विकास और समस्याओं के समाधान के लिए बनें जागरूक- कोठारी

विकास और समस्याओं के समाधान के लिए बनें जागरूक- कोठारी
सरकार से नहीं रखें ज्यादा उम्मीद
राजस्थान पत्रिका संवाद सेतु

करौली। राजस्थान पत्रिका के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी ने कहा है कि हमको हर काम के लिए सरकार से उम्मीद छोड़कर स्वयं को आगे आने पड़ेगा। तभी जिले का विकास और समस्याओं का समाधान संंभव है। राजस्थान पत्रिका की ओर से आयोजित संवाद सेतु कार्यक्रम में कोठारी ने कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी करौली जिला पिछड़ा है तो इसके लिए सरकार के साथ हम भी किसी न किसी रूप में दोषी है।

By: Surendra

Updated: 30 Jan 2021, 09:10 PM IST

विकास और समस्याओं के समाधान के लिए बनें जागरूक- कोठारी
सरकार से नहीं रखें ज्यादा उम्मीद
जिले के पिछड़ेपन पर जताई चिंता
राजस्थान पत्रिका संवाद सेतु

करौली। राजस्थान पत्रिका समूह के चैयरमेन और राजस्थान पत्रिका के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी ने कहा है कि हमको हर काम के लिए सरकार से उम्मीद लगाना छोड़कर स्वयं को आगे आने को तैयार होना पड़ेगा। तभी जिले का विकास और समस्याओं का समाधान संंभव है।
करौली जिले की समस्याओं और विकास के मुद्दों पर चर्चा के लिए राजस्थान पत्रिका की ओर से आयोजित संवाद सेतु कार्यक्रम में कोठारी ने कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी करौली जिला पिछड़ा हुआ है तो इसके लिए सरकार के साथ हम भी किसी न किसी रूप में दोषी है। उन्होंने कहा कि समस्याओं के समाधान और हर काम के लिए सरकार की ओर तांकने की आदत बन गई है। हम खुद कुछ नहीं करना चाहते। यह प्रवृति सही नहीं। अपने इलाके की खुद को चिंता करके जागरूक होना होगा। उनको जनप्रतिनिधियों, प्रशासन व सरकार से सवाल-जवाब करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार के भरोसे समस्याओं का समाधान और विकास सम्भव नहीं है।
जिले में पानी की गहराती समस्या पर कोठारी ने कहा कि नेताओं ने चम्बल से पानी लाने का झुनझुना पकड़ा रखा है। इस समस्या का समाधान बिना प्रयास के संभव नहीं है। अगर हम आज शांत रहे तो आने वाली पीढ़ी पलायन को मजबूर होगी।

पत्रिका सदैव साथ
उन्होंने सुझाव दिया कि समस्याओं का विभाजन करके लोगों इस दिशा में प्रयास करने चाहिए। इसके लिए लोग समिति बनाएं। जनप्रतिनिधियों से सवाल करने के साथ हर महीने बैठक करें। उन्होंने बार बार दोहराया कि लोगों को अपने इलाके की समस्याओं के लिए जागरूक तो होना ही होगा। बाहर से विकास करने को कोई नहीं आने वाला। ये चिंता तो आप लोगों को ही करनी पड़ेगी। नई पीढ़ी के लिए आपको अपना मौन तोड़कर आगे आना पड़ेगा। उन्होंने यकीन दिलाया कि हर कदम पर पत्रिका सदैव उनके साथ है। उन्होंने पत्रिका के साथ कार्ययोजना बनाने का आह्वान किया।

पर्यटन की करें पहल
कोठारी ने कहा कि जिले में मदनमोहनजी, कैलादेवी, महावीरजी जैसे देश प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं जहां लाखों लोग आते हैं। विरासत के रूप में अनेक किले हैं लेकिन वो खण्डर होते जा रहे हैं। डांग क्षेत्र में प्राकृतिक स्थान भी हैं लेकिन इतने के बाद भी करौली जिले में पर्यटन को बढ़ावा नहीं मिल पाना अफसोस जनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि सुझाव दिया कि सरकार के भरोसे रहने की बजाय संगठनों को और धार्मिक ट्रस्टों को जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में योजना बनाने की पहल करनी चाहिए।

बढ़ते अपराध शर्मनाक
कोठारी ने कहा कि जिला अपराधों के लिए बदनाम रहा है। डांग क्षेत्र में बढ़ते अपराध और असुरक्षा की स्थिति शर्मनाक है। इस कारण लोग इधर आने से कतराते हैं। उन्होंने सुझाव दिया अपराधारियों पर सामाजिक दबाव बनाने की जरूरत है।

