आयकर अदा करने में कानपुर सबसे आगे, अकेले दम पर जमा किए 3753 करोड़ रुपए

- शहर का रुतबा कायम, बड़े-बड़े पिछड़ गए, कानपुर रीजन से 22876 करोड़ रुपए खजाने में पहुंचे

By: आलोक पाण्डेय

Published: 22 May 2018, 12:56 PM IST

कानपुर. कनपुरियों का जलवा कायम है। नोटबंदी और जीएसटी के कारण कथित तौर पर कारोबार मंदा होने के बावजूद कनपुरियों की जेब का वजन हल्का नहीं हुआ है। शाह जिंदगी के कितने किस्से गिनाए जाएं, निचोड़ यह समझ लीजिए कि धन्ना सेठों और अरबपति नेताओं-नवाबों का लखनऊ, पूंजीपतियों का इलाहाबाद और विदेशी कंपनियों का गढ़ नोयडा भी कानपुर के आगे टिकने की औकात नहीं दिखा पाए हैं। इनकम टैक्स के मामले में कानपुर ने खुद को अव्वल साबित करते हुए अकेले दम पर 3753 करोड़ रुपए बतौर आयकर सरकार के खजाने में जमा किए हैं।


बड़ी कंपनियां चली गईं, लेकिन रुतबा कायम है

उद्योगों की कब्रगाह के रूप में बदनाम कानपुर ने साबित कर दिया है कि यह बदनामी फिजूल है। बड़ी कंपनियों ने मुंह मोड़ लिया है, लेकिन छोटे कारोबार फल-फूल रहे हैं। इसी नाते नोटबंदी के बाद आयकर देने के मामले में कानपुर ने देश के शीर्ष दस रीजन में स्थान बनाया है। प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त -कानपुर के क्षेत्राधिकार में आने वाले यूपी वेस्ट और उत्तराखंड से 22876 करोड़ रुपए आयकर जमा हुआ है। गौरतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी एलजी इंडिया कानपुर रीजन में आयकर भरती थी और एक हजार करोड़ रुपए टैक्स देती थी। पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी ने कानपुर रेंज को छोड़ दिया। इसके अलावा बैंकों से मिलने वाले टीडीएस और अन्य टैक्स भी कानपुर के हिस्से में नहीं आया। कारण यहकि पहले बैंक शाखावार टैक्स जमा करते थे, इसलिए कानपुर रीजन के दायरे में आने वाली हजारों शाखाओं से आयकर विभाग को अच्छा खासा टैक्स मिलता था। अब बैंकों ने इनकम टैक्स का सिस्टम केंद्रीयकृत कर दिया है। ऐसे में मुख्यालय के जरिए देशभर का आयकर जमा किया जाता है। ओएनजीसी ने भी इस वित्त वर्ष में कम टैक्स जमा किया। इसके बावजूद टैक्स कलेक्शन में वृद्धि से साफ है कि व्यक्तिगत करदाताओं की संख्या में इजाफा हुआ है।


कानपुर टॉप-टेन में, पहले नंबर पर मुंबई

आयकर विभाग के मुताबिक, इनकम डिस्क्लोजर स्कीम (आईडीएस), फिर नोटबंदी के बाद लोगों ने बड़ी मात्रा में कालेधन को उजागर किया। घर में रखी अघोषित रकम के बैंकों में आते ही आयकर विभाग सक्रिय हो गया। इसी नाते इनकम टैक्स रिटर्न में नोटबंदी के दौरान जमा रकम को लेकर अलग से कॉलम दिया गया था। दोनों फैसलों ने आयकर बढ़ोतरी में अहम भूमिका निभाई। यही वजह है कि देश के 19 आयकर रीजनों में कानपुर ने टॉप-टेन में अपनी जगह बनाई है। पहले नंबर पर इस बार भी मुंबई रहा। कानपुर रीजन में टैक्स कलेक्शन की ग्रोथ 6.25 प्रतिशत रही। यह वृद्धि कई बड़ी कंपनियों के कानपुर रेंज से जाने के बावजूद दर्ज की गई है। कानपुर के टैक्स कलेक्शन के बारे में आयकर विभाग के यूपी वेस्ट-उत्तराखंड रेंज के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त अभय तायल कहते हैं कि आयकर देने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। अपर मिडिल क्लास पर विभाग फोकस कर रहा है। इस सेगमेंट से आयकर की अच्छी ग्रोथ की पूरी संभावना है।

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आलोक पाण्डेय
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