करौली में देवस्थान विभाग के मंदिर भगवान भरोसे !

करौली में देवस्थान विभाग के मंदिर भगवान भरोसे !
अरबों रुपए की सम्पदा वाले विभाग के दफ्तर पर लटका है ताला
देवस्थान विभाग में निरीक्षक सहित सभी पद हैं रिक्त
करौली. सैंकड़ों सरकारी व निजी मंदिरों के होने के कारण ब्रज संस्कृति से जुड़ी करौली नगरी को मिनी वंृदावन कहा जाता है। करौली में 100 से अधिक सरकारी मंदिरों की अरबों रुपए कीमत की भूमि, दुकान सहित अन्य सम्पदा जिले में बिखरी हुई है। इस सम्पदा पर आए दिन अतिक्रमण के मामले सामने आते रहते हैं। इसके बावजूद देवस्थान विभाग के दफ्तर पर एक साल से ताला है।

By: Surendra

Updated: 01 Dec 2020, 09:11 PM IST

करौली में देवस्थान विभाग के मंदिर भगवान भरोसे !
अरबों रुपए की सम्पदा वाले विभाग के दफ्तर पर लटका है ताला
देवस्थान विभाग में निरीक्षक सहित सभी पद हैं रिक्त
मंदिरों सहित दुकान, भूमि सहित अन्य सम्पदा की नहीं कोई निगरानी
करौली. सैंकड़ों सरकारी व निजी मंदिरों के होने के कारण ब्रज संस्कृति से जुड़ी करौली नगरी को मिनी वंृदावन कहा जाता है। करौली जिले में 100 से अधिक सरकारी मंदिरों की अरबों रुपए कीमत की भूमि, दुकान सहित अन्य सम्पदा पूरे जिले में बिखरी हुई है। इस सम्पदा पर आए दिन अतिक्रमण के मामले भी सामने आते रहते हैं। इसके बावजूद देवस्थान विभाग के अधिकारी बेपरवाह है। स्थिति यह है कि जिला मुख्यालय स्थित देवस्थान विभाग के दफ्तर पर लगभग एक साल से ताला लटका है।
पानी की टंकी के पास देवस्थान विभाग का कार्यालय एक मंदिर में ऊपर की मंजिल में स्थापित है। इस कार्यालय में देवस्थान निरीक्षक, लिपिक, चतुर्थ श्रेणी सहित अन्य कार्मिकों के पद भी आवंटित हैं लेकिन इन सभी पदों के रिक्त होने से इस कार्यालय पर ताला लगा होने की नौबत आई है। प्रदेश भर में सर्वाधिक सरकारी मंदिर होने के बावजूद यहां के देवस्थान कार्यालय को लेकर सरकार की बेपरवाही हैरत भरी है। सरकार की इस विभाग को लेकर अनदेखी की स्थिति पिछले कुछ वर्षो से चली आ रही है। इस कारण कभी यहां अधिकारी का पदस्थापन नहीं हुआ तो कभी कार्मिकों के पद रिक्त रहे।
यहां से पिछले वर्ष जून माह में निरीक्षक का स्थानान्तरण होने के बाद चार माह यह दफ्तर एक बाबू के भरोसे संचालित रहा था। इस लिपिक के नवम्बर में रिटायर हो जाने के बाद से इस कार्यालय पर एक साल से ताला लगा है। वैसे इस कार्यालय के बुरे दिन इससे पहले के वर्षो में भी रहे हैं। बीते कई वर्षो तक इस दफ्तर को चपरासी और लिपिक ही चलाते रहे।

बदहाल है कार्यालय
देवस्थान विभाग का करौली में कार्यालय तो प्राचीन है लेकिन इसकी सार-संभाल नहीं हो पाने से यह धूल धूसरित हो रहा है। कार्यालय में बैठने के लिए फर्नीचर तक की कमी है। कमरों में सफाई नहीं होने से धूल भरी है। इस धूल में ही मंदिरों का रिकॉर्ड दबा हुआ है। सार संभाल के अभाव में यह रिकॉर्ड नष्ट भी होता जा रहा है।

जिले में हैं 115 सरकारी मंदिर
करौली के देवस्थान कार्यालय के अधीन करौली और सवाईमाधोपुर जिले के एक सौ से अधिक सरकारी मंदिरों की सेवा पूजा की व्यवस्था, उनकी सम्पदा के रखरखाव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। करौली जिले में देवस्थान विभाग के 101 सुपुर्दगी श्रेणी के मंदिर तथा चार प्रमुख मंदिरों के ट्रस्ट भी है। ये सभी इस कार्यालय के क्षेत्राधिकार में हैं। विभाग ने सुपुर्दगी श्रेणी के मंदिरों को सेवा-पूजा के लिए पुजारियों को सौंपा हुआ है। इनकी देखभाल की जिम्मेदारी पूजा करने वालों को दी हुई है।
इनके अलावा करौली शहर के 15 मंदिर आत्मनिर्भर श्रेणी के हैं। आत्मनिर्भर मंदिरों की सेवा पूजा सहित अन्य व्यवस्थाओं का जिम्मा देवस्थान विभाग के पास है। लेकिन यहां विभाग के दफ्तर पर ताला होने से इन मंदिरों के पुजारी और व्यवस्थापक छोटे-छोटे कामों को चक्कर लगाते हैं। कई मंदिरों के पुजारियों के वेतन और भोग की राशि का भुगतान एक साल से अटका है। मंदिरों के नल-बिजली के बिलों की राशि का भुगतान भी नहीं हो पा रहा है। देवस्थान विभाग के दफ्तर पर ताला लटका होने को लेकर बीते दिनों सर्वसमाज के लोगों ने जिला कलक्टर को ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में देवस्थान निरीक्षक की नियुक्ति करके कार्यालय खोले जाने के प्रबंध करने की मांग की गई।

बिजली पानी के बिल बकाया

करौली में देवस्थान विभाग के कार्यालय के बंद होने से छोटे-छोटे कामों के लिए परेशानी होती है। अनेक पुजारी और मंदिर व्यवस्थापक चक्कर लगाते रहते हैं। जिले में आत्मनिर्भर श्रेणी के कई मंदिरों को राग-भोग की राशि नहीं मिली है। इन मंदिरों के पानी-बिजली के बिल 8 महीने से बकाया है। भुगतान के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। हाथ जोड़कर कनेक्शन काटने से बिजली कार्मिकों को रोकते हैं।
मनोज शर्मा, पुजारी, प्रताप नवलबिहारी मंदिर करौली


कर रहे हैं व्यवस्था
विभाग के लिए आवंटित लिपिकों के पदों में से पूरे प्रदेश में ही 56 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इस बारे में सरकार को अवगत कराया हुआ है। करौली कार्यालय में ताला लगा होने की समस्या के समाधान के लिए जल्दी यहां निरीक्षक का पदस्थापन कर दिया जाएगा।
राजेन्द्र शेखर भट्ट, आयुक्त देवस्थान विभाग करौली।

Surendra Bureau Incharge
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