12 माह में जारी हुईं 37 निर्माण स्वीकृतियां, नियम बगैर बनाए 150 व्यावसायिक और आवासीय भवन

37 construction approvals issued in 12 months, 150 commercial and residential buildings without making rules
- बिना नक्शा और अनुमति के बन रहे मकान, मॉल और दुकान
-परिषद को हर साल लाखों रुपए राजस्व की चपत

By: Anil dattatrey

Published: 09 Apr 2021, 11:51 PM IST


हिण्डौनसिटी. पिछले एक साल में शहर में महज 37 भवनों का ही निर्माण हुआ है! इनमें से 30 आवासीय और 7 व्यवसायिक निर्माण कराए गए हैं। ऐसा हम नहीं, बल्कि नगरपरिषद के आंकडे कह रहें है। सरकारी आंकडों की मानें तो बीते वित्तीय वर्ष में शहरी विकास थम सा गया है। जबकि हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। कोरोना काल में लोग जब तंगहाली से जूझ रहे थे, तब कुछ नगरसेठ और भूमाफिया नियम-कायदों को ताक पर रखकर सैकडों आवासीय एवं व्यावसायिक भवन निर्माण कराने में व्यस्त थे, वह भी नगरीय निकाय प्रशासन की बिना परमिशन व नक्शा स्वीकृत कराए। अवैध निर्माण अब भी धड़ल्ले से चल रहें है। जिससे एक तरफ नगर परिषद प्रशासन को हर साल लाखों रुपए का राजस्व घाटा झेलना पड रहा है, वहीं दूसरी तरफ अनियोजित बसावट के कारण जिले के सबसे बड़े शहर की सूरत बिगड़ती जा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी खुद स्थिति से वाकिफ होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहें हैं। पिछले कई साल से ऐसा ही चल रहा है।

नक्शा पास होने के बाद मनमर्जी से हो रहे निर्माण-
स्वयं का मकान हर व्यक्ति का सपना होता है। मकान बनाने से पहले काफी तैयारी करता है। वह प्राइवेट इंजीनियर से नक्शा भी बनवाता है। नियमानुसार नक्शे को नगर परिषद से स्वीकृत कराना अनिवार्य होता है। लेकिन पैसे बचाने के लालच में लोग नगरपरिषद से नक्शे को पास कराने के बजाए बिना परमिशन के मनमर्जी से भवन निर्माण कार्य शुरु कर देते हैं। कुछ लोग स्वीकृत नक्शे के अनुसार काम कराने के बजाय निर्माण का दायरा बढ़ाकर सडक़ व आसपास की खाली जमीन पर भी मकान और दुकान खड़े किए जा रहे हैं। ऐसे में नक्शा पास कराना और नहीं कराना बराबर हो जाता है।

15 वर्ष में शहर में धल्ले से हुए अवैध निर्माण-
औद्योगिक इकाईयां स्थापित होने व एजूकेशन हब के रुप में पहचान बनने के बाद से लगातार हिण्डौन का विस्तार तेजी से हो रहा है। बीते 15 साल में शहर के चारों ओर करीब तीन से चार किलोमीटर तक के दायरे में नई कॉलोनियां बस गई है। वर्तमान में कस्बे का विस्तार महवा रोड पर क्यारदा कलां बालाजी तक, करौली रोड पर फुलवाड़ा गांव तक, बयाना रोड़ पर चौबे के बांध तक तथा लपावली रोड़ पर कृषि उपज मंडी से आगे बढ़ता जा रहा है। इन मार्गों पर हर साल सैकडों की संख्या में नए मकान और व्यावसायिक भवन बन रहे हैं। भूखंड पर निर्माण कराने से पूर्व नियमानुसार पट्टा लेने के बाद नक्शा व निर्माण स्वीकृति नगर परिषद से लेनी होती है। लेकिन 85 फीसदी से भी ज्यादा लोग भवन निर्माण से पहले नगर परिषद से परमिशन और नक्शा पास नहीं कराते हैं।

पंजीयन शुल्क व संपत्तिकर का नुकसान-
दरअसल अनुमति शुल्क जमा कराने के बाद भवन पंजीकृत हो जाता है। जिससे संपत्तिकर की वसूली होने लगती है। यही वजह है कि नक्शा पास कराने का शुल्क और संपत्तिकर को बचाने के चक्कर में ज्यादातर लोग बिना परमिशन मनमाफिक तरीके से मकान निर्माण करा लेते हैं। नपा क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी नगर परिषद के अधिकारियों की है। जब नक्शा स्वीकृत नहीं होगा, तो न तो परमिशन शुल्क मिलेगा और न ही आगे चलकर संपत्तिकर की राशि मिलेगी। इससे नगरीय निकाय को हर साल लाखों रुपए के राजस्व की चपत लग रही है।

आरोप- सुविधा शुल्क लेकर खामोश हो जाते हैं जिम्मेदार-
भवन निर्माण करा रहे लोगों का कहना है कि नगर परिषद से मकान की परमिशन आसानी से नहीं मिलती है। आवेदकों को अधिकारी -कर्मचारी कार्यालय के कई चक्कर कटवाते हैं। इसी झंझट के चलते लोग भवन बनाने से पहले अनुमति लेने से बचते हैं। यह भी शिकायत है कि बिना परमिशन भवन निर्माण के मामलों में कार्रवाई के नाम पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी सुविधा शुल्क लेकर खामोश हो जाते हैं।

स्वीकृति की शर्तों का नहीं हो रहा पालन-
भवन बनाने से पूर्व कुछ लोग नक्शा पास कराने की अनिवार्यता को देखते हुए नक्शा पास तो करा लेते हैं, लेकिन नगर परिषद द्वारा परमिशन के लिए लगाई गई शर्तों का पालन कराने पर जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। वहीं आमतौर पर भवन
निर्माता को भी इस बात से कोई सरोकार नहीं होता है कि मकान बनाते समय कहां कितनी जगह छोडना जरूरी है, पानी का निकास कहां से करना है, छत का पानी कहां गिरना चाहिए। लोगों की कोशिश रहती है कि उनकी एक इंच जगह भी नहीं छूटनी चाहिए। और तो और आसपास की सरकारी जगह को भी अपने हिस्से में कर लिया जाता है। इस लालच में भवनों के हिस्से सडक़ तक आ जाते हैं, जिससे दूसरे लोगों के लिए कई समस्याएं पैदा होती है।

फैक्ट फाईल-
वित्तीय वर्ष-2020-21
-37 भवन निर्माण स्वीकृति नगरपरिषद द्वारा हुई जारी।
- 30 निर्माण स्वीकृति आवासीय निर्माण के लिए की गई जारी।
-07 निर्माण स्वीकृति व्यवसायिक निर्माण के लिए की गई जारी।
-150 से ज्यादा निर्माण बिना स्वीकृति के हो गए।

बिना परमिशन भवन निर्माण कराने पर करेंगे कार्रवाई-
गत दिवस ही पदभार ग्रहण किया है। जल्द ही टीमें गठित कर शहर में बिना नक्शा पास कराए भवन निर्माण कराने वालों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए जाएंगे। साथ ही लोगों को नक्शा पास कराने व निर्माण स्वीकृति लेकर ही भवन निर्माण कराने के लिए पाबंद किया जाएगा-
कीर्ति कुमारी कुमावत, आयुक्त, नगर परिषद, हिण्डौन सिटी।

Anil dattatrey Reporting
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