खेत में बोया चना, गिरदावरी में उपजी सरसों

खेत में बोया चना, गिरदावरी में उपजी सरसों

Anil dattatrey | Publish: Apr, 19 2019 06:04:48 PM (IST) | Updated: Apr, 19 2019 06:04:49 PM (IST) Karauli, Karauli, Rajasthan, India

फसल गिरादावरी रिकॉर्ड में गड़बड़ी से परेशान किसान

हिण्डौनसिटी.
किसान के खेत में भले ही चना बोया और काटा, लेकिन राजस्व विभाग की गिरदावरी रिपोर्ट में कोई दूसरी ही फसल उग रही है। मनमाने तरीके से की गई फसल गिरदावरी में खेत में उगी फसल की किस्म ही बदल दी है। गेहूं की खेत की गिरदावरी में चना और सरसों के स्थान पर गेहूं इंद्राज होने से दर्जनों किसान समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने से वंचित हो रहे हैं। हकीकत भरी गिरदावरी के नहीं होने से राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में खेतों से अलग फसल की बुवाई और कटाई हो रही है।


फसल की बुवाई के रकवे और संभावित उत्पादन के आंकलन के लिए राजस्व विभाग द्वारा तहसील क्षेत्र में पटवारियों के जरिए खेतों में फसल की गिरदावरी की जाती है। गिरदावरी के आधार पर प्राकृतिक आपदा में हुए खराब में संबंधित फसल का नुकसान का सरकार द्वारा मुआवजा जारी किया जाता है। वहीं गिरदावरी के रिकॉर्ड के आधार पर ही खेत में उपजी फसल को सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है। इधर घर या कार्यालय में बैठ की गई गिरदावरी से किसानों को न तो खराबा होने पर मुआवजा मिल पाता है और रिकार्ड में दूसरी फसल अंकित होने से न व समर्थन मूल्य पर उपज को बेच पाते हैं।


यों होती है गिरदावरी-
सरकार द्वारा निर्धारित फसल अवधि में प्रत्येक पटवार मंडल में पहुंच पटवारी खसराबार किसान से फसल की जानकारी जुटाते हैं। साथ ही खेत में मौजूद सिंचाई के साधन और पेड़ों के बारे में विस्तार से पत्रक में अंकित किया जाता है। गिरदावर के प्रमाणित करने पर जानकारियों को मोबाइल-एप पर ऑनलाइन इंद्राज किया जाता है।

 

गिरदावरी रिकॉर्ड पर होती खरीद-
सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद कर रही क्रय-विक्रय सहकारी समिति के खरीद केन्द्र प्रभारी सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि फसल बेचान के लिए किसान के पास उक्त फसल की गिरदावरी रिपोर्ट होने जरूरी है। सरसों की खरीद के लिए गिरदावरी के आधार पर ही पंजीयन किया गया। खेत में उपजी फसल और गिरदावरी में अंतर है तो खरीद नहीं होती है।

केस नम्बर-1
फत्तूकापुरा ढाणी में किसान हनुमान प्रसाद ने 2 बीघा और अलीबक्श ने तीन बीघा खेत में चना बोए थे। लेकिन गिरदावरी रिकॉर्ड में दोनों किसान के खेत में सरसों की उपज दर्शाई हुई है। गिरदावरी टोकन के आधार ये किसान समर्थन मूल्य पर सरसों बेच सकते हैं, लेकिन इनके यहां चना की पैदावार है।

केस नम्बर -2
फत्तूकापुरा क्षेत्र के काश्तकार नितिन धाकड़ के खेत में रबी के सीजन में 2 बीघा में सरसों की पैदावार हुई है। गिरदावरी मेंं उसके खेत में गेहूं की उपज होना बताया है। ऐसे में नितिन गेहूं की गिरदावरी पर समर्थन मूल्य पर सरसों को कैसे बेचे।

केस नम्बर-3
किसान राजेश कुमार के 3 बीघा खेत में गूंदा(लिसोड़ा) के पेड़ लगे हैं। रबी सीजन में चना की पैदावार हुई है, लेकिन गिरदावरी के रिकॉर्ड में खेत में महल लिसोड़ा की पैदावार ही बताई है।

केस नम्बर- 4
गत दिनों हुई ओलावृष्टि में संतोष महाजन के खेत में चना की फसल में खराबा हुआ था। मुआबजे के लिए राजस्व विभाग में गुहार लगाई तो पांच बीघा खेत में चना के स्थान गेहूं की पैदावार दर्ज थी।

फैक्ट फाइल-
कुल क्षेत्रफल- 63778 हैक्टेयर
कृषि भूमि- 40592 हैक्टेयर
सिंचिंत भूमि- 35277 हैक्टेयर
असिंचित भूमि- 5315 हैक्टेयर
गिरदावर वृत- 13
पटवार मण्डल -56
(स्त्रोत- तहसील कार्यालय)

इनका कहना है-
गिरदावरी नियमानुसार मौके से होनी चाहिए। कई बार पुराने रिकार्ड के आधार पर खेत में फसल दर्ज कर दी जाती है। खरीफ के सीजन से व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
मनीष आर्य, कानूनगो तहसील हिण्डौन सिटी।

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