script बीजोपचार नहीं कराने से फसल में लगा रोग, मुरझाने लगे पौधे | Due to not getting seed treatment, crop got disease, plants started wi | Patrika News

बीजोपचार नहीं कराने से फसल में लगा रोग, मुरझाने लगे पौधे

locationकरौलीPublished: Dec 19, 2023 12:42:34 pm

Submitted by:

Jitendra Sharma

गेहूं, चना व सरसों पर रोग का असर बालघाट. मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच फसलों को रोगों ने अपनी चपेट में ले लिया है। जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। करौली जिले में रबी फसलों में प्रमुखतया गेहूं, सरसों व चने की पैदावार की जा रही है। इन तीनों ही फसलों में रोगों का प्रकोप देखा जा रहा है। बालघाट के कमालपुरा, धवान, मोहनपुरा, तिमावा, खोहरा, राजोर, भण्डारी आदि गांवों में चने की फसल में फफूंदी हरी लट का प्रकोप चल रहा है। फफूंदी रोग से पौधे की जड़ काली होकर खत्म हो रही है। वहीं हरी लट का कीट पत्तियो

बीजोपचार नहीं कराने से फसल में लगा रोग, मुरझाने लगे पौधे
बीजोपचार नहीं कराने से फसल में लगा रोग, मुरझाने लगे पौधे
बीजोपचार नहीं कराने से फसल में लगा रोग, मुरझाने लगे पौधे गेहूं, चना व सरसों पर रोग का असर बालघाट. मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच फसलों को रोगों ने अपनी चपेट में ले लिया है। जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। करौली जिले में रबी फसलों में प्रमुखतया गेहूं, सरसों व चने की पैदावार की जा रही है। इन तीनों ही फसलों में रोगों का प्रकोप देखा जा रहा है। बालघाट के कमालपुरा, धवान, मोहनपुरा, तिमावा, खोहरा, राजोर, भण्डारी आदि गांवों में चने की फसल में फफूंदी हरी लट का प्रकोप चल रहा है। फफूंदी रोग से पौधे की जड़ काली होकर खत्म हो रही है। वहीं हरी लट का कीट पत्तियों को खा रहा है। इससे किसान चिंतित हैं। किसानों ने करीब एक महीने पहले चने की बुवाई कर दी थी। इसके पौधे लगभग 10-15 सेमी लंबे दिखाई देने लगे हैं। बुवाई से पूर्व जैविक फफूंद नाशक दवा से भूमि उपचारित नहीं करने से फसल में रोग लगा हुआ है। इधर किसान हुकम मीणा कमालपुरा ने बताया कि कीटनाशक दवा से फसल को रोगों से बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। बाजार से महंगे दामों पर दवा खरीदनी पड़ रही है। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। नहीं हो रही बढ़त किसानों ने बताया कि चने में हरी लट लगने से वह पौधे को खाकर नष्ट कर रही है। पौधे का विकास रुक गया है। बढ़त नहीं हो रही है। जिससे किसान चिंतित है। पौधो ठीक प्रकार से विकसित नहीं हो पा रहा है। ऐसी ही स्थिति रही तो चने की फसल पूरी तरह खराब हो जाएगी। मावठ के दौर के बाद किसानों को फसल के बंपर पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन अब रोग लगने से फसल को नुकसान पहुंच रहा है। इनका कहना है इधर कृषि पर्यवेक्षक सुधीर कुमार मीना ने बताया कि बुवाई से पहले बीजोपचार नहीं करने से फसल में रोग लगा है। रोग से फसल को बचाने के लिए प्रतिलीटर पानी में 2 ग्राम ट्राईकोडर्मा दवा डालकर छिड़काव करें। एक बीघा क्षेत्र में 100 से 150 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करना जरूरी है। ताकि फसल को रोग से बचाया जा सके। केप्शन. बालघाट. कमालपुरा गांव में चने की फसल में लगा रोग दिखाता किसान।

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