सरसैया घाट पर बेटियों ने पिंडदान कर पुरखों को दिलाया मोक्ष

Hariom Dwivedi

Publish: Sep, 17 2017 02:31:12 (IST)

Kanpur, Uttar Pradesh, India
सरसैया घाट पर बेटियों ने पिंडदान कर पुरखों को दिलाया मोक्ष

तमाम धारणाओं और रुढ़िवादी परंपराओं को पीछे छोड़ते हुए सरसैया घाट पर सैकड़ों बेटियों ने अपने पुरखों को मोक्ष दिलाया

कानपुर. तमाम धारणाओं और रुढ़िवादी परंपराओं को पीछे छोड़ते हुए सरसैया घाट पर सैकड़ों बेटियों ने अपने पुरखों को मोक्ष दिलाया। पितृपक्ष पर पुरखों को पिंडदान के लिए रविवार सुबह से ही गंगा तट पर आधी आबादी की की भारी भीड़ जुटने लगी थी। महिलाओं ने अपने पुरखों की आत्मा की शांति के लिए विधिवत पूजा की व दान-दक्षिणा देकर सुख-समृद्धि की कामना की। तर्पण करने वाली लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. प्रभा अवस्थी ने इस मौके पर कहा कि जब माता गौरी को जनेऊ अर्पित किया जा सकता है और महिला या बालिका जनेऊ धारण भी कर सकती है तो आज के पुरुष प्रधान समाज में महिलाएं अपने पूर्वजों और पुरखों का तर्पण और पिंडदान क्यों नहीं कर सकती? हमें रुढ़िवादी परम्परा को तोड़कर आगे बढ़ना है।

मान्यता है कि पितृपक्ष में देवलोक सें पुरखों की आत्मा घरों में प्रवेश करती है। पितृपक्ष में पुरखों का तर्पण व आराधना करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। इसी के तहत आज सरसैया घाट पर सैकड़ों महिलाओं ने पूर्वजों का तर्पण कर पिंडदान किया। 'युग दधीचि देहदान अभियान' संस्था और 'बेटी बचाओ अभियान' संस्था के द्वारा किये गये इस आयोजन में महिलाओं और लड़कियों ने अपने माता-पिता, भाई और अजन्मी बेटियों और पूर्वजों का श्राद्ध किया।

आत्मा की शान्ति और मुक्ति के लिए प्रार्थना
इस श्राद्ध और तर्पण में उन्हीं महिलाओं और लड़कियों ने भाग लिया, जिनके घर परिवार में श्राद्ध करने के लिए कोई भी पुरुष नहीं है। महिलाओं और लड़कियों ने पूरी वैदिक रीति रिवाज और हिन्दू कर्मकांड विधान के मुताबिक़ अपने पूर्वजों और परिवारीजनों को पिंड अर्पित किया और स्नान अर्घ्य आदि देकर उनकी आत्माओं की शान्ति और मुक्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। बाद में श्राद्ध करके उन्हें उनका प्रिय भोग भी अर्पित किया।

स्त्री-पुरुष कर सकते हैं कर्मकांड
महिलाओं का मानना है कि आज के पुरुष प्रधान समाज में नारी किसी भी रूप में पुरुषों से पीछे नहीं है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिनके घर या परिवार में कोई पुरुष नहीं, उनके पुरखों या पूर्वजों को आखिर कौन पानी देगा? इसलिए ऐसी महिलाओं को आगे आकर अपने पूर्वजों और परिजनों का अपने हाथों से श्राद्ध और तर्पण करना चाहिए। युग दधीचि के आयोजकों का कहना है कि नारी और बेटी की महत्ता बताने के लिए संस्था हमेशा ऐसे कार्यक्रम करती रही है और आगे भी करती रहेगी।

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