भारतीय रेलवे के अधिकारी को समय पर नहीं मिली दवा, तो डॉक्टर और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का हुआ ट्रांसफर

भारतीय रेलवे के अधिकारी का सर दर्द के मारे फटा जा रहा था लेकिन उन्हें सरदर्द की दवा नहीं मिली ओर वो सरदर्द के कारण कराहते रहे।

By: Neeraj Patel

Published: 03 Jan 2020, 09:41 PM IST

कानपुर. भारतीय रेलवे के अधिकारी का सर दर्द के मारे फटा जा रहा था लेकिन उन्हें सरदर्द की दवा नहीं मिली ओर वो सरदर्द के कारण कराहते रहे। जब विभाग के ही अधिकारी के साथ ही ये घटना घटी तो इसी पता चलता है कि आम आदमी का इस पीड़ा से क्या हाल होता होगा। दरअसल ट्रेन में बैठे रेलवे बोर्ड चेयरमैन वीके यादव का अचानक सिरदर्द होने लगा और कहने के बाद भी कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर उन्हें दवा नहीं उपलब्ध नहीं हो पाई।

इस तरह की लापरवाही पाए जाने पर कानपुर में लोको अस्पताल के चिकित्सक डॉ. गौरव और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हरिजीत का अलीगढ़ ट्रांसफर कर दिया गया है। 27 दिसंबर को शिवगंगा एक्सप्रेस से जब रेलवे बोर्ड चेयरमैन (सीआरबी) वीके यादव नई दिल्ली से वाराणसी जा रहे थे। तभी दिल्ली के आगे उन्हें तेज सिरदर्द हुआ। उन्होंने डीआरएम इलाहाबाद अमिताभ कुमार से कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर दवा भिजवाने को कहा लेकिन समय पर दवा पहुंची।

सीएमएस ने रात के वक्त ड्यूटी पर तैनात डॉ. गौरव को दवा लेकर जाने को कहा। उनकी हिमाकत यह रही कि सीआरबी को स्वयं दवा जाकर देने के बजाय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हरिजीत को भेज दिया। वह सेंट्रल पहुंचा तो सीआरबी का अलग से लगा सैलून भी नहीं पहचान सका। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हरिजीत स्टेशन पर इधर-उधर पूछता रहा और आखिर में एसी थर्ड कोच के अटेंडेंट को दवा पकड़ा दी कि सीआरबी यादव को दे देना। जब दवा मिलने की जानकारी ली गई तो पता चला कि कोई दवा देने नहीं आया। डॉ. गौरव को बचाने के लिए सीएमएस ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हरिजीत का अलीगढ़ ट्रांसफर कर दिया। यूनियन नेताओं के दबाव में गुरुवार को सीएमएस ने डॉ. गौरव को भी अलीगढ़ भेज दिया है।

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