नहीं जलानी पड़ेगी पराली, तैयार किए जा सकेंगे टाइल्स

नार्दन इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन में चल रहा शोध

किसानों को होगा मुनाफा, वायु प्रदूषण से मिलेगा छुटकारा

कानपुर। पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को अब रोका जा सकेगा। इसके लिए शोध चल रहा है, जिससे पराली, भुट्टे के छिलके और गन्ने की खोई से टाइल्स बनाए जा सकेंगे। यह शोध सफल होने से एक ओर वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकेगा तो दूसरी ओर किसानों को भी ज्यादा मुनाफा होगा और उन्हें पराली और खोई का भी पैसा मिलेगा।

पराली हर साल बनती समस्या
खेतों में फसल की कटाई के बाद पराली हर साल किसानों के लिए समस्या बनती है। इसलिए वे इसे काटने की बजाय जला देते हैं और उनके खेत आसानी से खाली हो जाते हैं, लेकिन जलाने के बाद यही पराली वायु प्रदूषण को बढ़ाती है जो हवा के साथ आसपास कई किलोमीटर तक फैलकर लोगों के फेफड़े खराब करती है। इस प्रदूषण में मिलकर हानिकारक गैसें गंभीर बीमारियां देंती हैं।

निकाले जाएंगे फाइबर
नार्दन इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन गाजियाबाद की वैज्ञानिक निधि सिसौदिया ने बताया कि यहां पर कृषि अपशिष्टों से टाइल्स बनाने को लेकर शोध चल रहा है। इसके तहत पराली, गन्ने की खोई और भुट्टे से फाइबर निकाले जाएंगे। इस फाइबर में रेजन और हार्डनर निश्चित मात्रा में मिलाकर कोल्ड मैथड से टाइल्स तैयार कराए जाएंगे।

सस्ते और टिकाऊ टाइल्स
यूपीटीटीआई के एक सेमिनार में शिरकत करने पहुंची वैज्ञानिक निधि सिसौदिया ने बताया कि कृषि अपशिष्टों से बने टाइल्स सस्ते और टिकाऊ होंगे। उन्होंने बताया कि हमारी टीम ने एफआर टाइल्स बनाया है, जो वुडेन टाइल्स की जगह लगाया जा सकता है। सेमिनार में देश-विदेश से आए कई वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस दौरान डॉ. जावेद शेख, एम एस प्रभाकर, प्रो. पराग भार्गव, डॉ. आलोक कुमार, नीलू कंबो, प्रो. आभा भार्गव समेत कई वैज्ञानिक मौजूद रहे।

आलोक पाण्डेय
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