हिण्डौनसिटी. शहर में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने भले ही करोड़ों की दो जलयोजनाएं बना दीं हैं, लेकिन शहरवासियों को खेंचू से शुरू होने वाली दिनचर्या से निजात नहीं मिली है न ही पुरानी आबादी क्षेत्र की प्यास बुझ पाई। पुरानी आबादी की बस्तियों में हर सुबह लोग पानी की चिंता के साथ जागते हैं। और घरों के बाहर सडक़ पर नलों पर खेंचू लगा पसीना बहाकर रोजमर्रा के काम काज के लिए पानी जुटा पा रहे हैं।

नलों से जलापूर्ति का समय और पानी का प्रेशर कम होने से शहर की कई कॉलोनियों और मोहल्लों में पानी के लिए हाय तौबा की स्थिति बनी है। बावजूद इसके जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग नेे पेयजल संकट दूर करने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हंै।
शहर के धाकड़ पोठा, चिरवायादार पाड़ा, खटीक पाड़ा, दत्तात्रेय पाड़ा, मटिया महल, काना हनुमान पाडा, चौबे पाड़ा, पाठक पाड़ा, बरपाड़ा, शाहगंज, नीम का बाजार, घाटी बाजार, सुखदेवपुरा आदि बस्तियों में रह रहे लोगों की हर सुबह पानी की चिंता के साथ जाग होती है।

सुबह छह बजते ही इन बस्तियों के लोगों की पहली चिंता पानी की होती है। परिवार का एक सदस्य घर के बाहर लगे नल पर खेंचू लगाता है और आपूर्ति शुरू होने पर महिला-पुरुष, वृद्ध और बच्चे पानी भरने में लग जाते हैं। नलों से जलापूर्ति के दौरान सड़कोंं पर मेले का सा माहौल हो जाता है। रोजमर्रा के पानी के लिए सड़क पर भीड़ भरा नजारा के पेयजल संकट की गंभीरता को बयां करता है। पुरानी कचहरी में अधिक भराव क्षमता की नई टंकी बनने के बाद लोगों को समस्या से राहत नहीं मिली है।


गौरतलब है कि 82 करोड रुपए करोड रुपए की दो जलयोजनाएं के निर्माण होने से शहर में पेयजल समस्या का समाधान होने की उम्मीद दी।शहरी पुनर्गठित पेयजल योजना से सभी घरों में सात मीटर ऊंचाई (तीन मंजिल) तक प्रेशर के साथ पानी की बात कही थी। लेकिन हकीकत यह है कि घर की चौखट तक पानी नहीं पहुंचने से लोगों को खेंचू लेकर सड़क पर आना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि आए दिन तय समय पर जलापूर्ति भी नहीं मिल पा रही है।

पानी के लिए जुटता पूरा परिवार-
पुरानी आबादी क्षेत्र में घर में रोजमर्रा के पानी भरना एक या दो जनों के बूते की बात नहीं हैं। इन दिनों दी जा रही 5 से 10 मिनट की जलापूर्ति के परिवार के सभी सदस्यों में पानी भरने की मशक्कत में जुटना पड़ता है। हर तरफ सडक़ पर सुबह सिर पर पानी से भरे बर्तन लाती महिलाएं व युवतियां नजर आती हैं। बच्चों से लेकर वृद्ध भी पानी भरने में जुटते हैं। कई लोग दूसरे मोहल्लों तक पहुंच साइकिलों पर पानी से भरी बाल्टियां व केन लाद कर लाते हैं।

कई मोहल्लों में नहीं आता पानी-
पुरानी आबादी क्षेत्र में कई गली-मोहल्लों में वर्षों से नल सूखे पड़े हैं। कई दशक पुरानी पाइप लाइन होने से गलियोंं में पानी नहीं पहुंच पाता है। मोती डाक्टर की गली निवासी सत्यप्रकाश कम्बलवाल ने बताया कि उनके निवास क्षेत्र में 60 से अधिक घरों में पानी नहीं आ रहा है। ऐसे मे लोगों को दूसरे मोहल्लों में या टेंकरों से पानी खरीदना पड़ता है। कमोबेश यहीं स्थिति स्टेट बैंक के आस-पास के क्षेत्र की भी है।

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