महिलाओं के खेत में हल चलाते ही गोपालपुर में अंधेरा छाया

Vinod Nigam

Updated: 25 Jun 2019, 12:27:13 AM (IST)

Kanpur, Kanpur, Uttar Pradesh, India

कानपुर। पूरा जून का महिना निकल गया और दूर-दूर तब बादल नजर नहीं आ रहे थे। अन्नादाता आकाश की तरफ टकटकी लगाए थे महिलाएं भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजा-पाठ कर रही थीं, बावजूद मेघ बरस नहीं रहे थे। जिसके कारण मर्दनपुर के गोपालपुर गांव की महिलाएं हाथ में हल थाम कर खेत की तरफ निकल पड़ी। महिलाओं ने खेतों में जैसे ही हल चलाया और ...कारे बदरा पानी दे, पानी दे गुरधानी दे...गगरी है छुछी बेल है प्यासे गीत गाए, वैसे ही आसमान में काले बादल मंडराने लगे। कुछ देर के बाद झामझम बारिश होने लगी। करीब दो घंटे तक रूक-रूक बारिश होने से महिलाओं के चेहरे में मुस्कान आ गई।

फिर होने लगी बारिश
बारिश के लिए क्षेत्र में टोने-टोटके शुरू हो गए हैं। पानी बरसे इसके लिए कहीं भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजा-पाठ हो रहा था तो गोपालपुर गांव की सरला देवी, मिथलेश पाल, ननकी देवी, बिट्टन सहित अन्य महिलाएं सोमवार को पूर्वजों की परंपरा निभाते हुए खेतों में हल चलाया। मेघ गीत गुनगुनाए तो भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से पूजा की। महिलाओं के तप से इंद्र प्रसन्न हो गए और गोपालपुर के अलावा कानपुर में झमाझम बारिश हुई, जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे।

मेढ़क भी करनें लगे उछल कूद
पिछले दो माह से गर्मी के कारण इंसान और बेजबान हलकान थे। प्रचंड गर्मी और लू के चलते कई लोग दम तोड़ चुके थे, तो वहीं वन्यजीव भी प्यास के चलते अपनी जान गवां रहे थे। महिलाओं के तप से बारिश हुई और सूखे तालाब, झील और कुओं में पानी आ गया तो मेढ़क में टर्र-टर्र की आवाज लगानें लगे तो मोर भी जमकर थिरके। मौसम सुहाना हुआ तो आमशहरी सड़क पर निकले और बारिश का आन्नद उठाया।

..तो आता है मानसून
सरला देवी बताती हैं कि मान्यता है कि अगर महिलाएं खेतों में हल चलाएं तो मानसून आता है। क्योंकि इससे भगवान इंद्र खुश होकर किसानों के लिए सबसे मूलवान वस्तु पानी की व्यवस्था कराते हैं। सरला कहती हैं कि उनका जन्म हमीरपुर जिले में हुआ था और गोपालपुर उनकी ससुराल है। बताती हैं, बुंदेलखंड में अच्छी बारिश के लिए महिलाएं जंगल में जाकर गाकड (बाटी) बनाती हैं। उसे खुद और पूरे परिवार के साथ मिल बांटकर खाती है। पूजा पाठ भी करवाया जाता है। कहती हैं, इससे इंद्र देव खुश हो जाते हैं और अच्छी बारिश होती।

मानसून पर निर्भर है खेती
सरला के पति कहते हैं कि हमारा देश कृषि पर आधरित है। यहां बारिश का अहम महत्व है। लोगों की जीविका, देश की कृषि व्यवस्था कृषि पर आश्रित है। ऐसे में हमारे देश में बारिश का खास स्थान है। उसकी पूरी अर्थव्यवस्था बारिश से जुड़ी हुई है। मानसून की स्थिति यहां अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। हम किसान मानसून के हिसाब से अपनी खेती करते है। चुंकी यहां किसानों को सिंचाई के लिए वर्षा पर निर्भर होना पड़ता है। इसलिए किसान बारिश के लिए तरह-तरह के टोटके कर मेघ को मनाते हैं।

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