फार्म पॉण्ड में कम हो रही रूचि

फार्म पॉण्ड में कम हो रही रूचि
Karauli photo

Shankar Sharma | Publish: Jun, 15 2015 11:52:00 PM (IST) Karauli, Rajasthan, India

नादौती क्षेत्र में पिछले कई सालों से बन रहे फार्म पॉण्डों के कारण अब यहां के किसानों की इनमे रूचि कम होती जा रही है। यही

करौली। नादौती क्षेत्र में पिछले कई सालों से बन रहे फार्म पॉण्डों के कारण अब यहां के किसानों की इनमे रूचि कम होती जा रही है। यही कारण है कि अब तक महज 180 किसानों ने ही आवेदन किए हैं। जबकि फार्म पॉण्डों की खुदाई मानसून से पहले हो जाती है। ऎसे मे जिले को मिले लक्ष्य को पूरा करने मे विभाग को पसीने छूट रहे हैं।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत जिले के नादौती क्षेत्र मे पिछले आठ-नौ सालों से करीब पांच हजार फार्म पॉण्डो का निर्माण हो चुका है। ऎसे मे अब क्षेत्र के किसानों मे फार्म पॉण्ड निर्माण के प्रति उदासीनता बरती जा रही है। इसके चलते इस मद में मिलने वाली राशि वापस भेजी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए प्रदेश में नौ हजार तथा जिले मे 1450 फार्म पॉण्ड के लक्ष्य मिले हैं। इस पर जिले मे 783.750 लाख की राशि खर्च होगी।

फार्म पॉण्ड का निर्माण बारिश से पहले रबी फसल की कटाई के बाद खेत खाली होने पर कराया जाता है। बारिश का मौसम शुरू होने वाला है, लेकिन अब तक महज 180 किसानों ने ही आवेदन किए हैं। कृषि अधिकारियों का मनना है कि क्षेत्र मे पर्याप्त संख्या मे फार्म पॉण्ड बन जाने के कारण किसान रूचि नहीं दिखा रहे हैं। जो किसान फार्म पॉण्ड नहीं बना पाए हैं, उनके पास पर्याप्त कृषि भूमि का अभाव है। फार्म पॉण्ड निर्माण के लिए किसान के पास न्यूनतम 0.5 हैक्टेयर तथा एक ही खसरा में दो फार्म पॉण्ड बनाने के लिए न्यूनतम एक हैक्टेयर भूमि होना आवश्यक है। पिछले साल से फार्म पॉण्ड पर अनुदान 60 से घटाकर 52 हजार कर देना भी इसके पीछे कारण बताया जा रहा है।

दूसरे क्षेत्रों में नहीं हुआ निर्माण


जिले मे फार्म पॉण्डों का निर्माण केवल नादौती व टोडाभीम क्षेत्र के कुछेक गांवो तक ही सीमित रहा है। क्योंकि यहां की मिट्टी फार्म पॉण्ड निर्माण के लिए उपयुक्त है। जबकि अन्य इलाको मे रेतीली मिट्टी होने के कारण वहां कच्चे फार्म पॉण्ड नहीं बनाए जा सकते। हालांकि इसके लिए सरकार ने पिछले साल से योजना मे प्लास्टिक लाइन वाले फार्म पॉण्ड निर्माण शुरू किए हैं, लेकिन इसके अभी सकारात्मक परिणाम नहीं आए हैं। कृषि अधिकारियों की मानें तो नादौती इलाके को छोड़ दूसरे क्षेत्रों मे किसानों के पास चिकनी मिट्टी नहीं होने व कृषि भूमि कम होने के कारण फार्म पॉण्ड निर्माण नहीं हो पाते।

सरसब्ज हुआ इलाका
फार्म पॉण्ड निर्माण से नादौती क्षेत्र की तस्वीर बदल गई है। इससे पहले तक यहां के किसान फसल उत्पादन के लिए बारिश पर ही आधारित थे, लेकिन फार्म पॉण्ड बनने के बाद वे दूसरे मौसमों मे भी फसल उत्पादन कर रहे हैं।

गड़बड़ी पर लगाम, तो कम हुए आवेदन
सूत्रों के अनुसार क्षेत्र मे पिछले दो-तीन साल से फार्म पॉण्ड के नाम पर भ्रष्टाचार भी खूब हुआ। किसी ने एक फार्म पॉण्ड के बदले दो बार अनुदान उठा लिया तो किसी ने बिना बनाए ही अनुदान की राशि हड़प ली। यही नहीं इलाके मे दलाल तक पनप गए, जो फार्म पॉण्ड स्वीकृत कराने के नाम पर राशि वसूल करते हैं। इस पर अधिकारियों ने लगाम लगाने के प्रयास किए तो आवेदनों की संख्या कम हो गई।

घट रही रूचि
कृषि उपनिदेशक बी.डी.शर्मा ने बताया कि नादौती क्षेत्र मे पिछले कई सालों से फार्म पॉण्डों का निर्माण हो रहा है। अब वहां पूर्णता की स्थिति बनती जा रही है। इस कारण इलाके मे इसकी मांग घट रही है। इससे आवेदन कम आए हैं।

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