करौली में कोरोना की लहर में मौतों की बढ़ती रफ्तार

करौली में कोरोना की लहर में मौतों की बढ़ती रफ्तार

जिला चिकित्सालय में चार माह की औसत के बराबर एक माह में हुई मौत
करौली. कोरोना संक्रमण के चलते जिला चिकित्सालय में मौतों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। अप्रेल माह में करौली चिकित्सालय 85 मौतें हुई , जो एक माह में सर्वाधिक हैं। मौतों की यह रफ्तार बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि मई महीने के मात्र 6 दिन में 45 मौतें हो चुकी हैं। ये सभी मौतें कोरोना से नहीं हैं लेकिन कोरोना दौर में मौतों की संख्या में वृद्घि होने पर अनेक शंकाएं उत्पन्न हो रही हैं।

By: Surendra

Published: 08 May 2021, 10:59 AM IST

करौली में कोरोना की लहर में मौतों की बढ़ती रफ्तार

जिला चिकित्सालय में चार माह की औसत के बराबर
एक माह में हुई मौत
चिकित्सा विभाग के अधिकारी भी सकते में

करौली. कोरोना संक्रमण की लहर के चलते जिला चिकित्सालय में मौतों का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है। बीते अप्रेल माह में करौली चिकित्सालय 85 मौतें हुई हैं, जो किसी एक माह की अवधि में सर्वाधिक हैं। इतना ही नहीं मौतों की यह रफ्तार और अधिक बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि मई महीने के मात्र 6 दिन में ही 45 मौतें हो चुकी हैं। हालांकि ये सभी मौतें कोरोना से नहीं हुई हैं लेकिन कोरोना संक्रमण के दौर में मौतों की संख्या में तेजी से वृद्घि होने पर कोरोना सम्बन्धित अनेक शंकाएं उत्पन्न हो रही हैं। इस स्थिति को लेकर प्रशासन व चिकित्सा विभाग के अधिकारी भी सकते में हैं।
जिला चिकित्सालय के पिछले आंकड़ों को देखें तो औसतन 25 से 30 मरीजों की मौत प्रतिमाह होती रही है। इस साल के जनवरी माह में ही 23 , फरवरी में 18 तथा मार्च माह में 26 मौत जिला चिकित्सालय में भर्ती मरीजों की हुई थी।
अपे्रल माह में कोरोना की दूसरी लहर के आगाज के साथ चिकित्सालय में भर्ती मरीजों की मौतों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्घि सामने आ रही है। जितने मरीजों की मृत्यु इस साल के शुरू के तीन माह में नहीं हुई, उससे अधिक मौत अप्रेल माह में हो चुकी हैं। करौली चिकित्सालय में अप्रेल माह में 85 मौत हुई थी। इनमेें 1 से 10 अप्रेल तक 15 मौत थी जबकि इसके बाद 70 मरीजों ने दम तोड़ दिया। यानी १० अप्रेल से कोरोना संक्रमण बढऩे के साथ मौतों की संख्या में इजाफा होना शुरू हुआ।
मौतों की यह गति इस माह में और अधिक तेजी से बढ़ रही है। मई माह के 6 दिन में 45 की मौत होने से चिकित्सा विभाग के अधिकारी भी चिंतित है। उनका मानना है कि मौतों की गति पर नियंत्रण नहीं हुआ तो इस माह में आंकड़ा २०० से पार पहुंच जाएगा।
वैसे चिकित्सा विभाग के अधिकारी इन सभी मौतों को कोरोना के कारण नहीं मानतेे हैं लेकिन मौतों की संख्या में हुई वृद्धि का कारण कोरोना को मानने से इंकार भी नहीं करते हैं।

