करौली के आगर्री गांव की पहचान अंबिका माता मंदिर से

करौली के आगर्री गांव की पहचान अंबिका माता मंदिर से
करौली के आगर्री गांव की पहचान अंबिका माता मंदिर से

Vinod Sharma | Updated: 13 Sep 2019, 06:40:26 PM (IST) Karauli, Karauli, Rajasthan, India

करौली. हिण्डौन सिटी रोड पर आगर्री गांव की पहचान (Ambri Mata Temple identified in Agri village of Karauli) १२वीं शताब्दी की मूर्तियों के अलावा पहाडी पर स्थित अंबिका माता के मंदिर से भी है। जिसका निर्माण 8वीं शताब्दी के दौरान किया गया था।

करौली. हिण्डौन सिटी रोड पर आगर्री गांव की पहचान (Ambri Mata Temple identified in Agri village of Karauli) १२वीं शताब्दी की मूर्तियों के अलावा पहाडी पर स्थित अंबिका माता के मंदिर से भी है। जिसका निर्माण 8वीं शताब्दी के दौरान किया गया था। लोक किदवंती तो यह भी है कि श्री कृष्ण के द्वारा रुकमणि के हरण से पहले रुकमणि ने इस मंदिर में देवी की पूजा की थी। हालांकि इसके प्रमाण ग्रामीणों के पास नहीं है। इतिहासकारों के अनुसार आठवीं शताब्दी में आगर्री गांव में यादव व लोधा जाती का बर्चस्व था। अंबिका देवी की पूजा-अर्चना यादव व लोधाओं के द्वारा की जाती थी। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता संतराम मीना बताते है कि इसका प्रमाण यह है कि आज भी गांव में आम बोलचाल की भाषा में लोधा व यादवों का जरूर उल्लेख होता है। खेतों के अहीर वाला व लोधा वाले खेत के नाम से जाने जाते है। इससे संभावना यह है कि अंबिका माता का जुड़ाव श्रीकृष्ण के वंशजों से रहा है।


६५० साल पहले आए मीना जाती के लोग
आठ से 12वीं शताब्दी तक आगर्री में अहीर व लोधा जाती का बर्चस्व था। लेकिन बाद में मीना जाति के लोग आगर्री में बस गए तथा अहीर व लोधा जाति के लोग दूसरे स्थानों पर चले गए। मीना जाति के मच्या गोत्र के लोगों ने अंबिका देवी को कुल देवी के रूप में स्वीकार किया। जिससे क्षेत्र के २७ गांवों में रहने वाले मच्या गोत्र के मीना व राजस्थान, मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश के मच्या गोत्र के मीना दर्शनों के लिए हर साल जरूर आते हैं। इस देवी का आस्था क्षेत्र में फैल रही है।


ग्रामीणों ने मंदिर का कराया जीर्णोद्वार
अंबिका माता का मंदिर पहले पाटौरनुमा था। लेकिन इसकी प्रसिद्धी फैलने पर ग्रामीणों ने मंदिर का जीर्णोद्धार करा दिया है, अब पहाड़ी पर स्थित अंबिका माता का आकर्षक मंदिर दूर से ही दिखाई देता है। यहां पर दूर-दराज से आने वाले संत भी देवी की आराधना करते है। आगर्री गांव की खास बात ये भी है कि इस गांवों की चारों दिशाओं में भगवान हनुमान की प्रतिमाएं भी विराजित है।

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