दिव्यांग बालिका निरी ने फोटोग्राफी में किया कमाल

दिव्यांग बालिका निरी ने फोटोग्राफी में किया कमाल
राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पाया सम्मान
करौली. जिला मुख्यालय से 16 किलोमीटर दूर कोंडर गांव की बालिका निरी ने फोटोग्राफी में न केवल करौली का नाम देश भर में रोशन किया बल्कि यह साबित कर दिखाया कि दिव्यांग बालिका किसी से कम नहीं होती। निरी करौली में एकट बोध ग्राम संस्था के निशब्द विद्यालय की कक्षा 12वीं की छात्रा है। उसने पांडिचेरी की संस्था "एस-पिक्सल्स" की ओर से विशेष बच्चों की बीते वर्ष आयोजित फोटोग्राफी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था।

By: Surendra

Updated: 25 Jan 2021, 07:53 PM IST

दिव्यांग बालिका निरी ने फोटोग्राफी में किया कमाल
कोंडर गांव की बालिका ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पाया सम्मान
करौली. जिला मुख्यालय से 16 किलोमीटर दूर कोंडर गांव की बालिका निरी ने फोटोग्राफी में न केवल करौली का नाम देश भर में रोशन किया बल्कि यह भी साबित कर दिखाया है कि दिव्यांग बालिका किसी से कम नहीं होती।
निरी मीना करौली में एकट बोध ग्राम संस्था के परिसर में संचालित निशब्द विद्यालय की कक्षा 12वीं की छात्रा है। उसने पांडिचेरी की एक संस्था "एस-पिक्सल्स"की ओर से विशेष बच्चों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बीते वर्ष आयोजित फोटोग्राफी की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। यह संस्था दिव्यांग बच्चों के लिए प्रति वर्ष यह प्रतियोगिता आयोजित करती है। करौली के निशब्द विद्यालय के 6 बालक-बालिकाओं ने इस प्रतियोगिता में पिछले साल भाग लिया था। इनमें निरी भी एक थी। इन सभी ने 24 फोटोग्राफ इस प्रतियोगिता के लिए भेजे थे।
देश के सैकड़ों बच्चों के फोटोग्राफों में से बालिका निरी के फोटो को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने के लिए चयनित किया गया। इस पर सम्मान स्वरूप उस फोटोग्राफ पर बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने ऑटोग्राफ करके भेजे हैं। साथ ही प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह भी। जिला कलेक्टर सिद्धार्थ सिहाग ने बालिका को अभिताभ बच्चन के ओटोग्राफ वाला फोटो अपने हाथों से प्रदान किया। साथ ही उसकी फोटोग्राफी की सराहना भी की।
जन्मजात बोलने-सुनने में असमर्थ
निरी जन्म से ही सुनने-बोलने में असमर्थ हैं। गरीबी के कारण कक्षा सात तक की पढ़ाई गांव के स्कूल में की थी। वर्ष 2017 में निशब्द विद्यालय का प्रचार वाहन कोंडर गांव गया और उसकी मां को निशब्द स्कूल में निरी को प्रवेश दिलाने के लिए प्रेरित किया। काफी समझाइश पर कक्षा 8 में उसने नि:शब्द मूक बधिर विद्यालय करौली में प्रवेश लिया। उसकी चित्रकला के प्रति रुचि को देखते हुए संस्था के समन्वयक सत्येन चतुर्वेदी ने छह अन्य बालक बालिकाओं के साथ उसे फोटोग्राफी का प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया।

सहायता के सहारे से पल रहा परिवार
निरी मीणा कोंडर गांव के निर्धन परिवार से है। छह बहनों में चौथे नम्बर की निरी की तीन बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। पिता नरसी मीना का 2003 में निधन होने के बाद निरी के परिवार पर दु:ख का पहाड़ टूट गया था। बड़े परिवार में सभी के पालन पोषण की समस्या मां लखनबाई पर आ गई। यह परिवार बीपीएल में चयनित है। परिवार के भरण पोषण के लिए मां 2018 तक गांव के ही सरकारी विद्यालय में पोषाहार बनाने का कार्य करती रही। वर्ष 2018 में यह कार्य भी लखनबाई के हाथ से चला गया। वर्तमान में परिवार के पास स्थायी आय नहीं है। हालांकि सरकार की अनाज योजना, पेंशन तथा दो दिव्यांग बालिकाओं को 1500 की राजकीय सहायता तथा एक बालिका को पालनहार योजना में 1000 प्रति माह की सहायता से परिवार का भरण पोषण हो पा रहा है।

Surendra Bureau Incharge
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