कोविड वार्ड में 41 मौत

यहां के चिकित्सालय में जब अप्रेल माह में कोविड के मरीज आने लगे तो 10 अप्रेल से कोविड वार्ड शुरू कर दिया गया। जैसे-जैसे कोविड मरीजों की संख्या बढऩे लगी तो वार्ड और पलंगों का विस्तार भी किया जाता रहा। पुराने चिकित्सालय में अभी कोरोना के 4 वार्ड संचालित हैं जिनमें 100 मरीजों के एक साथ उपचार के प्रबंध किए हुए हैं। कोविड उपचार के लिए बनाए गए इन वार्डो में 7 मई तक 225 से अधिक मरीज भर्ती किए गए हैं। इनमें से 41की मृत्यु उपचार के दौरान हो गई जबकि 10 को जयपुर गंभीर स्थिति में जयपुर रैफर किया गया।

वार्ड-उपचार एक समान, मौत का कारण अलग

कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार के चलते हो रही मौतों को कोरोना के कारण कम दर्शाया जा रहा है। कहते है सरकार के इशारे पर ऐसा किया जा रहा है।
यहां जिला चिकित्सालय में बीते एक माह में मौतों की बढ़ी हुई संख्या आंकड़ों से साफ जाहिर होती है लेकिन चिकित्सा अधिकारी यहां पर कोविड से मौतों की संख्या केवल 10 बताते हैं। हास्यास्पद स्थिति यह है कि कोविड वार्ड में भर्ती होने, कोविड संक्रमण का उपचार किए जाने और मृत्यु होने पर कोविड की गाइड लाइन के अनुसार अंतिम संस्कार किए जाने पर भी चिकित्सा अधिकारी ऐसे मरीजों की कोविड से मौत नहीं मानते हैं।

नियम ही दोषपूर्ण

कोविड से मौत दर्शाने के मामले में सरकार के नियम दोष पूर्ण हैं। सरकार द्वारा केवल उन लोगों की मौतों को कोविड से माना जा रहा है, जिनकी आरटीपीसीआर (कोविड की लैब रिपोर्ट) रिपोर्ट पॉजीटिव आई है। जबकि काफी संख्या में लोगों की मृत्यु सीटी स्कैन में एचआरसीटी रिपोर्ट के पॉजीटिव आने के बाद हुई हंै। इस रिपोर्ट से फेफड़ों में संक्रमण का पता चलता है। इस बार लंग्स संक्रमण के कारण अधिक मौत हो रही हैं। इस कारण चिकित्सक भी कोविड के लक्षण वाले मरीजों की सीटी स्कैन कराने पर अधिक जोर दे रहे हैं।
खुद सरकार प्रचारित कर रही है कि कोविड की दूसरी लहर में वायरस सीधे लंग्स (फेफड़ों) को प्रभावित कर रहा है। बावजूद इसके फेफड़ों के संक्रमण से हुई मौतों को कोरोना की मौतों की गिनती में शामिल नहीं किया जा रहा है। जिला चिकित्सालय में १० अप्रेल बाद से ऐसी मौतों की संख्या 25 है। इसके अलावा कोविड वार्ड में 7 ऐसे मरीजों की भी जान गई है जो संदिग्ध तौर पर कोरोना संक्रमित थे। वे कोविड वार्ड में भर्ती रहे और कोरोना का इलाज लेते हुए दिवंगत हुए।

इनका कहना है..

यह सच है कि पिछले महीनों के मुकाबले में चिकित्सालय में मौतों की संख्या अधिक है लेकिन कोविड से मौत केवल 10 हैं। सरकार के नियम के अनुसार लैब की पॉजीटिव रिपोर्ट के आधार पर ही कोरोना संक्रमित मानते है। हालांकि एचआरसीटी में संक्रमण आने पर कोविड का उपचार किया जाता है।
सीटी स्कैन से कोविड संक्रमण का पता चलता है लेकिन ऐसे संक्रमित मरीजों की मौत को कोविड की गिनती में शामिल करने का नियम नहीं है।

डॉ. दिनेश गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, जिला चिकित्सालय करौली।

Surendra Bureau Incharge
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