40 हजार नाबालिग छात्राओं का हो गया विवाह

विद्यालयों को भेजे गए डाटा में गलतियों की भरमार, छात्राओं के नाम के आगे कुमारी के बजाय लिखा श्रीमती, जानकारी मिलते ही जिला शिक्षाधिकारी ने बोर्ड को दी मामले की जानकारी।

By: Vinod Nigam

Published: 30 Dec 2018, 09:20 AM IST

कानपुर। प्रदेश के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा यूपी बोर्ड परीक्षा को लेकर आएदिन बयान देकर सुर्खियां बटोरते रहते हैं। नकलविहीन परीक्षा के लिए अधिकारियों के पेंच कसते हैं। पर शिक्षा विभाग के अधिकारी उनके दामन को दागदार बनाने में तुले हैं। ऐसा ही एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां यूपी बोर्ड ने दसवीं और बारहवीं की करीब 40 हजार नाबालिग छात्राओं का घर बैठे विवाह करा दिया। इनके नाम के आगे कुमारी के बजाए श्रीमती लिख दिया गया है। स्कूलों में बोर्ड की तरफ से भेजी गई सूची देखने के बाद सनसनी फैल गई। मामले की जानकारी लगते ही डीआइओएस सतीश तिवारी ने जांच की तो मामला सही पाए जाने पर ठीकरा बोर्ड के सिर फोड़ते हुए कहा कि बोर्ड सचिव को यह जानकारी दे दी गई। जल्द ही यह गलती ठीक करा दी जाएगी।

छात्राएं परेशान
प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद यूपी बोर्ड परीक्षा को नकलविहीन बनाने के लिए कई कड़े कदम उठाए गए। जिले में 145 परीक्षा केंद्र बनाए गए। साथ ही केंद्रों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों के अलावा सचल दस्ते व पुलिस बल की तैनाती के साथ परीक्षाएं सम्पन्न कराए जाने के आदेश दिए गए। लेकिन यूपी बोर्ड के अधिकारियों ने कक्षा दसवीं और बारहवीं की करीब 40 हजार नाबालिग छात्राओं के नाम के आगे श्रीमती लिख दिया। तकरीबन सभी विद्यालयों की सूची का यही हाल है। मामले की जानकारी जब छात्राओं और उनके परिजनों को हुई तो उन्होंने विरोध जताते हुए डीआइओएस सतीश तिवारी सें शिकायत क रनाम ठीक कराए जाने की मांग की।

बोर्ड की गलती
वहीं स्कूलों के शिक्षकों ने इसे बोर्ड की बड़ी लापरवाही करार दिया है। शिक्षकों का कहना है कि भविष्य में भले ही इस गलती को सुधार दिया जाए, लेकिन डाटा में श्रीमती फीड होने की वजह से इस बात की संभावना बेहद ज्यादा है कि छात्राओं की अंकतालिका और प्रवेश पत्र में भी यह गलती दोहराई जाएगी। जिसने भी ये गलती की है उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। शिक्षक अशोक कुमार ने बताया कि उनकी स्कूल की पांस सौ छात्राओं के नाम के आगे श्रीमती लिखा है। अब इसे बदलने का कार्य बोर्ड को करना है।

गलतियों की भरमार
परीक्षा केंद्रों के अलावा स्कूल में आई सूची में गलतियों की भरमार है। जबकि परीक्षा की तिथि 7 फरवरी को महज दो माह ही शेष बचें हैं। ऐसे में शिक्षक भी खासे परेशान है। शिक्षकों ने बताया विद्यालयों में छात्र-छात्राओं का जो डाटा भेजा गया है, इसमें गलतियों की भरमार हैं। शिक्षकों ने कहा कि कुछ ही दिन के बाद प्रवेश पत्र व अन्य दस्तावेज आने की बारी है। उससे पहले सभी गलतियां अगर ठीक नहीं की गई तो परीक्षा के बाद छात्राओं की मार्कशीट में अनेक कमियां पाई जा सकती हैं।

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