बाजरे में लगा रोग, किसान चिंतित

गुढ़ाचन्द्रजी. इन दिनों बाजरे में फड़का रोग के प्रकोप से किसान चिंतित है। पूर्व सरपंच रामखिलाड़ी मीना, उदयराज मीना, मुंशीलाल आदि किसानों ने बताया कि गत एक पखवाड़े से बाजरे में रोग दिख रहा है। फडका कीट बाजरे के पौधे की पत्तियों को खा जाता है। केवल पौधे का तना ही रह जाता है।

By: Surendra

Published: 05 Sep 2019, 09:02 PM IST

गुढ़ाचन्द्रजी. इन दिनों बाजरे में फड़का रोग के प्रकोप से किसान चिंतित है। पूर्व सरपंच रामखिलाड़ी मीना, उदयराज मीना, मुंशीलाल आदि किसानों ने बताया कि गत एक पखवाड़े से बाजरे में रोग दिख रहा है। फडका कीट बाजरे के पौधे की पत्तियों को खा जाता है। केवल पौधे का तना ही रह जाता है।

रोग लगने से दाने नहीं बनते। खास बात ये है कि फड़का कीट अपने वजन से १६ गुना अधिक भोजन खाने की क्षमता रखता है। यह सर्वभक्षी कीट है। जो सभी फसलों को नुकसान पहुंचाता है। कस्बे सहित कमालपुरा,मोहनपुरा, तिमावा, ढहरिया, राजाहेड़ा, आमकाजाहिरा, पाल, लालसर, दलपुरा आदि गांवों में फड़के का प्रकोप है। प्राथमिक नियंत्रण के उपायों के बावजूद फड़का पर रोक नहीं लग पा रही है। इससे किसान चिंतित नजर आ रहे है।
बाजरे की फसल में फड़के के अलावा चोरनी (बिलस्टर बीटन) कीट का प्रभाव भी दिख रहा है। कृषि अधिकारियों के मुताबिक इस कीट का प्रभाव सुबह-शाम अधिक रहता है।
यह करें उपाय
कृषि पर्यवेक्षक कैलाश चंद्रवाल ने बताया कि फड़का रोग से बचने के लिए किसान शाम के समय खेतों की मेड़ पर जगह-जगह आग जलाएं। साईपरमेथरिन १ एमएल प्रति लीटर का छीड़काव करें। क्यूनॉल फॉस या फेनवेलरेट दवा ६ किलोग्राम प्रति बीघा के हिसाब से भुरकाव करें।

Surendra Bureau Incharge
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