एसीबी ने दो अधिकारियों को दो हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथो दबोचा,ग्राम विकास अधिकारी व कनिष्ठ तकनीकी सहायक ने रिश्वत ली थी

rajasthan patrika hindi news.com

By: vinod sharma

Published: 10 Jan 2019, 07:11 PM IST


करौली. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने करौली पंचायत समिति के कनिष्ठ तकनीकी सहायक विशन सिंह चौधरी और जहांगीरपुर पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी महेश चंद शर्मा को दो हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोच लिया है। दोनों आरोपियों को एसीबी ने गिरफ्तार कर लिया है। एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूरसिंह ने बताया कि जहांगीरपुर निवासी परिवादी बदन सिंह पुत्र परसादी जाट ने परिवाद दर्ज कराया। परिवाद में बताया कि कनिष्ठ तकनीकी सहायक व पंचायत सचिव अपना खेत, अपना काम योजना के कार्यो की माप पुस्तिका भरने के बदले चार हजार रुपए की रिश्वत मांग रहे हैं। जिस पर एसीबी ने परिवाद का सत्यापन करने के बाद आरोपियों को दबोचने की योजना बनाई। ग्राम विकास अधिकारी ने रुपए के लिए दवाब बनाया। एसीबी ने परिवादी को दो हजार रुपए देकर गुरुवार सुबह ग्राम विकास अधिकारी के करौली के तीन बड़ स्थित घर भेजा, जहां रुपए लेते ग्राम विकास अधिकारी को एसीबी ने दबोच लिया। पूछताछ में ग्राम विकास अधिकारी ने बताया कि तकनीकी सहायक के लिए दो हजार रुपए लिए हैं। इस पर एसीबी ग्राम विकास अधिकारी को पंचायत समिति लेकर आई तथा तकनीकी सहायक को रुपए देने को कहा। इस दौरान तकनीकी सहायक ने ग्राम विकास अधिकारी से दो हजार रुपए लिए। जिस पर एसीबी ने दोनों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों के हाथ धुलाए गए, हाथों से गुलाबी कलर आया।
मजदूरी में से मांगी रिश्वत
परिवादी बदन सिंह जाट ने बताया कि अपना काम, अपना खेत योजना में मजदूरों के माध्यम से काम कराया गया। २० मजदूरों की मस्टरोल भरकर ग्राम विकास अधिकारी को सौंपी गई। इस मस्टरोल की माप पुस्तिका भरने के लिए चार हजार रुपए की मांग की जा रही थी। माप पुस्तिका के अभाव में मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल पाई। इस बारे में दोनों अधिकारियों से रिश्वत नहीं मांगने का आग्रह भी किया। लेकिन दोनों नहीं माने। इस कारण दोनों की शिकायत एसीबी में दर्ज कराई गई।

मजदूरी में से मांगी रिश्वत
परिवादी बदन सिंह जाट ने बताया कि अपना काम, अपना खेत योजना में मजदूरों के माध्यम से काम कराया गया। २० मजदूरों की मस्टरोल भरकर ग्राम विकास अधिकारी को सौंपी गई। इस मस्टरोल की माप पुस्तिका भरने के लिए चार हजार रुपए की मांग की जा रही थी। माप पुस्तिका के अभाव में मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल पाई। इस बारे में दोनों अधिकारियों से रिश्वत नहीं मांगने का आग्रह भी किया। लेकिन दोनों नहीं माने। इस कारण दोनों की शिकायत एसीबी में दर्ज कराई गई।

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