क्रासिंग के जाम में एंबुलेंस के अंदर महिला के साथ हुई ताउम्र याद रहने वाली घटना

क्रासिंग के जाम में एंबुलेंस के अंदर महिला के साथ हुई ताउम्र याद रहने वाली घटना

Alok Pandey | Publish: Sep, 10 2018 12:21:57 PM (IST) Kanpur, Uttar Pradesh, India

कोई रास्ता नहीं देखकर उमेश ने जाम में उलझीं अन्य महिलाओं से मदद के लिए कहा। कुछ महिलाएं आगे बढ़ीं और एंबुलेंस में तड़पती पुष्पा का सुरक्षित प्रसव कराया।

कानपुर देहात. जाम की स्थिति बड़ी नाजुक है। झांसी-कानपुर रेलमार्ग से पुखरायां स्टेशन के करीब मंडी रोड पर रेलवे क्रासिंग का जाम आए दिन जिंदगी-मौत से बीच उलझे मरीजों के लिए आफत बनता है। ऐसा ही किस्सा बीते दिवस देर शाम को हुआ। एक के बाद एक चार ट्रेनों को निकालने के चक्कर में मंडी क्रासिंग 45 मिनट से ज्यादा वक्त तक बंद रही। ऐसे में प्रसव पीड़ा से परेशान महिला ने जाम के बीच फंसी एंबुलेंस में बच्चे को जन्म दे दिया। मौके पर मौजूद अन्य वाहनों पर सवार महिलाओं ने प्रसव कराया।

 

वह तड़पती रही, लेकिन नियम-कायदों के कारण गेट नहीं खुला

जानकारी के अनुसार, झींझक के परजनी गांव के उमेशचंद्र की ससुराल भोगनीपुर के परहेरा गांव में है। एक सप्ताह पहले रक्षाबंधन के कारण उनकी गर्भवती पत्नी मायके आई थीं। दो दिन पहले पत्नी पुष्पा को वापस लेने उमेश भी भोगनीपुर पहुंच गए थे। बीते दिवस पत्नी की तबीयत बिगडऩे पर उन्होंने एंबुलेंस बुलाकर पत्नी को झींझक के अस्पताल पहुंचाना चाहा। रास्ते में पुखरायां में मंडी क्रासिंग का गेट बंद होने के कारण जाम लगा था। एक ट्रेन निकलने के बावजूद गेट नहीं खुला। इसी दरम्यान एंबुलेंस के पीछे भी तमाम गाडिय़ां खड़ी होती गईं। कुल मिलाकर 45 मिनट से ज्यादा गेट बंद रहा, इस दौरान चार ट्रेन को पास कराया गया। जाम में फंसी एंबुलेंस में पत्नी पुष्पा को प्रसव पीड़ा से तड़पते देखकर उमेश ने गेटमेन से हाथ जोडक़र एंबुलेंस को रास्ता देने का आग्रह किया, लेकिन उसने नियम-कायदों के कारण गेट खोलने से इंकार कर दिया।


दूसरे वाहनों की महिलाओं ने कराया पुष्पा का प्रसव

कोई रास्ता नहीं देखकर उमेश ने जाम में उलझीं अन्य महिलाओं से मदद के लिए कहा। कुछ महिलाएं आगे बढ़ीं और एंबुलेंस में तड़पती पुष्पा का सुरक्षित प्रसव कराया। पुष्पा ने बेटे को जन्म दिया है। करीब एक घंटे बाद जाम से निकलकर उमेश अपनी पत्नी और नवजात को लेकर झींझक के अस्पताल पहुंचे, जहां डाक्टर्स ने जच्चा-बच्चा को स्वस्थ बताकर घर भेज दिया। इस मामले में सहायक स्टेशन मास्टर देवेंद्र सचान का कहना है कि कंट्रोलर की इजाजत के बगैर गेट को खोलना मुमकिन नहीं होता है। इसके अतिरिक्त आगे-पीछे के स्टेशनों से ट्रेन छूट चुकी थीं, ऐसे में कंट्रोलर भी चाहकर संचालन अवरुद्व नहीं कर सकते थे।

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