चंदन के पेड़ों से महकेगा गांधी बगीचा

करौली. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की (Gandhi garden will be decorated with sandalwood trees) 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में करौली के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गांधी बगीचा तैयार होगा, जिसकी बगिया चंदन के पेड़ों से भी महकेगी।

By: vinod sharma

Published: 03 Dec 2019, 11:16 AM IST

Karauli, Karauli, Rajasthan, India

करौली. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की (Gandhi garden will be decorated with sandalwood trees) 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में करौली के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गांधी बगीचा तैयार होगा, जिसकी बगिया चंदन के पेड़ों से भी महकेगी। इसकी कवायद महाविद्यालय प्रबंधन ने शुरू कर दी है। महात्मा गांधी की १५०वीं जयंती के उपलक्ष्य में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, इसी के तहत महाविद्यालय प्रबंधन ने गांधी बगीचा तैयार करने का निर्णय किया है। प्राचार्य कक्ष के पीछे जमीन में गांधी बगीचा तैयार होगी। इस बगीचे की खास बात ये रहेगी कि चंदन के पेड़ लगाए जाएंगे। इसके अलावा, गुलाब, हजोरा सहित दर्जनों प्रकार के पौधे लगेंगे। इसकी देखभाल के लिए संविदा पर कर्मचारी तक लगाए जाएंगे। जिससे उनकी देखभाल ठीक प्रकार से हो सके।
चंदन के लिए वातावरण उपयुक्त है
करौली राजकीय महाविद्यालय में वनस्पतिशास्त्र के शिक्षकों ने बताया कि चंदन के पेड़ के लिए करौली का वातावरण उपयुक्त है। उदयपुर के बाद चंदन के पेड़ करौली में आसानी से अपना विकास कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि महाविद्यालय में सालों पहले चंदन के पेड़ थे, जो बाद में खुद-बुर्द हो गए तथा पेड़ों की चोरी होने की बात भी सामने आई थी। इसी प्रकार करौली के सर्किट हाउस में चंदन के पेड काफी तादाद में थे। गत दिनों ही एक पेड़ चोरी हुआ था। इससे पहले भी पेड़ चोरी हो चुके।


मुख्य दरवाजे से मैदान तक दशा बदलेगी
राजकीय स्नानकोत्तर महाविद्यालय के मुख्य दरवाजे से पीछे के मैदान तक दशा बदली जाएगी। इसका प्रोजेक्ट भी बना लिया गया है। दरवाजे से प्राचार्य के कक्ष तक दोनों तरफ फूलों के बगीचे लगेंगे तथा मैदान को समतल कर उसे क्रिकेट मैदान के रूप में तब्दील किया जाएगा। इसके अलावा अन्य खेलों की व्यवस्था की जाएगी। मैदान की चारदीवारी व पौधारोपण किया जाएगा। रोशनी की व्यवस्था उच्च क्वालिटी की जाएगी।

कवायद शुरू
महात्मा गांधी के नाम से गांधी बगीचा तैयार होगा। जिसमें बहुसंख्या में चंदन के पेड़ लगाए जाएंगे। इसकी कवायद शुरू कर दी गई है।
डॉ. ज्ञानेश्वर मीना प्राचार्य राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय करौली।

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