभी कुछ माह तो कभी वर्षों लग सकते हैं। उसे रिट्रोग्रेट इम्नीजिया की संभावना है। रात में बोलने के पीछे यह वजह हो सकती है कि रात में शांत माहौल होने पर उसकी मेमोरी रीस्टोर होती होगी और उसे पुरानी बातें याद आती होंगी।

सबकी चहेती बन गई
तीन साल से भर्ती यह महिला जूनियर डॉक्टरों और कर्मचारियों की चहेती बन गई है। सब मिलकर उसका खर्च उठाते हैं और उसकी जरूरत का सारा सामान मुहैया कराते हैं। महिला इन लोगों की बात सुनती है और अस्पताल में होने वाली दिक्कतों को भी इन्हें बताने की कोशिश करती है।

 

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