डडैल डांडिया नृत्य की मस्ती में भूल गए कोरोना

डडैल डांडिया नृत्य की मस्ती में भूल गए कोरोना
करौली जिले में मण्डरायल क्षेत्र की कसेड पंचायत के अरोरा गांव में ग्रामीणों की ओर से आदिवासी डडैल डांडिया नृत्य आयोजित हुआ। शनिवार शाम से शुरू हुआ यह कार्यक्रम पूरी रात और रविवार शाम चार बजे तक चलता रहा। सैंकड़ों लोगों ने इस नृत्य का आनंद लिया और विभिन्न क्षेत्रों से आई 4 टीमों ने इसमें हिस्सा लिया। प्रत्येक टीम में 60 से 70 सदस्य शामिल थे जो एक प्रकार की गणवेश पहने थे। नृत्य की मस्ती में भूले लोग कोरोना संक्रमण की हिदायतों को भूल ही गए।

By: Surendra

Updated: 23 Aug 2020, 09:56 PM IST

डडैल डांडिया नृत्य की मस्ती में भूल गए कोरोना
खिरकन की टीम का रहा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
मंडरायल (करौली) करौली जिले में मण्डरायल क्षेत्र की कसेड पंचायत के अरोरा गांव में ग्रामीणों की ओर से आदिवासी डडैल डांडिया नृत्य आयोजित हुआ। शनिवार शाम से शुरू हुआ यह कार्यक्रम पूरी रात और रविवार शाम चार बजे तक चलता रहा। सैंकड़ों लोगों ने इस नृत्य का आनंद लिया और विभिन्न क्षेत्रों से आई 4 टीमों ने इसमें हिस्सा लिया। प्रत्येक टीम में 60 से 70 सदस्य शामिल थे जो एक प्रकार की गणवेश पहने थे। नृत्य की मस्ती में भूले लोग कोरोना संक्रमण की हिदायतों को भूल ही गए।
अरोरा के ग्रामीणों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में मण्डरायल क्षेत्र के खिरकन, टोड़ा, सिमारा व अरोरा गांव की टीमों ने हिस्सा लिया। प्रत्येक टीम ने बारी-बारी से अपना नृत्य दिखाकर लोगों का मन मोह लिया। पंच पटेलों के निर्णायक मंडल द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली टीमों का चयन करके पुरस्कृत किया गया। इस आयोजन में खिरकन गांव की टीम का नृत्य प्रथम रहा। खिरकन की बीरबल एंड पार्टी को सरपंच चरणबाई मीना ने साफा के साथ 1100 रुपए की माला पहनाई। कोरोना संक्रमण के दौर के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे लोग लगभग 20 घंटे तक पूरी तरह से मस्ती में डूबे रहे। उनको कोरोना महामारी को लेकर सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी की पालना का ध्यान ही नहीं रहा।

हर वर्ष भादौ माह में होते हैं आयोजन
ग्रामीणों ने बताया कि डांग क्षेत्र की परम्परा के अनुसार डडैल डांडिया नृत्य के आयोजन इलाके के गांवों में हर वर्ष भादौ माह में आयोजित होते हैं। मान्यता है कि भादौं माह में देवी-देवताओं की मनौती और उनको खुश करने के लिए इस तरह के नृत्यों का आयोजन किया जाता है। यह नृत्य आदिवासी संस्कृति के परिचायक हैं। इस कारण से जिले में मीणा समाज में इसका अधिक प्रचलन है। नृत्य के दौरान अलग अलग समूहों में 70 से 80 सदस्य तक शामिल होते हैं। इनकी संख्या 100-125 तक भी पहुंच जाती है। इसका कोई प्रतिबंध नहीं है। समूह के सदस्य आमतौर पर एक तरह की ड्रेस पहनते हैं और हाथों में डांडिया भी लेकर नाचते हैं। खास बात यह है कि यह आयोजन लगातार दिन-रात चलता रहता है। बीच-बीच में कुछ समय के लिए चाय-पानी को ब्रेक होता है और फिर नाच करना शुरू हो जाता है। अरोरा में हुआ आयोजन भा लगभग 20 घंटे तक चला।

Surendra Bureau Incharge
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned