आर्थिक पैकेज को लेकर दुविधा में कोरोना मृतकों के परिवार

आर्थिक पैकेज को लेकर दुविधा में कोरोना मृतकों के परिवार

अभी मृतकों का पता न सरकार की नीति- मापदण्ड तय,

चिकित्सा विभाग बता रहा जिले में कोरोना से 70 मौत, प्रशासन के पास 108 मृतकों की आई सूचना,


करौली. राज्य सरकार ने कोविड से मृतकों के आश्रितों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा तो कर दी है लेकिन यह सहायता किस नीति और मापदण्ड के आधार पर किन को मिलेगी, इसे लेकर असमंजस है। काफी लोग आर्थिक मदद लेने की खातिर परिजनों तथा रिश्तेदारों की मौत को कोरोना से सत्यापित कराने के लिए जतन में लगे हैं।

By: Surendra

Published: 19 Jun 2021, 08:40 PM IST

आर्थिक पैकेज को लेकर दुविधा में कोरोना मृतकों के परिवार

अभी मृतकों का पता न सरकार की नीति- मापदण्ड तय,

सरकार ने कोरोना मृतकों के आश्रितों को सहयाता पैकेज किया है घोषित

चिकित्सा विभाग बता रहा जिले में कोरोना से 70 मौत, प्रशासन के पास 108 मृतकों की आई सूचना,
हकीकत में संख्या है इनसे भी अधिक

करौली. राज्य सरकार ने कोविड से मृतकों के आश्रितों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा तो कर दी है लेकिन यह सहायता किस नीति और मापदण्ड के आधार पर किन को मिलेगी, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इधर सरकार के आर्थिक पैकेज की घोषणा के बाद से नई हलचल मची है। काफी लोग आर्थिक मदद लेने की खातिर अपने परिजनों तथा रिश्तेदारों की मौत को कोरोना से सत्यापित कराने के लिए जतन करने में लगे हुए हैं।
असल में अप्रेल से 15 जून के कोरोना के ढाई माह के क्रूर काल में मौतें तो सामान्य के मुकाबले में काफी अधिक हुई लेकिन चिकित्सा विभाग ने अलग-अलग कारणों से इन मौतों को होना दर्शाया। चिकित्सा विभाग की अधिकृत सूचना के अनुसार तो कोरोना की दूसरी लहर में कोरोना से जिले में 70 लोगों की मौत हुई। जबकि हकीकत में मौतों की संख्या कई गुना अधिक है। जिन परिवारों में मौतें हुई उन्होंने उस दौरान मौत के कारणों पर गौर नहीं किया बल्कि कोरोना के प्रोटोकॉल की बंदिशों से बचने के लिए कोरोना से मौत को छुपाया भी।
चूंकि अब सरकार ने कोरोना के मृतकों के आश्रितों को आर्थिक पैकेज घोषित किया है तो कोरोना से मृतकों की सूची में नाम दर्ज कराने के लिए मृतकों के परिजन, रिश्तेदार सक्रीय हुए हैं। लेकिन इसको लेकर सरकार की ओर से नीति-मापदण्ड तय नहीं होने के कारण दुविधा की स्थिति बनी हुई है।

... फिर भी कोरोना से मौत में नहीं शामिल

चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में ढाई माह में कोरोना महामारी से 70 मृतक वे हैं, जिनकी कोविड की जांच पॉजीटिव आई थी। ऐसे सदस्यों के आश्रितों को सरकार द्वारा घोषित सहायता पैकेज मिलने में संशय नहीं किया जा रहा है। लेकिन इनके साथ ऐसे भी अनेक मृतक हैं, जिनकी कोविड जांच तो पॉजीटिव नहीं थी लेकिन फेफड़ों में संक्रमण तेजी से बढऩे पर उनकी जान चली गई थी। कोविड के उपचार के दौरान फेफड़ों के संक्रमण का पता लगाने के लिए चिकित्सालय में एचआरसीटी की जांच भी कराई गई थी। करौली चिकित्सालय में अप्रेल से 15 जून तक एचआरसीटी पॉजीटिव आए मरीजों में से 49 की मौत हुई। जबकि कोविड पॉजीटिव मृतकों की संख्या 20 है। खास बात यह है कि एचआरसीटी पॉजीटिव मरीजों का उपचार भी कोविड वार्ड में कोविड मरीज मानते हुए किया गया। मृत्यु होने पर अनेक मृतकों का कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार अंतिम संस्कार भी हुआ। बावजूद इसके चिकित्सा विभाग ने इन मृतकों को कोरोना के मृतकों की सूची में शामिल नहीं किया हुआ है। ऐेसे मृतकों के आश्रितों को सरकार की ओर से घोषित पैकेज मिलने को लेकर संशय की स्थिति है। सरकार ने इस बारे में नीति तय नहीं की है।

