हिण्डौनसिटी. उपखंड मुख्यालय पर लोगों की प्यास बुझाने के बहाने पाताल फोड़ा जा रहा है। मामूली लागत में मोटी कमाई करने के फेर में नियमों को ठेंगा दिखा शहर से लेकर गांवों तक पानी का अवैध कारोबार चल रहा है।

पानी माफिया भूगर्भ से जनता के हक के पानी (धरती धन) को चुराकर मनमाने दामों पर बेच रहा है। अधिकारियों के गठजोड़ से चल रहा निर्मल जल का गंदा धंधा अमरबेल की भांति पूरे सिस्टम को अपनी जकड़ में ले चुका है। पानी को बेचकर चांदी कूट रहे पानी माफिया को रोकने के प्रति ना तो प्रशासन के अधिकारी रुचि ले रहे हैं, और ना ही जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अभियंता कार्रवाई करने की हिम्मत जुटा पा रहें हैं।


भीषण गर्मी के बीच भले ही लोग जल संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन जल माफिया को रास आ चुका मुनाफाखोरी का यह अवैध धंधा धरती को गहराई तक तो सुखा ही रहा है, साथ ही लोगों की जेब भी हल्की कर रहा है। जलदाय विभाग के भूतल जलाशय और राइजिंग लाइनों के किनारे स्थित निजी ट्यूबवेल टैंकरों संचालकों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बने हुए हैं।

शहर वासियों के लिए शुरू किए गए सरकारी टैंकर भी सिस्टम की भेंट चढ़ गए हैं। पानी माफिया के बेरोकटोक जलदोहन से अलग-अलग स्थानों पर स्थित कई सरकारी जल स्त्रोत सूख चुके हैं। जमीन के भीतर से प्रतिदिन लाखों लीटर पानी का दोहन भविष्य में जल संकट की भयावह तस्वीर दिखा रहा है।


प्रतिदिन निकाल रहे 500 टैंकर पानी-
उपखंड मुख्यालय पर बेखौफ पानी माफिया द्वारा मुकंदपुरा रोड़ पर जलदाय विभाग की राइजिंग लाइन व खरेटा रोड़ पंप हाउस के भूतल जलाशयों के सटाकर ट्यूवैल खोद रखे हैं। इसके अलावा मोहन नगर में राजकीय चिकित्सालय के पास, भट्टा कॉलोनी, स्टेशन रोड़, महवा रोड़ समेत कई स्थानों पर कुओं से निजी टैंकरों में पानी भरकर बेचा जा रहा है। शहर में प्रतिदिन करीब 500 टैंकर पानी का अवैध कारोबार हो रहा है। ट्यूबवैल मालिक द्वारा टैंकर चालकों से एक टैंकर पानी भरने के एवज में 150 से 200 रुपए तक वसूल किए जाते है।

350 से 550 रुपए में बेच रहे एक टैंकर पानी-
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अभियंताओं की अनदेखी के कारण शहर में आबादी और आवश्यकता के अनुसार जलापूर्ति नहीं हो पा रही। जिससे लोग टैंकरों से पानी खरीदने की मजबूर हैं। पेयजल संकट के बीच पानी माफिया आमजन की इस मजबूरी का भरपूर फायदा उठाते हुए एक टैंकर पानी 350 से 450 रुपए में बेच रहा है। शहर से बाहर अगर कोई व्यक्ति टैंकरों से पानी मंगाता है, तो उसे 500 से 550 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं।

निरंतर गिरता जा रहा भूजल स्तर-
क्षेत्र में निरंतर गिरते भूजल स्तर की सच्चाई खुद जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के आंकड़े बयां कर रहे हैं। विभाग के अनुसार हिण्डौन खंड क्षेत्र में 2369 हैंडपंप में से करीब 898 यानी 38 फीसदी हैंडपंप बंद हो चुके हैं। शहर की सवा लाख की आबादी की प्यास बुझाने को पीएचईडी के 55 ट्यूबवेल हैं। लेकिन इनमें से पांच सूख चुके हैं। जबकि नौ ट्यूबवैल बंद पड़े हुए हैं। बेरोकटोक हो रहे जलदोहन के यही दुष्परिणाम हैं। जो अब जनमानस के सामने आने लगे हैं।

पत्रिका व्यू-
'बोरिंग खुदवाओ, पानी बेचो और धन कमाओÓ यही सूत्र है पानी माफिया की काली कमाई का। लोग लगातार तालाब या नदी के किनारे अथवा अपने खेत और भूखंडों में ट्यूबवैल खुदवा कर पानी बेच कर मोटी कमाई करने लगे हैं। जबकि असल में तो भू-जल प्राकृतिक संपदा है। जिसे नियमानुसार फसलों की सिचाई या पीने के उपयोग में ही लिया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति भूगर्भित जल का कारोबार नहीं कर सकता है। केवल सरकारी महकमा लोगों को आवश्यकता के अनुसार जलापूर्ति कर उसके एवज में निर्धारित राशि वसूल कर सकता है। फिर भी यह कारोबार हो रहा है, तो वह जिम्मेदार अधिकारियों और सिस्टम की उदासीनता को दर्शाता है। अगर प्रशासनिक महकमा पानी माफिया पर नकेल कसे तो जलदोहन रुक सकता है। अगर ऐसा हुआ तो भूजल स्तर भी बढ़ेगा।

इनका कहना है-
भूगर्भित जल को बेचना गलत है। अगर ऐसा हो रहा है, तो जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग व विद्युत निगम के अभियंताओं को साथ ले ट्यूबवैलों को चिह्नित किया जाएगा। मामला मिलने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई जाएगी।
मनीराम खींचड़, तहसीलदार, हिण्डौनसिटी.

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