बंदी की ओर कानपुर का चमड़ा उद्योग! सरकार ने ही चोट दी, सरकार ही लगाएगी मरहम

कुंभ समाप्त हो चुका है, लेकिन अब भी उन्नाव, शुक्लागंज और कानपुर की सैकड़ों टेनरियों बंद हैं, उन्हें 15 मार्च का इंतजार है

By: Hariom Dwivedi

Published: 09 Mar 2019, 04:14 PM IST

पत्रिका इन्डेप्थ स्टोरी

महेंद्र प्रताप सिंह
कानपुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को यूपी की उद्योग नगरी कानपुर में थे। यहां उन्होंने तमाम परियोजनाओं की शुरुआत की। नामुमकिन को मुमकिन में बदलने का वादा किया। कानपुर का वैभव लौटाने की बात की। 1751.63 करोड़ की भारी-भरकम राशि से मां गंगा के निर्मलीकरण की बात भी की गयी। सीईटीपी, एमएलडी,एसटीपी, आईएंडडी जैसे तमाम भारी भरकम शब्दों का इस्तेमाल प्रधानमंत्री ने अपने भाषणों में किया। अब जबकि उद्घाटन और शिलान्यास के फूल मुरझाने लगे हैं यहां के कारीगर और उद्योगपति एक ही सवाल कर रहे हैं कि क्या कानपुर का वैभव लौटेगा। बंद पड़ी टेनरियां फिर से चालू हो सकेंगी।

कुंभ समाप्त हो चुका है। लेकिन, अब भी उन्नाव, शुक्लागंज और कानपुर की सैकड़ों टेनरियों बंद हैं। उन्हें 15 मार्च का इंतजार है। तब तक इनकी बंदी का सरकारी आदेश है। इस बीच इनका करोड़ों रुपए के निर्यात आर्डर कैंसिल हो चुका है। फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि गंगा सफाई के नाम पर सरकार ने कानपुर के चमड़ा उद्योग पर सबसे बड़ी चोट की है। यहां का चमड़ा उद्योग मरने के कगार पर है। तमाम उद्यमी अब तो यह उम्मीद भी छोड़ चुके हैं कि उनकी बंद पड़ी फैक्ट्रियां फिर से चालू भी होंगी। वजह साफ है। लंबे समय से बंदी की वजह से मशीनों में जंग लग चुका है। कच्चा माल सड़ गया है। मजदूरों और कारीगरों ने नया धंधा अपना लिया है। नवंबर से बंद फैक्ट्रियों को फिर से चालू करने के लिए बड़ी पूंजी भी नहीं है।

तरह-तरह के सरकारी प्रतिबंध
कानपुर के चमड़ा उद्योग की बंदी की बड़ी वजह गंगा हैं। क्योंकि चमड़ा उद्योग गंगा को प्रदूषित कर था। इसलिए यहां के लेदर उद्यमियों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी),जलनिगम और गंगा की सफाई से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों ने एक साथ हमला बोला। तरह-तरह के प्रतिबंध लगाए। नियम-कानून बनाए। इससे टेनरियों का कारोबार प्रभावित हुआ। जाजमऊ और अन्य इलाकों में लगी इकाइयों को महंगे प्रदूषण नियंत्रण प्लांट लगाने पड़े।

आधी क्षमता पर चल रहीं टेनरियां घाटे में
जाजमऊ इलाके की 400 टेनरियां हैं। इनमें से सवा सौ से अधिक पहले से ही बंद हैं। यूपी सरकार के आदेश के बाद जाजमऊ की करीब 250 टेनरियां पिछले कई महीनों से 50 फीसदी से कम क्षमता पर चलायी जा रही हैं। इसकी वजह से वह तगड़े घाटे में आ गयी हैं। बंद पड़ी इकाइयों को बिजली, सफाई मशीनों के रखरखाव आदि के लिए लगभग 10 लाख रुपये प्रति माह का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।

पीएम से उम्मीदें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्मल गंगा के लिए 1751.63 करोड़ की परियोजनाओं का शुभारंभ किया है। इस राशि से उन्नाव, कानपुर और शुक्लागंज की व्यापक सीवरेज योजना बनायी जाएगी। कानपुर की टेनरियों के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगेंगे। पंखा और जाजमऊ में मौजूदा एसटीपी का पुर्नवास होगा। इससे गंगा साफ होंगी। जाहिर है यह सब इंतजाम इसलिए हुआ ताकि गंगा में टेनरियों का पानी उपचारित होकर जा सके। प्रधानमंत्री ने अपने भाषणों के जरिए टेनरी से जुड़े उद्योगपतियों और श्रमिकों को यह बताने की कोशिश की है कि वह उनके घावों पर मरहम लगाने आए हैं। उम्मीद है पीएम का भाषण परियोजनाओं के पूरा होने पर यकीन में बदलेगा।

12,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
-कानपुर के चमड़ा उद्योग में करीब एक लाख लोग काम करते हैं। हजारों दैनिक वेतनभोगी लंबे समय तक खाली बैठे थे। अब वे कहीं और काम कर रहे हैं। 12,000 करोड़ के निर्यात आर्डर रद्द हो गए हैं।
इफ्तिखारुल अमीन,उपाध्यक्ष,उप्र लेदर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

-टेनरियों को कई रासायनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। एकाएक बंदी से कच्चा माल बेकार गया। लोहे और लकड़ी के ड्रम या तो जंग से खराब हो गए या सड़ गए। सिर्फ तीन-साढ़े तीन महीने में ही जाजमऊ की टेनरियों का ढाई हजार करोड़ प्रति महीने से ज्यादा का हुआ है।
-हफीजुर्ररहमान उर्फ बाबू भाई,चमड़ा कारोबारी

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