प्रशासन के पास 108 मृतकों की सूचना

सरकार द्वारा कोरोना मृतकों के आश्रितों को पैकेज घोषित करने के बाद जिला प्रशासन ने जिले में कोरोना से मौतों की सूचना संकलित कराई तो फिलहाल 108 मृतकों की संख्या सामने आई हैं। इनमें कोविड पॉजीटिव मृतकों के अलावा वे मृतक भी शामिल हैं, जिनकी कोरोना रिपोर्ट तो नेगेटिव थी लेकिन एचआरसीटी में फेफड़ों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। प्रशासन ने प्राथमिक तौर पर तो बिना किसी पड़ताल के 108 मृतकों की सूचना संकलित करके सरकार को भेज दी है। जानकारों का कहना है कि इस बार कोरोना के संक्रमण में ज्यादातर मामले ऐसे थे जिनकी कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आने पर भी वे फेफड़ों के संक्रमण का शिकार हुए। इससे उनकी मौत भी हो गई। ऐसे एचआरसीटी पॉजीटिव मृतकों की संख्या करौली चिकित्सालय में ही 49 है तो जिले में यह संख्या कई गुना अधिक मानी जा रही है। अभी ऐसे मामले भी सामने नहीं आए हैं जिनकी मृत्यु संक्रमित होने के बाद अन्य स्थानों पर हुई। जबकि वे करौली जिले के मूल निवासी है। पोस्ट कोविड के कारण हुई मृत्यु भी इसमें शामिल नहीं की गई है।

चार तरह की बनाई कैटेगरी

1 वे मामले जिनमें माता-पिता दोनों की मृत्यु के बाद बच्चे अकेले रह गए हैं।
2. किसी एक सदस्य (माता या पिता) की मृत्यु होने से परिवार पर संकट आया है।
3. ऐसे मामले जिनमें माता या पिता की पहले मृत्यु हो गई और दूसरे सदस्य की मौत अब कोरोना से हुई है।
4. वे परिवार जिनके कमाऊ सदस्य की कोरोना से मृत्यु होने पर माता-पिता या अन्य बालिग सदस्यों के सामने
अपने जीवनयापन की समस्या आई हो।

मृत्यु प्रमाण पत्र में कोरोना नहीं अंकित

सरकार ने कोरोना के मृतकों के आश्रितों को पैकेज तो घोषित किया है लेकिन अधिकांश मृतकों के मृत्यु प्रमाण पत्र में कोरोना से मौत का उल्लेख नहीं है। पीडि़त परिवार के पास चिकित्सकों का प्रमाण पत्र भी नहीं है। ऐसे में संशय है कि आर्थिक लाभ लेने के लिए सामान्य मौत के मृतकों के परिजन भी सहायता की दावेदारी जता सकते हैं।

इनका कहना है

जिला कलक्टर सिद्धार्थ सिहाग ने बताया कि कोरोना से मौतों की प्राथमिक तौर पर संकलित सूचना के आधार पर सरकार को 108 मृतकों की संख्या भेजी है। यह संख्या बिना सत्यापन के है। कोरोना मृतकों के आश्रितों के आवेदन प्रशासन को मिल रहे हैं। इन पर आगे कार्रवाई सरकार की नीति-मापदण्ड तय होने पर प्राप्त निर्देशों के अनुसार की जाएगी।

Surendra Bureau Incharge
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