वे बिकाऊ हो गए हैं
जिले की राजनीतिक स्थिति और जनप्रतिनिधियों के दल-बदल को लेकर कोठारी ने कटाक्ष किए। वे बोले कि जिले के जनप्रतिनिधि बिकाऊ हो गए हैं। वे जीतते किसी दल से है और शामिल कहीं और हो जाते हैं। ऐसा करके वे लाखों लोगों का भरोसा तोड़ते हैं। ऐसे नेताओं से क्या विकास की उम्मीद की जा सकती है। 10 वर्ष पहले रेल की योजना स्वीकृत हुई लेकिन आगे नहीं बढ़ी। लौह का भण्डार मिलने के बाद परियोजना ठप पड़ी है। करौली में आया हुआ डिपो चला गया। कोठारी ने कहा सांसद- विधायक काम नहीं करते हैं तो इसके लिए हम ही जिम्मेदार हैं। हम वोट देकर पांच साल के लिए मौन होकर रह जाते हैं। ये उचित नहीं।


संवाद सेतु में ये उठे मुद्दे

करौली. जिले के विकास और मुद्दों को लेकर शुक्रवार को राजस्थान पत्रिका की ओर से वर्युचल आयोजित संवाद सेतु कार्यक्रम में प्रबुद्ध जनों ने जिले के विकास और समस्याओं को लेकर विचार रखे। वे बोले कि पत्रिका द्वारा विकास और जनसमस्याओं के समाधान के जो प्रयास किए जा रहे हैं, वो सराहनीय है। पत्रिका द्वारा करौली जिले की समस्याओं के समाधान की दिशा में यह सार्थक प्रयास है। प्रबुद्धजनों ने इस प्रकार रखें विचार।
विकास के लिए संकल्पित
राजस्थान पत्रिका की ओर से विकास और समस्याओं को लेकर जो मुद्दे उठाए जाते हैं, उनके लिए आभार। पत्रिका हमेशा सामाजिक सरोकारों में आगे रहती है। परिवार की भांति एकजुट होकर क्षेत्र के विकास के लिए काम करने के लिए मैं संकल्पित हंू। करौली-धौलपुर जिले आशान्वित जिलों में शामिल हैं, जहां के विकास और समस्याओं के समाधान के लिए मैं प्रयासरत हूं। धौलपुर-गंगापुरसिटी-वाया करौली रेल लाइन के प्रयास जारी हैं। रेल परियोजना के टेण्डर हो चुके हैं। रेल मंत्रालय की ओर से भूमि अवाप्ति के लिए सूची दी गई है। पिछले एक दशक में करौली जिले की तस्वीर बदल गई है। कई सड़कें स्वीकृत हुई हैं।
डॉ. मनोज राजोरिया, सांसद करौली-धौलपुर

जिले के विकास की चिंता
मैं बैंगलोर में स्र्टाटअप चलाता हूं। इस कार्यक्रम में मुझे जुडऩे का अवसर मिला। मैं चाहूंगा कि करौली जिले में भी स्टार्टअप शुरू हो, ताकि रोजगार की समस्या के समाधान के साथ विकास हो सके। मैं यहां के विकास के लिए चिंतित हूं। इसके लिए योजना बना रहा हूं।
रमाकांत शर्मा, युवा उद्यमी, मूल निवासी कोटरा ढहर, हिण्डौनसिटी


डांग में नहीं पहुंचा विकास
डांग क्षेत्र में विकास नहीं हुआ है। 70 वर्ष बाद भी इलाके के लोग पानी, बिजली, सड़क, चिकित्सा, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। वर्ष 1983 में जब कैलादेवी अभयारण्य घोषित हुआ तो उम्मीद थी कि क्षेत्र में विकास होगा। चिकित्सा के लिए लोगों को टूटी-फूटी सड़कों पर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। डांग क्षेत्र में इंटरनेट की कनेक्टिविटी नहीं है। कार्मिकों के पद रिक्त हैं। कर्मचारी असुविधाओं के कारण रहना और जाना पसंद नहीं करते। सरकार ने इलाका पिछड़ा तो घोषित कर दिया, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
अरूण जिंदल, निदेशक सतत विकास संस्थान, करौली

मिल-बैठकर खोजना होगा समाधान
करौली में समस्याएं बहुत हैं। इनका एक-एक करके समाधान करने की दरकार है। करौली जिले में पर्यटन की विपुल संभावनाएं है, यदि पयर्टन को बढ़ावा दिया जाए तो जिले में रोजगार के नए आयाम स्थापित हो सकेंगे। यह जिला ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से समृद्ध है। करौली के जो लोग बाहर व्यवसाय करते हैं , वे यहां पर इनवेस्ट करें तो यह पहल जिले के विकास में महत्वपूर्ण होगी।
कमलेश शर्मा, मल्टीनेशल कंपनी, संचालक मुम्बई


