डब्ल्यूआरआई की रिपोर्ट :- पैदल चलने के मामले में कानपुर वाले सबसे आगे

दूसरे नंबर पर कोलकाता और तीसरे पर इंदौर, सरकारी बसों के इस्तेमाल में मुंबई वाले अव्वल

Alok Pandey

September, 1312:52 PM

Kanpur, Uttar Pradesh, India

आलोक पाण्डेय

कानपुर. साइकिल दौडऩे या पैदल चलने के मामले में कनपुरियों का जोड़ नहीं है। विश्व की नामचीन संस्था डब्ल्यूआरआई यानी वल्र्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (विश्व संसाधन संस्थान) के सर्वे में साबित हुआ है कि देश में सबसे ज्यादा कानपुर के लोग पैदल चलते हैं। निजी वाहनों की सवारी को पसंद करने वाले कनपुरिए टैंपो-आटो-बस जैसे सार्वजनिक वाहनों में सफर से परहेज के कारण ही ज्यादा पैदल चलते हैं। पैदल चलने के मामले में देश में कोलकाता दूसरे, जबकि इंदौर तीसरे नंबर पर है। कोच्चि और पुणे के बाशिंदे सबसे कम पैदल चलते हैं। डब्ल्यूआरआई की रिपोर्ट में भारत में सार्वजनिक परिवहन की बदतर हालत के बारे में भी जिक्र है।


रोजाना 5 किमी पैदल चलते हैं 60 फीसदी कनपुरिए

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि निजी वाहनों के शौकीन कनपुरिए रोजमर्रा की जिंदगी में कार का इस्तेमाल कम करते हैं। ऐसे में छोटी दूरियों के लिए सवारी के बजाय पदयात्रा करते हैं। पदयात्रा की मजबूरी का प्रमुख कारण शहर का ट्रैफिक जाम बताया गया है। रिपोर्ट कहती है कि रोजाना 60 फीसदी नागरिक लगभघ 5 किलोमीटर पैदल चलते हैं। इसी प्रकार कोलकाता के 55 फीसदी, जबकि इंदौर के 54 फीसदी लोग पैदल चलना पसंद करते हैं।


कानपुर को सरकारी बसों से परहेज, मुंबई सबसे आगे

डब्ल्यूआरआई की यह रिपोर्ट देश के प्रमुख 30 शहरों में सार्वजनिक परिवहन सुविधा को परखने के बाद तैयार हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कानपुर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दशा बेहद खराब है। इसी कारण शहर के 98 फीसदी लोगों को सरकारी बसों से परहेज है। इसी प्रकार लखनऊ, सूरत और नागपुर के लोग भी सरकारी बसों को देखकर नाक-भौं सिकोड़ते हैं। दूसरी ओर उम्दा सेवाओं के कारण मुंबई में 48 फीसदी लोग बेस्ट की बसों में सफर करना पसंद करते हैं। सार्वजनिक परिवहन को पंसद करने वालों में दूसरा नंबर कोच्चि, जबकि तीसरा नंबर कोलकाता का है। (चार्ट संलग्न है)


दिल्ली वालों को कार पसंद है

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कार से चलने वालों की संख्या देश में सबसे ज्यादा है। यहां मेट्रो सुविधा के बावजूद दफ्तर जाने के लिए करीब 13 फीसदी लोग निजी कारों का इस्तेमाल करते हैं। दिल्ली के बाद कार से चलने वालों के मामले में बेंगलुरु और जयपुर का नंबर है। दिल्ली में करीब 28 फीसदी लोग सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं, जबकि पैदल चलने वालों की संख्या 38 फीसदी है।


सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी घटी

डब्ल्यू आरआई रिपोर्ट के मुताबिक, देश में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी तेजी से कम हुई है। आजादी के वक्त देश के कुल वाहनों में सरकारी बसों की हिस्सेदारी 11 फीसदी थी, जोकि वर्ष 2016 में घटकर 1.1 फीसदी रह गई थी। अलबत्ता इस दरम्यान दो-पहिया वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। वर्ष 1951 में देश में दोपहिया वाहन मात्र 8.8 फीसदी थे, जोकि वर्तमान समय में 73 फीसदी से कुछ ज्यादा हैं।


बसों के मामले में चीन से बहुत पीछे हैं भारत

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में 1.37 करोड़ की आबादी पर 6.8 लाख बसें हैं, जबकि भारत में 1.30 करोड़ की आबादी पर सिर्फ 4.10 लाख बस हैं। रिपोर्ट का दावा है कि देश में राज्य परिवहन की बसों से रोजाना 8 करोड़ यात्री सफर करते हैं, जबकि रेल के जरिए 2.5 करोड़ सफर करते हैं। करीब 16 करोड़ लोग प्राइवेट बसों से अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं।


डब्ल्यूआरआई - एक वैश्विक नामचीन संस्थान

डब्ल्यूआरआई यानी वल्र्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट दुनिया के 60 देशों में सर्वे-सर्वेक्षण का काम करने वाली संस्था है। संस्था का ब्राजील में मुख्यालय है, जबकि ब्रिटेन, भारत, चीन, अमेरिका, इंडोनेशिया, मैक्सिको, इथोपिया, कांगो, नीदरलैंड, टर्की में भी दफ्तर हैं।

 

 

शहर पब्लिक ट्रांसपोर्ट पैदल/साइकिल रिक्शा/ई-रिक्शा-आटो दोपहिया कार


मुंबई 48 34 05 07 05

दिल्ली 28 38 03 17 13

चेन्नई 27 34 03 27 07

कोलकाता 33 55 03 05 03

जयपुर 16 32 04 34 07

इंदौर 26 54 03 07 10

भोपाल 24 39 04 21 12

लखनऊ 04 50 07 31 06

कानपुर 02 60 08 23 03

बेंगलुरू 28 34 03 22 10

हैदराबाद 21 38 04 28 07

अहमदाबाद 11 45 06 33 05

सूरत 03 46 18 31 03

पुणे 18 32 04 34 07

नागपुर 06 52 03 34 03

कोच्चि 40 27 03 22 06

(आंकड़े प्रतिशत में)

 

आलोक पाण्डेय
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