script20 days after the road accident, the lamp of the house was extinguishe | सड़क हादसे के 20 दिन बाद बुझा घर का चिराग, पहले बहनोई और ममेरे भाई की गई थी जान | Patrika News

सड़क हादसे के 20 दिन बाद बुझा घर का चिराग, पहले बहनोई और ममेरे भाई की गई थी जान

20 days after the road accident, the lamp of the house was extinguished, the life of brother-in-law and maternal brother had gone earlier
20 दिन पहले घने कोहरे में हुए सड़क हादसे में घायल युवक की मौत

तीन जनवरी को इसी दुर्घटना में गई थी बहनोई और ममेरे भाई की जान

करौली

Published: January 23, 2022 12:39:38 am

हिण्डौनसिटी. करौली मार्ग पर फुलवाडा गांव के समीप स्थित कोमल होटल के पास 20 दिन पूर्व हुए सड़क हादसे में घायल युवक की शनिवार को मृत्यु हो गई। राजकीय जिला अस्पताल में सदर थाना पुलिस ने पोस्टमार्टम करा शव परिजनों को सौंप दिया। मृतक बाढ करसौली गांव निवासी मंतेश (22) पुत्र धनसिंह जाटव है।विगत तीन जनवरी को हुई इस दुर्घटना में मृतक के बहनोई व ममेरे भाई की भी जान चली गई थी।
सड़क हादसे के 20 दिन बाद बुझा घर का चिराग, पहले बहनोई और ममेरे भाई की गई थी जान
सड़क हादसे के 20 दिन बाद बुझा घर का चिराग, पहले बहनोई और ममेरे भाई की गई थी जान

पुलिस के अनुसार तीन जनवरी को सुबह करीब 9 बजे करौली मार्ग पर फुलवाड़ा गांव के पास घने कोहरा होने की वजह से बाइक सवार तीन जनों को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। हादसे में बाढ करसौली निवासी मंतेश के अलावा गुढ़ला गांव निवासी उसका बहनोई हीरो (26) व बडकापुरा निवासी ममेरा भाई हेमू (16) गंभीर रुप से घायल हुए थे। लेकिन जयपुर ले जाते समय हीरो और हेमू की मौत हो गई थी। जबकि मंतेश का जयपुर के एसएमएस अस्पताल में उपचार चल रहा था।
परिजनों ने बताया कि 18 जनवरी को कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण चिकित्सकों ने मंतेश को अस्पताल से छुट्टी दे दी। इस पर परिजन उसे घर ले आए। जहां शनिवार को सुबह अचानक उसकी तबियत फिर से बिगड़ गई। परिजन अस्पताल लेकर पहुंचते, इससे पहले ही उसकी मौत हो गई।
पांच बहनों का इकलौता भाई था मंतेश-
परिजनों ने बताया कि मंतेश पांच छोटी बहनों का इकलौता भाई था। माता-पिता और छोटी बहनें उसकी शादी क सपने संजो रहे थे। वह पढाई के साथ-साथ मेहनत मजदूरी कर परिवार चलाने में पिता की मदद भी करता था। लेकिन इकलौते बेटे की मौत के बाद उसके पिता धनसिंह व मां जावित्री बार-बार बेसुध हो रहे थे। छोटी बहनों का भी रो-रो कर बुरा हाल था। परिजनों के रुदन को देख अस्पताल में मौजूद ग्रामीणों की आंखों से भी रुलाई फूट रही थी। गांव में भी दिन भर शोक व्याप्त रहा।

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