रेल आए तो हो विकास
करौली में रेल का सपना अधूरा है। 1954 में जब तत्कालीन रेल मंत्री लालबहादुर शास्त्री करौली आए, तब से यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। वर्ष 2010-11 में धौलपुर-गंगापुरसिटी वाया करौली रेल परियोजना स्वीकृति के बाद 2013 में रेल परियोजना का शिलान्यास हुआ, लेकिन आगो काम रुक गया। रेल के अभाव में करौली का विकास थमा हुआ है। रेल परियोजना से पूर्वी राजस्थान के विकास के साथ स्पेशल कॉरीडोर भी विकसित होगा। भारतीय सेना की मांग के अनुरूप एक नया कॉरीडोर मिल सकेगा।
वेणुगोपाल शर्मा, महासचिव रेल विकास समिति करौली

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करौली जिला सैण्ड स्टोन के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन सरकार की खनन नीति से यह उद्योग अपनी पहचान खो रहा है। सरचार्ज और नीतियों के कारण इसको बढ़ावा नहीं मिल रहा। वन क्षेत्र के कारण भी यह उद्योग कम हो रहा है। हिण्डौन रीको में स्लेट की करीब 400 इकाइयां थी, लेकिन सख्त नीति के चलते करीब 200 फैक्ट्रियां बंद हो गईं। हिण्डौन में कंटेनर डिपो बंद है। कच्चा माल की समस्या और नीतियों के कारण मुश्किल हो रही है। जनप्रतिनिधियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। सरकार कहती है कि उद्योग लगाओ, लेकिन इन परिस्थितियों में उद्योग विकसित करना मुश्किल रहा है।
गोपाल शर्मा, अध्यक्ष रीको, हिण्डौनसिटी

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ब्लड बैंक की दरकार
हिण्डौन चिकित्सालय में ब्लड बैंक की दरकार है। यहां विभिन्न संगठनों की ओर से वर्षभर रक्तदान शिविर तो लगाए जाते हैं, लेकिन ब्लड बैंक के अभाव में रक्त को दूसरे अस्पतालों में भेजना मजबूरी है। इस वजह से गंभीर रोगियों को रैफर करना मजबूरी है। अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन नहीं हो पाते। हिण्डौन अस्पताल में ट्रोमा सेन्टर और ब्लड बैंक खुले तो लोगों को राहत मिल सकती है।
अनिल गोयल, हिण्डौन
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चम्बल से मिले पानी तो मिले राहत
जिला आर्थिक दृष्टि से पिछड़ा है। जिले में पेयजल की गंंभीर समस्या है। जो पानी है, उसमें भी फ्लोराइड है। इसके समाधान के लिए चम्बल नदी से पानी लिफ्ट करने की जरुरत है। चम्बल से पानी करौली की भद्रावती नदी के जरिए पांचना बांध और फिर उसे जगर बांध में डाला जाए। पांचना से गंभीर नदी में पानी छोड़ा जाए तो टोडाभीम, नादौती क्षेत्र को फायदा मिल सकेगा। चम्बल नदी से बड़ी मात्रा में बारिश का पानी व्यर्थ बह जाता है।
शिवदयाल मीना, पूर्व जिला प्रमुख व प्रगतिशील किसान

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पर्याप्त हों स्वास्थ्य सेवाएं
हिण्डौन क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं पर्याप्त नहीं है। हिण्डौन चिकित्सालय में ब्लड बैंक पहली आवश्यकता है। हिण्डौन में नशे का व्यापार खूब बढ़ रहा है, जिसकी रोकथाम के लिए नशा मुक्ति केन्द्र की दरकार है। हिण्डौन में आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। आइसीयू विकसित नहीं है। करौली में स्वीकृत मेडिकल कॉलेज को करौली-हिण्डौन के बीच बनाया जाना चाहिए।
डॉ. पुष्पेन्द्र गर्ग, हदृय रोग विशेषज्ञ, हिण्डौनसिटी


खुलें नए विषय, अभयारण्य हो विकसित
वर्ष 1960 में करौली में राजकीय कॉलेज बनने के लम्बे समय बाद भी पीजी स्तर पर मात्र पांच विषय संचालित हैं। यहां पीजी में हिन्दी, कैमिस्ट्री, जूलॉजी विषय की विशेष जरूरत है। कैलादेवी अभयारण्य में बाघों की संख्या बढ़ रही है। अलवर सरिस्का में तो बाघ ले जाए जा रहे हैं, लेकिन कैलादेवी अभयारण्य में तो रणथम्भौर से चलकर खुद ही बाघ आ रहे हैं। गांवों के विस्थापन की कार्रवाई शीघ्र कर इसे विकसित किया जाना चाहिए।
-डॉ. लीना शर्मा, सहआचार्य, राजकीय कॉलेज करौली

जलनिकासी की हो उचित व्यवस्था
जिला मुख्यालय पर बारिश के जल निकास की उचित व्यवस्था नहीं है। प्रतिवर्ष लोगों को समस्या झेलनी पड़ती है। इससे अनेक इलाकों में घरों में पानी भर जाता है। पानी की निकासी के उचित प्रबंध होने चाहिए। शहर में सफाई व्यवस्था भी उचित हो।
अनुपमा गुप्ता, वजीरपुर गेट बाहर करौली

Surendra Bureau Incharge
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